शेषन के नाम से लालू हो जाते थे लाल, बूथ लुटेरों की बंध जाती घिग्घी, तभी तो सुप्रीम कोर्ट ने किया याद

पटना/नई दिल्ली: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी एन शेषन को इस दुनिया से विदा हुए तीन साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन ड्यूटी के प्रति उनकी वफादारी की किस्से शायद तब तक कहे जाएंगे जबतक भारत में लोकतंत्र रहेगा। अब एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को टीएन शेषन को याद किया है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि संविधान ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो निर्वाचन आयुक्तों के नाजुक कंधों पर बहुत जिम्मेदारियां सौंपी हैं और वह मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर टी एन शेषन की तरह के सुदृढ़ चरित्र वाले व्यक्ति को चाहता है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से कही गई ये लाइनें बताती हैं कि टीएन शेषन ने मुख्य चुनाव आयुक्त रहते हुए कितनी लंबी खींचकर चले गए हैं।

टीएन शेषन के लिए सुप्रीम कोर्ट ने और क्या कहा?सुप्रीम कोर्ट ने टीएन शेषन का जिक्र करते हुए कहा, ‘अनेक मुख्य निर्वाचन आयुक्त हुए हैं, लेकिन टी एन शेषन एक ही हुए हैं। तीन लोगों (दो चुनाव आयुक्तों और मुख्य निर्वाचन आयुक्त) के कमजोर कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गयी है। हमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद के लिए सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति को चुनना होगा। सवाल है कि हम सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति को कैसे चुनें और कैसे नियुक्त करें।’ उन्होंने कहा कि किसी को इस पर आपत्ति नहीं हो सकती और उनके विचार से सरकार भी सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति की नियुक्ति का विरोध नहीं करेगी, लेकिन सवाल यह है कि यह कैसे किया जा सकता है।

पीठ ने कहा कि 1990 से विभिन्न वर्गों से निर्वाचन आयुक्तों समेत संवैधानिक निकायों के लिए कॉलेजियम जैसी प्रणाली की मांग उठती रही है और एक बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने इसके लिए पत्र लिखा था। पीठ में न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस, न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार शामिल रहे।

बता दें शेषन केंद्र सरकार में पूर्व कैबिनेट सचिव थे और उन्हें 12 दिसंबर, 1990 को मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया गया था। उनका कार्यकाल 11 दिसंबर, 1996 तक रहा। उनका निधन 10 नवंबर, 2019 को हो गया था।

बिहार जैसे राज्य में निष्पक्ष चुनाव कराकर शेषन बने हीरो
1990 के दशक में बिहार में निष्पक्ष चुनाव कराना बेहद कठिन था। उस दौर में बिहार बूथ कैप्चरिंग का दौर चल रहा था। निष्पक्ष चुनाव कराना इसलिए मुश्किल था क्योंकि बूथ कैप्चरिंग में कहीं ना कहीं सत्ताधारी राजनीतिक पार्टियां भी शामिल थीं। टीएन शेषन ने अपने चुनाव सुधार अभियान की शुरुआत 1995 के बिहार विधानसभा चुनाव से ही की थी। इस वजह से दौर में आरजेडी सुप्रीमो और बिहार की सत्ता पर काबिज लालू प्रसाद यादव और टीएन शेषन में बेहद तल्ख रिश्ते देखने को मिले।

जब लालू ने शेषन को कहा पगला सांड
1995 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद लालू प्रसाद यादव टीएन शेषन का नाम तक नहीं सुनना चाहते थे। पत्रकार संकर्षण ठाकुर की किताब ‘बंधु बिहारी’ में टीएन शेषन से लालू की अदावत के कुछ दिलचस्प किस्से हैं। चुनाव के दौरान ही शेषन और लालू के बीच जो भी हुआ, उसकी कहानी पत्रकार संकर्षण ठाकुर ने अपनी किताब ‘बंधु बिहारी’ में दी है। चुनाव के दौरान हर सुबह अपने आवास पर होने वाली अनौपचारिक बैठकों में लालू के गुस्‍से के केंद्र में शेषण ही होते थे। ऐसी ही एक बैठक में उन्होंने कहा था- ‘शेषन पगला सांड जैसा कर रहा है। मालूम नहीं है कि हम रस्सा बांध के खटाल में बंद कर सकते हैं।’ संकर्षण ठाकुर ने लिखा है कि लालू यादव उन दिनों शेषन को अपने अंदाज में कोसते रहते थे। लालू कहते थे कि ‘शेषनवा को भैंसिया पे चढ़ाकर गंगाजी में हेला देंगे।’

संकषर्ण ठाकुर लिखते हैं कि लालू यादव का गुस्‍सा तब चरम पर था, जब शेषन ने चुनाव को चौथी बार स्थगित कर दिया। तब लालू काफी भड़क गए। लालू यादव ने बिहार के तत्कालीन मुख्य निर्वाचन अधिकारी आरजेएम पिल्लई को फोन किया और उनपर जमकर बरसे। लालू ने तब पिल्लई से कहा था कि ‘पिल्लई, हम तुम्हारा चीफ मिनिस्टर और तुम हमारा अफसर। ई शेषनवां कहां से बीच में टपकता रहता है? फैक्‍स भेजता है। सब फैक्‍स-वैक्स उड़ा देंगे, इलेक्शन हो जाने दो।’

टी.एन.शेषन का जीवन परिचय

  • टी.एन.शेषन का जन्म 15 दिसंबर, 1932 को पलक्कड़ (केरल) के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
  • शेषन की स्कूली पढ़ाई बेसल इवैंजेलिकल मिशन हायर सेकंड्री स्कूल से की और इंटरमीडिएट गवर्नमेंट विक्टोरिया कॉलेज, पलक्कड़ से।
  • मद्रास क्रिस्चन कॉलेज से फिजिक्स में ग्रैजुएशन किया। उन्होंने चार साल के कोर्स को तीन सालों में ही पूरा कर लिया। साथ ही उन्होंने मास्टर की भी डिग्री कर ली।
  • 60 के शुरुआती दशक में वैज्ञानिकों के लिए जॉब के मौके बहुत कम थे। इस वजह से उन्होंने मद्रास क्रिस्चन कॉलेज में ही 1952 से पढ़ाना शुरू कर दिया।
  • मद्रास क्रिस्चन कॉलेज में पढ़ाने के दौरान वह भारतीय प्रशासनिक सेवा की तैयारी करते रहे।
  • 1953 में टीएन शेषन ने पुलिस सेवा परीक्षा में टॉप किया और 1954 में भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए होने वाली परीक्षा क्लियर की। 1955 में उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में ट्रेनी के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की।
  • शेषन की पहली तैनाती तमिलनाडु के मदुरई जिले के डिंडीगुल में सब कलेक्टर के तौर पर हुई। उसके बाद से टीएन शेषन ने प्रशासनिक अफसर के रूप में ऐसी मिसाल पेश की जिसे अगले कई वर्षों तक याद किया जाता रहेगा।

ऐसे चुनाव आयोग बने शेषन
प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की सरकार में सुब्रमण्यम स्वामी कानून मंत्री थे। स्वामी और शेषन काफी अच्छे दोस्त रहे। इसी दौरान सुब्रमण्यम स्वामी ने टीएन शेषन को मुख्य चुनाव आयुक्त का पद ऑफर किया। पहले तो उन्होंने इस ऑफर को ठुकरा दिया, लेकिन बाद में उन्होंने यह पद स्वीकार कर लिया। टीएन शेषन ने दिसंबर 1990 में देश के मुख्य चुनाव आयुक्त का प्रभार संभाल लिया।