गरीब हो तो बेटे को रोको और बेटी को पढ़ाओ, MP के मौलाना बोले- इस्लाम सीखो तालिबानियों

जहां एक ओर कुरान की पहली आयात में सबसे पहले शिक्षा को लेकर अलग जताया गया है. वहीं दूसरी ओर तालिबान ने अफगानिस्तान की यूनिवर्सिटी से लड़कियों के प्रवेश पर बैन लगा दिया है. इस मामले पर मध्य प्रदेश के बुरहानपुर से मुस्लिम मौलाना एवं मुफ्ती साहब की प्रतिक्रिया भी सामने आई है, उनके अनुसार शिक्षा का अधिकार लड़का और लड़की दोनों को मिलना चाहिए. क्योंकि समाज में अगर महिला शिक्षित होगी तभी वह आने वाले पीढ़ी को भी शिक्षित कर समाज के विकास में अपनी भागीदारी दे सकती है, अन्यथा तो आने वाली पीढ़ी अशिक्षित ही रह जाएगी.
दरअसल, मुस्लिम समाज के मौलाना एवं मुफ्ती के अनुसार समाज को दशा और दिशा देने का काम महिलाएं ही करती है. क्योंकि आदमी तो दिन भर बाहर रहता है और महिलाएं ही घर में रहकर आने वाले पीढ़ी को अपने अच्छे बुरी की तालीम देकर शिक्षित कर सकती है. क्योंकि व्यक्ति की पहली शिक्षक उसकी मां ही रहती है. यह प्रतिक्रिया अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा यूनिवर्सिटी में लड़कियों के प्रवेश को प्रतिबंधित करने के बाद आई है.
तालीम सभी के लिए जरूरी- जावेद
वहीं, इस मामले पर मौलाना जावेद कासमी ने बताया कि कुरान की पहली आयात में इबादत और नमाज और रोजा जरूरी नहीं है. तालीम के बारे में कहा गया जोकि सभी के लिए जरूरी है. आगे वह बताते हैं कि इस्लाम तो दोनों लड़का और लड़की के तालीम की बात करता है, इनके उस्ताद के अनुसार गरीब परिवार है और परिवार किसी एक को ही पढ़ाने का खर्च उठा सकता है तो बेटे को रोककर कर बेटी को पढ़ाना चाहिए.
क्योंकि बेटी जो है वह पूरे खानदान को लेकर चलेगी और बेटा जो है वह केवल अकेला चलेगा. उन्होंने कहा कि उनकी की तालीम यूपी के देवबंद से हुई है. इस्लाम यह नहीं कहता है कि अपने धर्म की पढ़ाई की है तो आप धर्मों में ही लगे, बल्कि इस्लाम तो यह कहता है कि आप धार्मिक पढ़ाई के बीच समाज में आगे रहे.
लड़कियां आगे बढ़े और अपनी तालीम हासिल करें
इसके साथ ही मौलाना का कहना है कि, अगर तालिबान ने ऐसा किया है तो यह धर्म एहबार से सही नहीं है. इस्लाम तो सबको तालीम देने के लिए कहता है इस्लाम जो है वह किसी भी मैदान में लड़कियों को लड़कों से पीछे रहने की बात नहीं करता है. इस्लाम में कहीं भी ऐसा नहीं है कि लड़कियां लड़कों से पीछे नहीं इतना जरूर है कि इस्लाम के अपने उसूल भी है, लेकिन अगर देखा जाए तो बहुत सारी यूनिवर्सिटी हैं जोकि ऑनलाइन पढ़ाई करवा रही है.
हम यह चाहते हैं कि मुस्लिम लड़कियां भी ऑनलाइन पढ़ाई करें और जीवन में आगे बढ़े, क्योंकि दसों यूनिवर्सिटी है कि जो ऑनलाइन अपना कोर्स चला रही है तो हम यह चाहते हैं कि लड़कियां आगे बढ़े और अपनी तालीम हासिल करें.
लड़का और लड़की को मिले बराबर हक- रहमतुल्लाह कासमी
इस दौरान मुफ्ती रहमतुल्लाह कासमी ने बताया कि यह तो एक कम्यूनिटी और कौम का बहुत बड़ा नुकसान कर रही है. तालीम का हक सभी को है, जिसमें लड़का और लड़की दोनों बराबर को देना चाहिए. इनको मुस्लिम लड़कियों से क्या बैर है, जो तुम मुस्लिम लड़कियों का हक मारा जा रहा है .क्योंकि तालीम के अंदर लड़कियों को भी बराबर हक मिलना चाहिए.
एक तरह से यह हमारी कौम के साथ पक्षपात है किसी का हक नहीं मारना चाहिए. सबको बराबरी का हक देना चाहिए. कुरान में जो पहले आया था उस पर संदेश दिया गया है. तालीम का और यह संदेश महिला और पुरुष दोनों के लिए है. इस्लाम औरतों को भी तालीम दिलाने के हक में हैं.
लड़कियों का पढ़ा-लिखा होना बहुत जरूरी- अकील ए आजाद
इस मामले पर दैनिक उर्दू एक्शन के संपादक अकील ए आजाद का कहना है कि अगर वह यूनिवर्सिटी में लड़कियों को बैन कर रहे हैं तो क्या वह दीनी मदारिस में लड़कियों को बेहतर तालीम देंगे. क्योंकि वहां पर लड़कियों के लिए देने मदारीस भी चलाए जाते हैं, लड़कियों का पढ़ा लिखा होना बहुत जरूरी है. उनको शिक्षा से वंचित तो नहीं रखना चाहिए या तो फिर उनके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए ठीक है. अगर वह यूनिवर्सिटी पर ना जाएं तो जो वहां पर दीनी मदारिस चलते हैं. वहां पर उनको आला तालीम दी जाए, ताकि महिलाएं भी शिक्षित हो सके.
चीजों को ज्यादा समय तक नहीं रखा जा सकता- ग्राम पंचायत
बुरहानपुर की ग्राम पंचायत एमा गिर्द की पूर्व महिला सरपंच निशरिन अली ने बताया कि बेटियों से शिक्षा का अधिकार छीन ना बहुत गलत बात है . अगर एक मां शिक्षित नहीं होगी तो वह आने वाली पीढ़ी को कैसे शिक्षा दे पाएगी. देश समाज के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका एक मां और एक बेटी, बहन का ही होता है. जो लोग इस तरह से लेकर चलते हैं, उनकी ज्यादा समय तक नहीं चलती.
अगर कोई सरकार एक हिटलर चिप लेकर चलती है तो उसका अंत बहुत जल्दी होता है.क्योंकि इन चीजों को ज्यादा समय तक दबाकर नहीं रखा जा सकता और बहुत सारे लोग हैं जो इस फरमान को नहीं मानते है. इतिहास गवाह है कि ऐसी सरकारों का पतन भी बहुत जल्दी हुआ है.