दिवाली पर लगेगा महंगाई का झटका! खाद्य तेलों की कीमतों में हो सकता है इजाफा

महंगाई की मार झेल रही आम जनता को इस दिवाली में भी राहत मिलती नज़र नहीं आ रही है. क्योंकि खाद्य तेलों की क़ीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने यह दावा किया है. उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह ओपेक देशों द्वारा पेट्रोलियम क्रूड के उत्पादन में कटौती करने की घोषणा एवं डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत कम होने से खाद्य तेल के दामों में अचानक से अच्छी खासी वृद्धि देखने को मिल रही है.
भारत के उपभोक्ताओं को उम्मीद थी कि देश के सबसे बड़े त्यौहार दिवाली पर कम दाम पर खाद्य तेल मिलेगा, लेकिन ओपेक के फैसले और कमजोर रुपये ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. उन्होंने बताया कि पिछले 3 महीने से अधिक समय से खाद्य तेल निर्यातक देशों में उत्पादन बढ़ने से एवं देश भर में अच्छी बारिश के चलते नई फसल का रकबा बढ़ने की उम्मीद से खाद्य तेलों के दाम लगातार गिर रहे थे. लेकिन, अब हालात बदल गए हैं.
त्यौहार के मौसम में बढ़ रही है डिमांड
ठक्कर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर पाम तेल की खरीद इस तिमाही में बढ़ रही है. खरीदार प्रतिद्वंद्वी सोया तेल और पाम के तेल के बीच दामों में ज्यादा अंतर होने और गिरते दाम को देखते हुए भारत में भी व्यापारियों ने स्टॉक कम रखा था. ताकि नुकसान कम उठाना पड़े. लेकिन, अब त्यौहार नजदीक आने से सबकी एक साथ खरीदारी से डिमांड बढ़ी है.
नवंबर में भारत में शिपमेंट के लिए पाम तेल की पेशकश लागत, बीमा और माल ढुलाई (सीआईएफ) सहित 941 डॉलर प्रति टन पर की जा रही है. जबकि कच्चे सोया तेल के लिए 1,364 डॉलर है. यह 423 डॉलर का अंतर 10 वर्षों में सबसे अधिक है. एक साल पहले पाम तेल पर सोया तेल के बीच का अंतर करीब 100 डॉलर प्रति टन था.
पाम तेल का कितना हुआ आयात
शंकर ठक्कर ने कहा कि शीर्ष पाम तेल उत्पादक इंडोनेशिया के निर्यात को बढ़ाकर स्टॉक को कम करने के प्रयासों से कीमतों पर फिलहाल दबाव बना हुआ है, जबकि प्रतिद्वंद्वी तेल अधिक बढ़ रहे हैं. जुलाई के अंत में इंडोनेशिया के ताड़ के तेल का भंडार 2021 के अंत में लगभग 4 मिलियन टन से बढ़कर 5.91 मिलियन टन हो गया. क्योंकि इंडोनेशिया ने 2022 की पहली छमाही में निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. सितंबर में भारत का पाम तेल आयात बढ़कर 12 लाख टन हो गया, जो एक साल में सबसे ज्यादा है और देश चौथी तिमाही में 30 लाख टन आयात कर सकता है.
खाद्य तेल के भाव में कितनी तेजी?
संगठन के महामंत्री तरुण जैन ने कहा ओपेक देशों द्वारा पेट्रोलियम क्रूड के उत्पादन में कटौती करने से क्रूड के दामों में तेजी आई है. जिसका सीधा असर पाम के तेल के दामों में भी देखने को मिल रहा है. जिससे जैव ईंधन के लिए पाम तेल की खपत में भी वृद्धि हुई है. पिछले 1 सप्ताह के भीतर पाम तेल के दामों में 10 से 12 रुपया प्रति लीटर, सोयातेल के दाम में 14 से 16 रुपये और सनफ्लावर तेल के रेट में 18 से 20 रुपए तक की तेजी देखने को मिली है
कमजोर रुपये का क्या हो रहा असर
ठक्कर ने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच जंग में फिर से कड़ा संघर्ष देखने को मिल रहा है. जिससे सनफ्लावर तेल की आपूर्ति बाधित हो रही है और दामों में भी तेजी आई है. युद्ध के चलते यूरोप में हीटिंग ऑयल और डीजल की तंग आपूर्ति के बाद से ऊर्जा के उद्देश्य से बहुत सारे पाम तेल की खपत हो रही है. ऊपर से रही सही कसर डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये ने निकाल दी. इससे आयातित तेलों के दामों पर असर पड़ा है. कुछ दिन पहले डॉलर के मुकाबले रुपये का दाम 79 के करीब चल रहा था, जो अब 83 के करीब पहुंच चुका है. जिससे आयातित तेलों के दामों में वृद्धि हुई है.
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