बस थोड़ा विराम, फिर नई जगह मिलेंगे राम… अस्थायी मंदिर में दर्शन बंद, अब नए मंदिर में विग्रह विराजमान

शैलेंद्र पांडेय, अयोध्या: एक के ऊपर एक, कुल सात पत्थर रखकर ऋषि नारायण ने एक इमारत जैसी संरचना खड़ी कर दी। फिर उसे प्रणाम किया और पास की धूल उठाकर माथे पर लगा ली। कई और लोग भी इस काम में लगे हुए थे। एक महिला 11 पत्थरों को खड़ा करना चाह रही थीं, लेकिन जमीन समतल नहीं थी तो ऐसा होता कैसे? उनके हाथ एक इंटरलॉकिंग ब्लॉक लग गया। आधार मजबूत हुई, तो ऊपर 10 और पत्थर टिक गए। पुलिस वाले परेशान थे और लोगों से आगे बढ़ने का आग्रह कर रहे थे। रामलला के दर्शन के लिए कतार लंबी थी और जब तक दर्शनार्थी निकलते नहीं, तब तक नए लोगों को एंट्री नहीं मिल रही थी। लेकिन, लोग थे कि रामलला के दर्शन के बाद पत्थर खड़े करने की परंपरा को निभाए बिना निकलते कैसे। ‘आप बना क्या रहे हैं?’ इस सवाल का ऋषि नारायण ने जवाब दिया कि ‘रामलला का घर’। रामलला को लेकिन अपना नया घर मिल चुका है? इस सवाल का उन्होंने चलते-चलते बस इतना जवाब दिया, ‘मान्यता है कि ऐसा करने से मनौती पूरी होती है, इसलिए कर रहे हैं।’ शुक्रवार को चले दर्शन कार्यक्रम के बाद रामलला का अस्थायी मंदिर अब बीते वक्त की बात हो गया है। 1992 में विवादित ढांचा ध्वंस के बाद रामलला के विग्रह को करीब 27 साल टेंट में रहना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट से मंदिर के पक्ष में फैसला आने के बाद 2020 में उन्हें इस नई जगह विराजमान किया गया था। तब से हर दिन हजारों श्रद्धालु उनका यहीं पर दर्शन कर रहे थे। अब इस पुराने विग्रह को भी नए मंदिर में ही ले जाया जाएगा। वह पुरानी जगह खाली हो जाएगी, जो चार साल आस्था का केंद्र बनी रही। का कहना है कि इस पुरानी जगह का समुचित उपयोग किया जाएगा। तो शुक्रवार आखिरी दिन रहा, जब श्रद्धालुओं ने रामलला का अस्थायी जगह पर दर्शन किया। तीन दिन के विराम के बाद जब दर्शन फिर शुरू होंगे तो भक्त सीधे नए मंदिर में। नए मंदिर की झलक की होड़ शुक्रवार को अस्थायी मंदिर में रामलला के दर्शन के लिए काफी भीड़ उमड़ी। सावन में शिवालयों में जैसी रौनक होती है, वैसा ही कुछ माहौल रहा। इस बीच नए मंदिर की झलक पाने की भी होड़ रही। नए मंदिर और पुराने अस्थायी मंदिर के रास्ते के बीच में बस टिन की दीवार है, जिसका तीन दिन बाद कोई मतलब नहीं रहेगा क्योंकि नया मंदिर खुल जाएगा। कई तस्वीरें और विडियो आए हैं नए मंदिर परिसर के, लेकिन श्रद्धालुओं को चैन नहीं है। जहां भी बैरिकेडिंग में थोड़ा-सा फासला रह गया, उसी में से झांकने लगे कि मंदिर बन कैसा रहा है।