वेंटिलेटर पर I.N.D.I.A. गठबंधन, रिश्ते निभाने की बजाय हर दल की अलग-अलग राह! नीतीश-केजरीवाल और ममता के दिखने लगे हैं तल्ख तेवर

पटना: विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A. के आसार अच्छे नजर नहीं आ रहे। सीटों और सभाओं के लिए इंडी अलायंस में जिस तरह की मनमानी दिख रही है। उससे तो यही लगता है कि चुनाव की घोषणा होते-होते कहीं गठबंधन की कड़ियां टूट-बिखर न जाएं। विपक्षी एकता के सूत्रधार जेडीयू नेता और बिहार के सीएम ने जिस तरह भाजपा विरोधी दलों को एकजुट करने की कोशिश की, अब उतनी ही आसानी से वे इसके बिखराव की बुनियाद भी डाल रहे हैं। नीतीश से कदमताल करते आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के सीएम भी दिख रहे हैं।नीतीश कुमार घोषित करने लगे अपने उम्मीदवार नीतीश कुमार इंडी अलायंस की चुनावी तैयारियों से संतुष्ट नहीं हैं। सीट शेयरिंग और साझा सभाओं की तारीखें तय नहीं होने से नीतीश कुमार कांग्रेस से इतने खफा हैं कि उन्होंने पहले ही जेडीयू के दो उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। बिहार में सीतामढ़ी सीट से देवेश चंद्र ठाकुर के नाम की घोषणा जेडीयू ने कर दी है। ठाकुर खुद यह बात बताते हैं। अब तो सीतामढ़ी के उनके दौरे भी बढ़ गए हैं। जेडीयू ने अरुणाचल प्रदेश में भी एक सीट पर उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। पश्चिमी अरुणाचल प्रदेश की लोकसभा सीट से जेडीयू ने अपने प्रदेश अध्यक्ष रूही तागुंग को उम्मीदवार बनाया है।अरविंद केजरीवाल भी चले नीतीश कुमार की राह आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी नीतीश कुमार की राह पर चल पड़े हैं। उन्होंने गुजरात की भरूच सीट से अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी है। केजरीवाल तीन दिवसीय गुजरात दौरे पर हैं। गुजरात में वे कई सभाएं करेंगे। एक रैली में उन्होंने भरूच लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी के विधायक चौतर वसावा की उम्मीदवारी का ऐलान कर दिया। आश्चर्य की बात यह रही कि आम आदमी पार्टी के नुमाइंदे दिल्ली में कांग्रेस नेताओं के साथ बैठ कर सीट शेयरिंग पर मंथन कर थे और गुजरात की सभा में केजरीवाल उम्मीदवार की घोषणा कर रहे थे।केजरीवाल की सभाएं शुरू, नीतीश ने तारीखें तय कीं इंडी अलायंस की पिछली बैठक में राय बनी थी कि सभी पार्टियों की जगह-जगह संयुक्त सभाएं और रैलियां होंगी। कब से होंगी, यह तय नहीं हुआ। इस बीच आम आदमी पार्टी ने गुजरात से चुनावी रैलियों की शुरुआत कर दी। अगर नीतीश कुमार की वाराणसी में होने वाली रैली स्थगित नहीं हुई होती तो वे इंडी अलायंस में रहते हुए अकेले रैली करने वाले पहले व्यक्ति होते। गुजरात में चुनावी रैलियां कर केजरीवाल ने नीतीश को पीछे छोड़ दिया। वैसे नीतीश की पार्टी जेडीयू ने भी इसी महीने 21 तारीख को झारखंड के रामगढ़ में रैली करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा यूपी और हरियाणा में भी नीतीश की रैली का पार्टी ने ऐलान किया है।समझौता तोड़ राहुल भी निकल रहे न्याय यात्रा पर इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी 14 जनवरी से भारत जोड़ो न्याय यात्रा पर निकल रहे हैं। न्यौता तो उन्होंने इंडी अलायंस के सभी घटक दलों को भी दिया है, लेकिन उनकी सहभागिता की स्वीकृति कहीं से अभी तक नहीं मिली है। राहुल का कहना है कि ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ देश के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और बुनियादी मुद्दों को लेकर निकाली जा रही है। राहुल की यात्रा की शुरुआत मणिपुर के इंफाल से होनी है। हालांकि मणिपुर प्रशासन ने अभी तक इसकी मंजूरी नहीं दी है। यात्रा 6700 किलोमीटर लंबी होगी, जो 66 दिनों में पूरी होगी। मल्लिकार्जुन खरगे के मुताबिक यात्रा मणिपुर से शुरू होकर नगालैंड, असम, अरुणचाल होते हुए देश के 15 राज्यों से गुजरेगी। 110 जिलों से होते हुए यह यात्रा 100 लोकसभा सीटों और 337 विधानसभा सीटों को कवर करेगी। यात्रा मुंबई में खत्म होगी। यात्रा का सबसे लंबा 1000 किलोमीटर यूपी में होगा। बंगाल के सात जिलों में 523 किलोमीटर का सफऱ राहुल करेंगे। बंगाल में वे पांच दिनों तक रहेंगे। राहुल की यात्रा बिहार और झारखंड से भी गुजरेगी। यात्रा में इंडी अलायंस के सभी नेताओं को बुलाने की तैयारी है।अकेले-अकेले कांग्रेस जुटी है चुनाव की तैयारियों में कांग्रेस ने हर जिले के संयोजक नियुक्त कर दिए हैं। चुनाव की अपनी सीटों की संख्या सार्वजनिक कर दी है। शायद नीतीश और केजरीवाल को यही नागवार लग रहा। पहले से ही बात-बात पर बिदकने वाली बंगाल की सीएम और टीएमसी प्रमुख ईडी पर हुए हमले को लेकर अधीर रंजन चौधरी के बयान से बमकी हुई हैं। चौधरी ने बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर दी है। हालांकि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इसे उनका निजी बयान बताते हुए पल्ला झाड़ लिया है। खैर, कांग्रेस सफाई दे या न दे, ममता के मन-मिजाज पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। वे तो अलायंस में साथ रहते हुए भी बंगाल में कांग्रेस और लेफ्ट को बीजेपी की तरह अपना दुश्मन मानती रही हैं। सीटों और सभाओं के लिए इंडी अलायंस में जिस तरह की मनमानी दिख रही है। उससे तो यही लगता है कि चुनाव की घोषणा होते-होते कहीं गठबंधन की कड़ियां टूट-बिखर न जाएं। विपक्षी एकता के सूत्रधार जेडीयू नेता और बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने जिस तरह भाजपा विरोधी दलों को एकजुट करने की कोशिश की, अब उतनी ही आसानी से वे इसके बिखराव की बुनियाद भी डाल रहे हैं। नीतीश से कदमताल करते आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी दिख रहे हैं।