JDU-BJP ने पका ली खिचड़ी, भोग लगने का इंतजार… क्‍या बदल रही महागठबंधन की सरकार?

पटना: बिहार में लगातार यह चर्चा चल रही थी कि मकर संक्रांति के बाद कोई बड़ा सासी उलट-फेर हो सकता है। इस आशंका को बल इसलिए मिल रहा था कि नीतीश कुमार ने जिस इंडिया अलायंस के गठन में सूत्रधार की भूमिका निभाई, वे अब उससे नाराज बताए जा रहे हैं। उनकी नाराजगी की स्पष्ट झलक 13 जनवरी को उस दिन मिली, जब इंडी अलायंस की वर्चुअल बैठक में उन्होंने संयोजक बनने का ऑफर ठुकरा दिया। उल्टे उन्होंने प्रस्ताव दिया कि कांग्रेस का ही कोई आदमी यह पद संभाले। अंदरखाने की खबर यह भी बताई गई कि उन्होंने संयोजक पद के लिए लालू के नाम का भी सुझाव दिया। खैर, उनकी नाराजगी को देखते हुए कयासों का दौर शुरू हो गया कि नीतीश कहीं फिर तो पलटी नहीं मारेंगे?दही-चूड़ा भोज में सब कुछ ठीक नहीं दिखाइंडिया अलायंस की बैठक के दो दिन बाद आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के घर दही-चूड़ा भोज का आयोजन हुआ। नीतीश की नाराजगी और चुप्पी को देखते हुए माना जा रहा था कि वे शायद भोज में शामिल न हों। यहां भी लोगों के अनुमान फेल हो गए। नीतीश कुमार जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय ललन सिंह के साथ चुपके से टहलते हुए भोज में पहुंच गए। औपचारिक भेंट-मुलाकात के बाद उन्होंने भोज का आनंद भी लिया। सबको लगा कि इंडी एलायंस या महागठबंधन में कोई खटपट नहीं है। सब कुछ ठीकठाक है।भाई वीरेंद्र के बयान से बिगड़ गया माहौलभोज में पत्रकारों के प्रवेश की मनाही थी। इस बीच भोज खाकर निकले आरजेडी विधायक और लालू परिवार के करीबी भाई वीरेंद्र ने सारे किए-धरे पर पानी फेर दिया। उन्होंने एक ऐसा बयान दे दिया, जो नीतीश कुमार के सम्मान पर चोट पहुंचाने वाला था। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार लालू के आशीर्वाद से ही सीएम बने हैं। महागठबंधन में सबसे अधिक 79 विधायकों वाला आरजेडी बड़ा भाई है। मीडिया को मसाला मिल गया। नीतीश कुमार की नाराजगी में वीरेंद्र के बयान ने पलीता का काम किया।वीरेंद्र के बयान के बाद कोप भवन में नीतीश! भाई वीरेंद्र के बयान का असर यह हुआ कि नीतीश कुमार कोप भवन में चले गए। संभव है कि उन्होंने आरजेडी के शीर्ष नेतृत्व से भाई वीरेंद्र के बयान पर अपनी नाराजगी भी प्रकट की हो। शायद यही वजह रही कि शुक्रवार को सुबह-सुबह बिहार के डेप्युटी सीएम तेजस्वी यादव अपने पिता लालू यादव के साथ नीतीश से मिलने उनके आवास पर पहुंच गए। तीनों के बीच तकरीबन घंटे भर बातचीत हुई। बैठक से निकलने पर बातचीत के बारे में तो तेजस्वी ने कुछ नहीं बताया, लेकिन उनके चेहरे की तमतमाहट इशारा कर रही थी कि कुछ तो गड़बड़ है।अमित शाह की एक लाइन ने मचाया धमालइस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजस्थान पत्रिका को एक इंटरव्यू दिया। उसमें एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि एनडीए में और साथियों को जोड़ने का प्रस्ताव आता है तो इस पर विचार किया जाएगा। नीतीश की नाराजगी की खबरों के बीच उनके इंटरव्यू की यह लाइन बिहार में गूंजने लगी। गूंज इसलिए सुनाई देने लगी कि कुछ ही महीने पहले अमित शाह ने झंझारपुर की एर रैली में साफ कहा था- ‘नीतीश अब एनडीए में लौटना भी चाहें तो यह संभव नहीं होगा। उन्होंने जाति का जहर घोला है। उकी BAD ( भ्रष्ट, अराजक, दमनकारी) सरकार है। अगर किसी के मन में यह संशय हो कि चुनाव बाद भाजपा उन्हें एनडीए में ले लेगी तो स्पष्ट कहना चाहता हूं कि आपके (नीतीश) लिए भाजपा के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं। जनता भी चाहती है कि उन्हें एनडीए में न लिया जाए।’जेडीयू-आरजेडी की कड़वाहट यहीं भी झलकीनीतीश कुमार ने 13 जनवरी को बीपीएससी से नवनियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति पत्र बांटते समय कहा था कि बिहार में जो नई नियुक्तियां हो रही हैं, उसके बारे में उन्होंने अपने सात निश्चय के दूसरे चरण में घोषणा की थी। उन्होंने स्पष्ट तो नहीं बताया कि उस दौर में बिहार में एनडीए सरकार थी, पर समझने वालों ने उनका इशारा जरूर समझ लिया। अगले ही दिन आरजेडी के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी, प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव और अन्य नेताओं ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि पूर्व की सरकारों ने 15 साल में जो नहीं किया, वह काम 15 महीनों में हो गया। तेजस्वी यादव ने वादा किया था कि वे 10 लाख रोजगार देंगे। उसी कड़ी में बिहार नियुक्तियों का विश्व रिकॉर्ड बना रहा है।शाह के बाद अब जेडीयू को प्रस्ताव का इंतजारअमित शाह ने कहा है कि एनडीए में शामिल होने का किसी पार्टी का प्रस्ताव आएगा तो उस पर विचार किया जाएगा। बिहार सरकार में जेडीयू कोटे के मंत्री और नीतीश कुमार के करीबी अशोक चौधरी का कहना है कि अमित शाह ने तो कभी यह नहीं कहा कि एनडीए में नीतीश के लिए रास्ता हमेशा के लिए बंद हो गया है। अब रही प्रस्ताव की बात तो उधर से कोई प्रस्ताव तो आने दीजिए। हम लोगों ने तो कोई प्रस्ताव दिया ही नहीं है। अशोक चौधरी खुल कर पार्टी की नीतिगत बातें कहने के अधिकारी नहीं हैं। इसलिए उनके इशारों को ही समझना चाहिए। उनके बयान से इतना तो तय है कि बिहार में जिस सियासी उलट-फेर का अनुमान लगाया जा रहा था, वह सही साबित होने के करीब है।पक चुकी है खिचड़ी, सिर्फ भोग का है इंतजारइस बीच एनडीए के पार्टनर हम (से) के संरक्षक और पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर लिखा है कि दिल्ली में रहने के बावजूद बिहार के वर्तमान राजनैतिक हालात पर मेरी नजर है। राज्य के राजैतिक हालात को ध्यान में रखते हुए मैंने अपने सभी माननीय विधायकों को आगामी 25 जनवरी तक पटना में ही रहने का निर्देश दिया है। इधर शुक्रवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा के आवास पर भाजपा विधायकों और सांसदों की बैठक हुई। भाजपा ने भी अपने विधायकों को अलर्ट मोड में रखा है। जेडीयू ने भी अपने विधायकों को पटना पहुंचने का संदेश भेज दिया है। हालात देख कर इतना तय लग रहा है कि सियासी खिचड़ी पक कर तैयार है। सिर्फ भोग लगाने का इंतजार हो रहा है।