उत्तराखंड के जोशीमठ में धंसती जमीन से दहशत में लोग, अब सरकार की तंद्रा भंग

उत्तराखंड के जोशीमठ में सैकड़ों घरों में दरारें आने से लोग दहशत में हैं। लोगों को अनहोनी का डर सता रहा है। डर का आलमय यह है कि अब तक 66 परिवार जोशीमठ से पलायन कर चुके हैं। जो लोग यहां बचे हैं, वह लगातार विरोध-प्रदर्शन कर राज्य की बीजेपी सरकार से इस संबंध में कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

वैज्ञानिकों की एक टीम का किया गया गठनलोगों के विरोध-प्रदर्शन के बीच राज्य सरकार की नींद टूटी है। अब सरकार ने 500 से ज्यादा घरों में पड़ी दरारों के मामले में संज्ञान लिया है। राज्य सरकार ने कहा कि वह जोशीमठ में जमीन धंसने और मकानों में दरार के कारणों का पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई है। यह टीम मौके पर जाकर कारणों की जांच करेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर गठित टीम में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, वाडिया संस्थान और IIT रुड़की के इंजीनियरों को शामिल किया गया है।

जोशीमठ नगरपालिका अध्यक्ष शैलेंद्र पवार के मुताबिक, अब सिंहधार और मारवाड़ी में दरारें बढ़ने का सिलसिला शुरू हो गया है। उन्होंने बताया कि सिंहधर जैन मोहल्ले के पास बद्रीनाथ एनएच और मारवाड़ी में वन विभाग की चेक पोस्ट के पास जेपी कंपनी गेट में लगातार दरारें आ रही हैं। यह दरार हर घंटे बढ़ रही है जोकि परेशानी की बात है।स्थानीय लोगों ने किया प्रदर्शनभूस्खलन के बीच बुधवार को स्थानीय लोगों ने मशाल जुलूस निकालकर विरोध-प्रदर्शन किया। जल विद्युत परियोजना एनटीपीसी के खिलाफ लोगों ने जमकर नारेबाजी की और जल्द से जल्द जोशीमठ में कार्यरत जल विद्युत परियोजना के कार्य को रोकने और जोशीमठ के ट्रीटमेंट के लिए उचित प्रयास करने की मांग की।

जोशीमठ में एशिया की सबसे लंबी रोपवे बंदघरों में पड़ती दरारें और धंसती जीमन के बीच जोशीमठ में एशिया की सबसे लंबी रोपवे सेवा पर्यटकों के लिए बंद कर दी गई। रोपवे के टावर नंबर 1 पर जमीन धंसने की वजह से यह फैसला लिया गया है। जोशीमठ में आपदा आने की जताई गई आशंका उत्तराखंड के सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने इस मामले में चिंता जाहिर की है।

उन्होंने कहा कि जोशीमठ में जिस तरह के हालात बन रहे हैं, उस पर जल्दी ही अगर संज्ञान नहीं लिया गया, तो एक बड़ी आपदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस पर तुरंत करवाई करने की जरूरत है। यह इलाका समुद्र तल से करीब 6 हजार फीट की ऊंचाई पर है और सिस्मिक जोन 5 में आता है। यानी प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से काफी संवेदनशील है। ऐसे में इस इलाके में रह रहे लोगों के लिए खतरा बड़ा है।