प्रेशर पॉलिटिक्स से मुश्किल में I.N.D.I.A, 25 दल मिलकर कांग्रेस की झोली भरेंगे या तोड़ेंगे गठबंधन?

नई दिल्ली : 26 पार्टियों की टीम I.N.D.I.A की तीसरी बैठक मुंबई में 31 अगस्त और एक सितबंर को होगी। इस बैठक में इस गठबंधन के संयोजक का फैसला होगा। इसके अलावा सीट शेयरिंग पर भी चर्चा होने की संभावना है। मीटिंग से पहले ही विपक्षी गठबंधन में खींचतान शुरू हो गई है। कौन I.N.D.I.A का संयोजक बनेगा? सीटों के बंटवारे में किसके हिस्से में कितनी सीटें आएंगी? इन सवालों पर आम सहमति की गुंजाइश नहीं दिख रही है। अपना प्लान लेकर दिल्ली में लॉबिंग कर रहे हैं तो के नेताओं ने भी प्रेशर पॉलिटिक्स शुरू कर दी है। कांग्रेस के नेता बयानबाजी से अपनी दावेदारी की हवा बना रहे हैं। कांग्रेस की डिमांड I.N.D.I.A के मिशन 2024 को पलीता लगाने के लिए काफी है। ऐसे में पीएम मोदी की भविष्यवाणी सच साबित हो सकती है। दिल्ली में केजरीवाल करेंगे सीटों का दान ?प्रेशर पॉलिटिक्स के तहत दिल्ली में कांग्रेस की नेता अलका लांबा ने लोकसभा की सभी सात सीटों पर चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा और एमसीडी चुनाव में अपनी ताकत दिखा चुकी है। एमसीडी चुनाव में आम आदमी पार्टी को 134 और कांग्रेस को सिर्फ 9 सीटें मिली थीं। अरविंद केजरीवाल I.N.D.I.A के नाम पर कांग्रेस को कितनी सीट तोहफे में देंगे, अभी क्लियर नहीं है। मगर अलका लांबा के बयान ने दिल्ली में गठबंधन की उम्मीदें कम कर दी हैं। हाल में किए गए कई सर्वे में आम आदमी पार्टी की जीत की संभावना भी जताई गई है। 2014 और 2019 में बीजेपी ने दिल्ली की सभी सात सीटों पर कब्जा किया था। अभी पंजाब को लेकर दोनों पार्टियों का बयान आना बाकी है। अगर दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी कांग्रेस को एक सीट देने का त्याग करती है तो गुजरात में वह हिसाब मांग सकती है। पीएम नरेंद्र मोदी के कारण गुजरात की सभी 26 लोकसभा सीटों पर बीजेपी की जीत संभावित है, जिससे आम आदमी फायदा को फायदा नहीं होगा। झारखंड में भी कांग्रेस ने तगड़ी मांग रखी झारखंड में लोकसभा की 14 सीटें हैं। कांग्रेस के पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी ने झारखंड की 9 सीटों पर दावा ठोंक दिया है, जबकि राज्य के प्रमुख पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) है। राष्ट्रीय जनता दल और झामुमो गठबंधन के पुराने साथी हैं। कांग्रेस की डिमांड के बाद इनके हाथ क्या रहेगा? झामुमो और आरजेडी के लिए कांग्रेस के दावे को स्वीकार करना आसान नहीं है। अभी झारखंड की 11 लोकसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। कांग्रेस, झामुमो और एजेएसयू के खाते में एक-एक सीट ही है। यूपी में भी फैसला कर लिया, 21 सीटों पर चुनाव लड़ेगी कांग्रेस उत्तरप्रदेश में भी कांग्रेस प्रेशर गेम खेल रही है। 2019 में कांग्रेस को उत्तरप्रदेश में सिर्फ एक लोकसभा सीट पर जीत मिली थी। उस जीत में भी सोनिया गांधी के कद और रायबरेली सीट पर गांधी परिवार की पारंपरिक जीत का बड़ा फैक्टर था। I.N.D.I.A में शामिल समाजवादी पार्टी को 5 सीटें मिलीं थीं। 10 सीटें बहुजन समाज पार्टी ने जीती थीं। अब कांग्रेस यूपी की 21 लोकसभा सीटों पर नजर गड़ा रही है। कांग्रेस के नेता मानते हैं कि I.N.D.I.A में तालमेल नहीं हुआ तो पार्टी 80 लोकसभा सीटों पर भी कैंडिडेट उतार सकती है। फिलहाल कांग्रेस यूपी में प्रियंका गांधी के कार्यक्रम और राहुल गांधी की पदयात्रा की तैयारी कर रही है। बिहार में खाता नहीं खुला था, वहां कितना मिलेगा?बिहार में तो विपक्षी गठबंधन के महाजुटान I.N.D.I.A (इंडिया) में चार दावेदार हैं। यहां नीतीश कुमार को कांग्रेस के अलावा तेजस्वी का राष्ट्रीय जनता दल और बामपंथी पार्टियों के साथ 40 सीटों का बंटवारा करना है। बिहार में जेडी यू के 16 सांसद हैं, जिसे नीतीश कुमार ने एनडीए के साथ गठबंधन के बाद जीता था। बाकी सहयोगियों का तो 2019 में खाता भी नहीं खुला था। इंडिया की पहली मीटिंग में जब राहुल गांधी पटना आए तो उन्होंने साफ किया था कि गठबंधन को बचाए रखने के लिए सभी दलों को अपने हितों की कुर्बानी देनी होगी। इसके साथ ही नीतीश कुमार से राज्य में दो नए मंत्री पद की मांग भी कर दी। मीटिंग के दो महीने बाद राहुल गांधी की मांग नीतीश कुमार ने पूरी नहीं की है। हालांकि कांग्रेस नेताओं ने बिहार में सीटों को लेकर चुप्पी साध रखी है, मगर खींचतान जारी है। सच यह है कि 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने आरजेडी से 70 सीटें ली थीं मगर सिर्फ 19 ही जीत सकी थी। कांग्रेस की प्रेशर पॉलिटिक्स को समझिएI.N.D.I.A (इंडिया) वाले महाराष्ट्र में एनसीपी में बिखराव के बाद शरद पवार को भी शक की नजर से देख रहे हैं। कांग्रेस और शिवसेना अब शरद पवार की मुराद पूरी करने के मूड में नहीं है। कांग्रेस इस फूट का फायदा अपने पक्ष में उठा सकती है। मुंबई मीटिंग I.N.D.I.A (इंडिया) और कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण होने वाली है। अगर संयोजक और कोर्डिनेटर पद पर कांग्रेस काबिज हो जाती है तो सीटों के नाप-तौल में पलड़ा अपनी ओर झुका सकती है। कांग्रेस की रणनीति भी करीब-करीब साफ हो चुकी है। पार्टी उन राज्यों में गठबंधन सहयोगियों से ज्यादा सीटें हासिल करना चाहती है, जहां कांग्रेस कमजोर हो चुकी है। मध्यप्रदेश,राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश में I.N.D.I.A के सहयोगियों की हालत पतली है। इन राज्यों में वह कांग्रेस से सीट मांगने की हैसियत में नहीं हैं, जहां लोकसभा की 126 सीटें हैं। यह रणनीति कांग्रेस के लिए मुसीबत भी बन सकती है। बीजेपी के चाणक्य अमित शाह ने जो भविष्यवाणी की थी , वह सच हो सकता है। सीटों के बंटवारे को लेकर I.N.D.I.A का सिराजा बिखर सकता है।