ईरानी ड्रोन, मिसाइलें… यमन के हूतियों के पास कौन-कौन से हथियार, सुपरपावर अमेरिका और इजरायल से एक साथ भिड़ा

साना: यमन के हूती विद्रोही इस समय दुनियाभर में काफी चर्चा में है। दुनिया की तीन बड़ी फौजी ताकतें, अमेरिका, इजरायल और ब्रिटेन से हूती भिड़े हुए हैं। हूती बीते साल नवंबर में उस समय अचानक चर्चा में आ गए थे जब दुनियाभर को चौंकाते हुए उन्होंने लाल सागर में गैलेक्सी लीडर नाम के जहाज को अगवा कर लिया था। गाजा में इजरायल के हमलों को विरोध में हूतियों ने इस काम को अंजाम दिया था। इसके बाद से लगातार हूती लाल सागर में हमले में कर रहे हैं। हूतियों के बढ़ते हमलों का जवाब देते हुए गुरुवार को ब्रिटेन और अमेरिका की फौज ने यमन में हमले किए हैं। इन हमलों के बाद हूतियों ने भी बदला लेने की बात कहते हुए ब्रिटेन और अमेरिका को निशाना बनाने का ऐलान कर दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि हूतियों की ताकत क्या है, जिसके बूते पर वह दुनिया की सुपरपावर से भिड़ रहे हैं। आइए जानते हैं कि हूतियों के हथियारों के जखीरे में क्या-क्या है।हूती यमन में एक बड़े क्षेत्र को नियंत्रित करते हैं। गाजा पट्टी पर इजरायल के हमले के जवाब में उन्होंने लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। हूतियों ने रणनीतिक रूप से बैलिस्टिक मिसाइलों और प्रोजेक्टाइल का भी इस्तेमाल किया है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) की ‘द मिसाइल वॉर इन यमन’ शीर्षक से छपी 2020 की रिपोर्ट में हूती ग्रुप के मिसाइल भंडार की जानकारी दी गई थी, साथ ही बताया गया था कि उन्होंने कैसे ये हासिल किए।सबसे पहले यमनी सरकार से ही हासिल किए हथियारहूतियों को हथियार का एक महत्वपूर्ण स्रोत यमनी सरकार ही रही है। जो मूल रूप से यमन को सोवियत संघ से मिला था। यमन की सेना के पास 1970 के दशक की स्कड और ओटीआर-21 तोचका मिसाइलों सहित कई प्रकार की मिसाइलें थीं। हूती आंदोलन ने यमन के भीतर राजनीतिक उथल-पुथल का फायदा उठाया और इन हथियारों पर नियंत्रण कर लिया। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के अनुसार, हूतियों के पास यमनी सेना के हथियारों के भंडार के करीब 70 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण है। हूतियों ने रॉकेट सहित काफी हथियार युद्धक्षेत्र पर कब्जे के जरिए भी हासिल किए हैं। हूती लड़ाकों ने सऊदी बलों और दूसरी मिलिशिया से लड़ाई के दौरान रॉकेट लॉन्चर और दूसरे उपकरणों पर कब्जा किया।ईरान से हूतियों को बड़ी मदद मिली है। ईरान हूतियों के लिए उन्नत मिसाइल तकनीक के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में काम करता है। रिपोर्ट में हूतियों के पास ऐसी काफी मिसाइलों की पहचान की गई है, जो ईरान में बनी हैं। इनमें बुर्कान श्रृंखला की बैलिस्टिक मिसाइलें, कुद्स-1 क्रूज मिसाइल, अल-मंदब-1 एंटी-शिप मिसाइल और सतह से हवा में मार करने वाली सैय्यद-2सी मिसाइल शामिल हैं। हूतियों को समर्थन ईरान के लिए क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों, विशेष रूप से सऊदी अरब को चुनौती देने के लिए अहम है। सीएसआईएस रिपोर्ट हूतियों के ड्रोन के इस्तेमाल पर भी प्रकाश डालती है, ये बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में आसानी से जमा किए जा सकते हैं और एक से दूसरी जगह ले जाए जा सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हूती बलों न विस्तारित-रेंज वाले मानव रहित यूएवी का आयात कर इनकी काफी तादाद जमा की है। कौन हैं हूती विद्रोही?हूतियों का यह ग्रुप यमन के उत्तरी क्षेत्र में शिया मुस्लिमों का सबसे बड़ा संगठन है। हूती संगठन का जन्म यमन 1980 और 1990 के दशक में हुए हूती आंदोलन से हुआ। हूती विद्रोही परिवार ने शिया इस्लाम के जायदी संप्रदाय के समर्थन से आंदोलन शुरू किया। हूतियों का यमन सरकार के साथ टकराव हुआ और यमन में एक लंबी लड़ाई शुरू हो गई। अपनी सरकार के साथ-साथ सऊदी अरब से भी हूतियों का लंबा टकराव हो चुका है। हूतियों ने 2004 से 2010 तक यमन की सालेह सरकार की सेना से छह बार युद्ध किया। हूती विद्रोहियों के पास तमाम हथियारों के अलावा करीब 2 लाख की सेना होने का दावा किया जाता है।