Jaago Nagrik Jaago | Online Fraud के हो गए हैं शिकार? Experts से जानें आगे क्या करें

हर कोई दिन रात मेहनत करके कुछ पैसे कमाता है। लेकिन ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार होने के बाद अगर उसे इन पैसों को गवाना पड़े तो वाकई यह बड़ी चिंता की बात है। तकनीक के आज के जमाने में ऑनलाइन फ्रॉड का भी चलन जोरों पर है। इसी को हमने समझने की कोशिश की। हमेशा की तरह हमारे खास कार्यक्रम जागो नागरिक जागो में मौजूद रहीं जानी-मानी कानून विशेषज्ञ आकांक्षा सिंह। हमने उनसे यह जानने की कोशिश की भारत में कितने प्रकार की ऑनलाइन धोखाधड़ी देखने को मिली है? क्या इसमें न्यूड वीडियो कॉल को भी शामिल किया जाता है? शिकार होने पर क्या करें, कहां दर्ज कराएं शिकायत? और ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के लिए क्या करें? इसे भी पढ़ें: Gyanvapi मामले का क्या अदालत के बाहर हो जाएगा समाधान? हिंदू याचिकाकर्ता ने लिखा पत्र, मस्जिद कमेटी ने दिया जवाबऑनलाइन धोखाधड़ी के प्रकार- भारत में बात करें तो ऑनलाइन फ्रॉड कई तरह के हैं। हालांकि, अगर इसे बांटने की कोशिश करें तो हम ऑथराइज्ड और अनऑथराइज्ड में इसे डिवाइड कर सकते हैं। ऑथराइज्ड उसे कह सकते हैं जिसमें डायरेक्टली आपसे बात करके किसी चीज के एवज में पैसे ट्रांसफर करवाया जाए। अनऑथराइज्ड उसे कहेंगे जहां किसी ईमेल या लिंक के जरिए हमारी गोपनीय जानकारी साझा की जाती है और उसके बाद धीरे-धीरे हमारे अकाउंट से पैसे कट से जाते हैं। न्यूड वीडियो कॉल से कैसे बचें- इसे हम ऑथराइज्ड स्कैम में डाल सकते हैं। इसे हम ब्लैक मेलिंग में भी डाल सकते हैं। यह अक्सर वीडियो कॉलिंग के जरिए की जाती है जिसमें सामने से आपको कपड़े उतारने पर मजबूर किया जाता है और बाद में उसी वीडियो को आपके परिचितों के बीच फैलाने को लेकर ब्लैकमेल किया जाता है और फिर आपसे ठगी की जाती है। शिकार होने पर क्या करें- सबसे पहले आपको अपने कार्ड या बैंक अकाउंट को ब्लॉक कराना चाहिए। इसके बाद 1930 पर अपनी कंप्लेंट करानी चाहिए। आपको पूरी परिस्थिति को वहां बताना होगा। इसके अलावा सारी डिटेल्स को आप को साझा करने पड़ेंगे। कौन सा सबूत अपने पास रखे- आप साइबर थाने में जा सकते हैं। अगर वह दूर है तो आप नॉर्मल थाने में भी जाकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। लेकिन सबसे पहले हेल्पलाइन नंबर पर आपको कंप्लेंट करनी चाहिए। ठगी से संबंधित आपके पास जो भी जानकारी हो, उसे साझा करना चाहिए। उसे अपने पास संभाल कर रखना चाहिए ताकि जरूरत के हिसाब से हम पुलिस को इसे सौंप सकें। पहचान गुप्त रखी जाएगी- नियम के मुताबिक पहचान गुप्त रखी जाएगी। इसके अलावा यौन उत्पीड़न के मामले में भी देखा जाता है। उसमें भी पीड़ित के नाम को गुप्त रखा जाता है। हालांकि कई बार ऐसा होता है कि जब आप पुलिस में शिकायत करते हैं तो वहां कई लोग आपको जानते हैं और इस वजह से भी नाम का खुलासा होने का डर रहता है।मामला कोर्ट तक जाएगा- पुलिस स्टेशन यहां भी एक स्टार्टिंग प्वाइंट है। इसके बाद मामला पुलिस स्टेशन से कोर्ट में जाएगा। अगर पुलिस को मामले में कोई सुबूत नहीं मिलता है तभी वह मामला कोर्ट में नहीं जाता है। अगर वाकई में इस तरह की चीजें हुई हैम तो वह कोर्ट में जाता ही है। क्या पैसे वापस मिलेंगे- पैसे मिलने की गारंटी नहीं होती है। हां, कोशिश की जाती है। कई बार आपको मिल जाती है। कई बात नहीं मिलती है। कई बार कुछ रकम ही मिल पाती है। यह उस बात पर भी निर्भर करता है कि आपने कितनी जल्दी कंप्लेंट कराई है।  इसे भी पढ़ें: Imran Khan को नहीं मिली राहत, इस्लामाबाद कोर्ट ने 9 जमानत याचिकाएं की खारिज धोखाधड़ी से निपटना कठिन क्यों- टेक्नोलॉजी में लगातार इजाफा हो रहा है। लगातार नई नई चीजें सामने आ रही है। इसलिए ऑनलाइन फ्रॉड में भी कई चुनौतियां सामने दिखाई देती हैं। ऑनलाइन फ्रॉड से बचने का सबसे बेहतर तरीका यही है कि आप सावधान रहें, अपनी निजी जानकारी को कहीं साझा ना करें।