41 सालों की सर्विस में एक बार भी नहीं हुआ ट्रांसफर, टीचर के रिटायरमेंट पर रो पड़ा पूरा गांव

छिंदवाड़ा: मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में सोमवार (31 जुलाई) को टीचर का रिटायरमेंट हुआ। 41 साल 1 महीने तक सेवा देने के बाद जब शिक्षक का रिटायरमेंट समारोह हुआ तो विदाई देने के लिए पूरा गांव पहुंच गया। हर किसी के आंखों में आंसू आ गए। ऐसी विदाई देखकर टीचर भी भावुक हो गए। ये शिक्षक गांव के स्कूल की पहचान बन चुके थे। इस स्कूल को लोग शिक्षक के पढ़ाने की शैली के कारण जानते थे। दरअसल, छिंदवाड़ा विकासखंड के नेर गांव के प्राथमिक स्कूल में पदस्थ शिक्षक एक ही स्कूल में 41 साल तक रहे। कभी उनका तबादला नहीं हुआ। शिक्षक रहते हुए उन्होंने 41 साल 1 महीने का कार्यकाल पूरा किया। सोमवार को जब उनका रिटायरमेंट हुआ तो उन्हें विदाई देने के लिए पूरा गांव मौजूद था। लोगों का कहना था कि ये अपने आप में एक रिकॉर्ड है कि किसी टीचर ने जिस स्कूल से अपनी ड्यूटी ज्वाइन की हो उसी स्कूल से रिटायर हो रहा हो बिना किसी ट्रांसफर के।2 जुलाई 1982 को हुई थी ज्वाइनिंगश्रीकांत ने आज से 41 साल पहले 2 जुलाई 1982 को नेर गांव के प्राथमिक स्कूल में शिक्षक की नौकरी ज्वाइन की थी। उस समय बच्चे स्कूल नहीं आते थे तब वो घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाते थे। धीरे-धीरे उनका व्यवहार देखकर परिजनों ने बच्चों को स्कूल भेजना शुरू किया। स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ती गई। अपने पढ़ाने के अलग तरीके और सरल व्यवहार के कारण वह सभी बच्चों के लिए पसंदीदा शिक्षक बन गए।समय के थे पाबंदउनको विदाई देने के लिए पहुंचे उनके पूर्व छात्र जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष अश्वनी रघुवंशी ने बताया कि हमारे सर, श्रीकांत असराठी समय के बहुत पाबंद रहे हैं। चाहे बारिश के समय हो या सर्दी का सुबह 7 बजे सबसे पहले वही स्कूल पहुंचते थे। कोई बच्चा स्कूल नहीं आता तो उसे घर जाकर स्कूल लेकर आते थे। उनकी इस कर्तव्य निष्ठा का परिणाम था कि उनके पढ़ाए हुए कई बच्चे आज राजनीति, सामाजिक विभिन्न क्षेत्रों में अपना नाम रोशन कर रहे हैं।विदाई देने पहुंचे 25 स्कूलों के टीचरश्रीकांत असराठी की विदाई की जानकारी लगते ही सिर्फ गांव के लोग ही नहीं बल्कि जन शिक्षा केंद्र के अंतर्गत आने वाले 25 स्कूलों के शिक्षक भी पहुंचे। गांव के लोगों ने शिक्षक का सम्मान किया। वहीं, विभाग ने भी रिटायरमेंट पर शिक्षक का सम्मान किया।