मालदीव में मोहम्‍मद मुइज्‍जो नहीं, चीन का असली पालतू सांप है यह शख्‍स, ‘इंडिया आउट’ से बोया था जहर

माले: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लक्षद्वीप यात्रा के बाद मालदीव की सरकार के मंत्री बौखला गए। इन मंत्रियों ने पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र टिप्‍पणियां करना शुरू कर दिया। इसके जवाब में जब भारत के लोगों ने सोशल मीडिया पर पूरा अभियान छेड़ दिया तो मालदीव की मोहम्‍मद मुइज्‍जू की सरकार घुटनों पर आई। मालदीव की सरकार ने पीएम मोदी के खिलाफ टिप्‍पणी करने वाले मंत्रियों को सस्‍पेंड जरूर कर दिया है लेकिन उन्‍हें हटाया नहीं है। यही नहीं अभी तक मालदीव की सरकार ने भारत से माफी तक नहीं मांगी है। खुद मालदीव के राष्‍ट्रपति मुइज्‍जू ने इस पूरे मामले में चुप्‍पी साध रखी है और चीन के 5 दिन के दौरे पर पहुंच गए हैं। दरअसल, मालदीव की वर्तमान मुइज्‍जू सरकार चीन के इशारे पर भारत और भारतीय सेना का विरोध करके ही सत्‍ता में आई है। इसे मालदीव में ‘इंडिया आउट’ कैंपेन नाम दिया गया। मालदीव में ‘इंडिया आउट’ कैंपेन की शुरुआत मोइज्‍जू ने नहीं बल्कि पूर्व राष्‍ट्रपति अब्‍दुल्‍ला यामीन ने की थी।भारत और मालदीव के बीच पिछले 6 दशक से राजनयिक, रक्षा, आर्थिक और सांस्‍कृतिक संबंध रहे हैं। मालदीव अरब सागर में ऐसी जगह पर स्थित है जो भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। वहीं भारत साल 1965 में मालदीव को आजादी मिलने के बाद हर संकट में के साथ खड़ा रहा है और जरूरत पड़ने पर कोरोना वैक्‍सीन से लेकर आर्थिक मदद तक दी है। भारत और मालदीव के बीच दोस्‍ती उस समय और बढ़ गई जब 1980 के दशक में भारतीय सेना ने ऑपरेशन कैक्‍टस चलाया था। भारत ने इस सैन्‍य अभियान के जरिए मालदीव में मौमून अब्‍दुल गयूम की सरकार के खिलाफ हुए तख्‍तापलट को फेल कर दिया था। मोहम्‍मद यामीन बने चीन के गुलाम, किया भारत विरोध भारत और मालदीव के बीच यह रिश्‍ता मालदीव में साल 2008 में पहली लोकतांत्रिक सरकार के आने तक अच्‍छा बना रहा। इस बीच साल 2013 में अब्‍दुल्‍ला यामीन मालदीव में सत्‍ता में आते हैं। यामीन ने चीन की मदद से मालदीव में लोकतांत्रिक ताकतों को कुचलना शुरू कर दिया। यही नहीं यामीन ने भारत के खिलाफ भी जहर उगलना शुरू कर दिया। भारत का विरोध करके यामीन ने मालदीव के अंदर राष्‍ट्रवादी भावनाओं को भड़काना शुरू कर दिया। यामीन ने चीन की मदद से कई बड़े इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रॉजेक्‍ट शुरू किए जिसमें उन्‍होंने जमकर भ्रष्‍टाचार किया। यही नहीं यामीन ने चीन की सरकार कई सीक्रेट कर्ज भी लिए। इस दौरान भारत के साथ उनका तनाव काफी बढ़ गया था। साल 2018 में मालदीव के अंदर इब्राहिम सोलिह राष्‍ट्रपति चुने गए। सोलिह ने सत्‍ता में आते ही ‘इंडिया फर्स्‍ट’ नीति का पालन किया। उन्‍होंने चीन के निवेश को लेकर भारत की संवेदनशीलता का ख्‍याल रखना शुरू कर दिया। सोलिह ने सबसे पहले भारत की यात्रा की। इस दौरान भारत ने मालदीव को 1.4 अरब डॉलर की व‍ित्‍तीय मदद का ऐलान किया। इसके अलावा भारत ने मालदीव को साल 2019 में डोर्नियर मेरिटाइम सर्विलांस विमान भी गिफ्ट किया। भारत ने मालदीव के यूटीएफ नेवल बेस को विकसित करने का फैसला किया। दोनों देशों ने साल 2019 में बेहद संवेदनशील हाइड्रोग्राफी समझौता भी किया। इंडिया आउट कैंपन की यूं हुई शुरुआत साल 2021 में भारत ने 50 करोड़ डॉलर देने का ऐलान किया ताकि माले में इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलपमेंट प्रॉजेक्‍ट को शुरू किया जा सके। इन सबके बीच विपक्षी यामीन ने साल 2020 में ‘इंडिया आउट’ अभियान छेड़ दिया। माना जाता है कि चीन के इशारे पर यामीन की पार्टी ने इस भारत विरोधी अभियान को शुरू किया। यामीन की पार्टी ने लगातार भारत की आलोचना शुरू की और जनता में नफरत फैलाना शुरू किया। भारत के निवेश और प्रॉजेक्‍ट को राजनीति से जोड़ना शुरू कर दिया। यामीन की पार्टी ने सोलिह की भारत समर्थक नीतियों की आलोचना की और कहा कि वे देश को नई दिल्‍ली को बेच रहे हैं। भारतीय सैनिक जो मालदीव की सेना को ट्रेनिंग दे रहे थे, उन्‍हें खतरे के रूप में पेश किया गया। यामीन ने साल 2019 के भारत के साथ हुए हाइड्रोग्राफी समझौते को देश की राष्‍ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा करार दिया। उन्‍होंने अफवाह फैलाना शुरू कर दिया कि मालदीव भारत के कर्ज जाल में फंस रहा है। यामीन ने इंडिया आउट अभियान के जरिए सोलिह सरकार की छवि को खराब करना शुरू कर दिया। उन्‍होंने मालदीव के अंदर मौजूद भारत विरोधी भावनाओं का फायदा उठाना शुरू कर दिया। यह प्रदर्शन 2 साल तक चलता रहा। साल 2022 में यामीन समर्थकों ने भारतीय राजनयिकों की ओर से योग दिवस पर आयोजित कार्यक्रम पर हमला करना शुरू कर दिया और उसे गैर इस्‍लामी करार दिया। इस अभियान को साल 2022 में आखिरकार बैन कर दिया गया। हालांकि अंदर ही अंदर यह यामीन की पार्टी भड़काती रही। चीन ने की इंडिया आउट की फंडिंग!विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ने इंडिया आउट कैंपेन के लिए फंडिंग की। चीन ने मालदीव के विपक्षी दलों के साथ करीबी रिश्‍ता रखा। यामीन की पार्टी को लोन और बिजनस डील देकर अपने पाले में कर लिया। मालदीव के वर्तमान राष्‍ट्रपति मोहम्‍मद मुइज्‍जू चीन समर्थक यामीन के करीबी हैं। यामीन भ्रष्‍टाचार के आरोप में जेल की सजा काट रहे हैं। मुइज्‍जू ने इस भारत विरोध का फायदा उठाया और साल 2023 में हुए चुनाव को जीत लिया। चुनाव जीतते ही मोहम्‍मद मुइज्‍जू ने भारतीय सेना को मालदीव से वापस जाने के लिए कह दिया। मुइज्‍जू ने साल 2019 के हाइड्रोग्राफी समझौते को भी खत्‍म कर दिया। वह भारत की बजाय अब चीन के दौरे पर हैं जहां उनका रेड कार्पेट वेलकम हुआ है। मुइज्‍जू की सरकार में ऐसे कई ऐसे नेता हैं जिन्‍होंने इंडिया आउट का समर्थन किया था। माना जा रहा है कि मुइज्‍जू अब चीन के साथ कई बड़े समझौते कर सकते हैं।