मालदीव से वापस लौटेंगे भारतीय सैनिक? आज होगी कोर ग्रुप की दूसरी मीटिंग

माले: मालदीव में भारतीय सेना की मौजूदगी को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद चल रहा है। इस बीच एक महत्वपूर्ण डेवलपमेंट देखने को मिला है। मालदीव में भारतीय सैन्य कर्मियों की उपस्थिति को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत होनी है। बातचीत के लिए मालदीव से एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंचा है। प्रतिनिधिमंडल में राजनयिक और सैन्य दोनों प्रतिनिधि शामिल हैं। शुक्रवार को भारत के साथ इस मुद्दे पर बातचीत के लिए दूसरी कोर ग्रुप मीटिंग में भाग लेने की उम्मीद है।राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने मालदीव से भारतीय सैन्य कर्मियों को हटाने की मांग की थी। उनकी मांग के बाद कोर ग्रुप का गठन किया गया था। मालदीव में मानवीय उद्देश्य के लिए भारतीय सैनिक तैनात हैं। कोर ग्रुप की पहली बैठक 14 जनवरी को माले में हुई। पहली मीटिंग के बाद भारत की ओर से बयान जारी किया गया। इसमें कहा गया, ‘मीटिंग में पारस्परिक रूप से व्यावहारिक समाधान खोजने पर केंद्रित चर्चाओं पर प्रकाश डाला गया, जो मालदीव के लोगों के लिए मानवीय और मेडिकल इमरजेंसी रेसक्यू से जुड़ी सेवाएं देने वाले विमानन प्लेटफार्मों के निरंतर संचालन की इजाजत देगा।’ भारत विरोधी हैं मोहम्मद मुइज्जूहालांकि इसी मीटिंग को लेकर मालदीव का पक्ष कुछ और था। मालदीव ने कहा था कि मीटिंग में भारतीय सैन्य कर्मियों की वापसी को फास्ट ट्रैक करने की आवश्यक्ता पर जोर दिया गया। मालदीव की सत्ता में आने के बाद से ही मोहम्मद मुइज्जू भारतीय सैनिकों की वापसी का मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने अपना पूरा चुनाव इंडिया आउट के नाम पर लड़ा। मोहम्मद मुइज्जू मालदीव के लोगों के बीच भारत की ऐसी छवि बनाने में कामयाब रहे हैं, जिससे लगता है कि यहां भारतीय सेना की एक बड़ी टुकड़ी है। लेकिन ऐसा नहीं है।क्या कर रहे भारतीय सैनिकभारतीय सेना के लगभग 77 कर्मी मालदीव में मौजूद हैं। यह सैन्य कर्मी मालदीव के लोगों की मदद के लिए हैं। यहां दो हेलीकॉप्टर और एक विमान है, जिसने अब तक सैकड़ों बार लोगों की मदद की है। मालदीव में मौजूद भारतीय सैनिक इन विमानों और हेलीकॉप्टर का संचालन करने के लिए हैं। कॉप-28 के दौरान पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुइज्जू के बीच मीटिंग हुई थी। इसके बाद एक कोर ग्रुप बनाने को लेकर सहमति हुई थी।