भारत ने घटाई मालदीव की मदद तो आगे आया दुनिया से भीख मांग रहा पाकिस्‍तान, काकर की शरण में जहरीले मुइज्‍जू

इस्‍लामाबाद: चीन, सऊदी अरब, आईएमएफ समेत दुनियाभर से पैसे की भीख मांग रहे पाकिस्‍तान ने मालदीव के भारत विरोधी राष्‍ट्रपति मोहम्‍मद मुइज्‍जू से वादा किया है कि वह इस द्वीपीय देश की मदद करेगा। पाकिस्‍तान ने गुरुवार को मालदीव को आश्‍वासन दिया कि वह विकास की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा। पाकिस्‍तान ने यह ऐलान ऐसे समय पर किया है जब भारत ने राजनयिक तनाव के बाद मालदीव को दी जाने वाली आर्थिक सहायता को 22 फीसदी घटा दिया है। भारत अगले वित्‍त वर्ष में 600 करोड़ रुपये की वित्‍तीय मदद मालदीव को देने जा रहा है जो पहले के मुकाबले 170 करोड़ रुपये कम है। इसके बाद मोहम्‍मद मुइज्‍जू अब पाकिस्‍तान की शरण में पहुंचे हैं। यही नहीं मालदीव के टूरिज्‍म चार्ट में भी भारत पांचवें स्‍थान पर पहुंच गया है। भारत संग चल रहे तनाव के बीच पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री अनवारुल हक काकर और मालदीव के राष्‍ट्रपति के बीच में टेलिफोन पर बातचीत हुई है। इस दौरान दोनों ही देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई। मालदीव के राष्‍ट्रपति कार्यालय ने एक बयान जारी करके इसकी जानकारी है। काकर ने मुइज्‍जू को आश्‍वासन दिया कि मालदीव की विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए पाकिस्‍तान की सरकार उसे मदद देगी। चीन की गोद में पहुंचे मुइज्‍जू, भारत के खिलाफ हमलावर मुइज्‍जू और काकर दोनों ने ही दोनों पक्षों के बीच शीर्ष प्राथमिकताओं पर चर्चा की और अंतरराष्‍ट्रीय मंचों पर एक दूसरे के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। काकर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के संकट से निपट रहे मालदीव की मदद के लिए पाकिस्‍तान अपनी सहायता देगा। पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री ने यह टेलिफोन ऐसे समय पर किया है जब हाल ही में मुइज्‍जू चीन की यात्रा से लौटे हैं। चीन की यात्रा के बाद से ही मुइज्‍जू ने अपने भारत विरोधी रुख को और जहरीला कर लिया है। वह लगातार भारत के खिलाफ हमले बोल रहे हैं। पाकिस्‍तान और चीन दोनों ही करीबी दोस्‍त हैं और भारत के खिलाफ चालें चलते रहते हैं। मालदीव में बढ़ते कट्टरपंथ के पीछे पाकिस्‍तान के कट्टरपंथी ताकतों को ही जिम्‍मेदार माना जाता है। मालदीव में कई साल पहले जब विनाशकारी भूकंप आया था तब लश्‍कर से जुड़े लोग वहां पहुंचे और भारत के खिलाफ भरना शुरू किया। यही नहीं मालदीव के अंदर इस्‍लामिक कट्टरपंथ के बीज बोए गए। आज इसका असर यह हुआ है कि कट्टरपंथियों की जड़ें यहां बहुत गहरी हो गई हैं। मालदीव के अंदर इंडिया आउट कैंपेन चलाया जा रहा है। मालदीव भारत की सेना को हटाना चाह रहा है जिसका वहां के विपक्षी दल ही विरोध कर रहे हैं। मालदीव ने चीन के जासूसी जहाज को अपने यहां आने की अनुमति दी है जिसका भारत और अमेरिका दोनों ही कड़ा विरोध करते हैं।