हल्द्वानी में फसाद के पीछे जिला प्रशासन की लापरवाही? पहले ही दी गई थी इंटेलिजेंस रिपोर्ट

हल्द्वानी: उत्तराखंड के हल्द्वानी को जलाने की तैयारी पहले से ही हो चुकी थी। इसको लेकर खुफिया एजेंसी ने स्थानीय प्रशासन को रिपोर्ट भी भेजी थी, लेकिन प्रशासन ने उसको नजरअंदाज कर दिया था। जिसका नतीजा ये हुआ कि हल्द्वानी में बड़े स्तर पर हिंसा भड़क गई। राज्य के गृह विभाग के सूत्रों ने कहा कि दंगा भड़कने के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी द्वारा वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ बुलाई गई बैठक के दौरान यह मुद्दा उठा है।एक हफ्टे पहले ही इंटेलिजेंस ने प्रशासन को रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें कहा गया था कि मस्जिद और मदरसे को हटाने की कार्रवाई को लेकर अब्दुल मलिक के साथ मुस्लिम संगठन और कट्टरपंथी लोग विरोध कर सकते हैं। एजेंसी ने बनभूलपुरा विवादित स्थल पर विरोध-प्रदर्शन के बारे में सूचित भी किया था। एजेंसी ने रिपोर्ट में बताया था कि हिंसा में महिलाएं और बच्चे भी शामिल रह सकते हैं।इंटेलिजेंस रिपोर्ट में जमीयत उलेमा हिंद और अब्दुल मलिक की कुमाऊं कमिश्नर से बातचीत का भी जिक्र किया गया था। अब्दुल मलिक ने प्रस्तावित अतिक्रमण की कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए कहा था। रिपोर्ट में कार्रवाई के दौरान विरोध को लेकर फोटोग्राफी, पीएसी तैनाती, अतिक्रमण को तड़के हटाए जाने जैसे तरीकों को भी अपनाने की सलाह दी गई थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर हर बिंदु पर लापरवाही दिखाई, जिसका नतीजा हल्द्वानी हिंसा रहा। बनभूलपुरा में नगर निगम और पुलिस प्रशासन की टीम अवैध मदरसा और धार्मिक स्थल को तोड़ने पहुंची थी। गुस्साई भीड़ ने टीम पर पथराव और आगजनी की थी। हमले में 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने उपद्रवियों के खिलाफ सख्त ऐक्शन लेने के आदेश दिए थे।