झाड़ू घास और लकड़ी के बुरादे से बना जीरा तो नहीं खा रहे आप? दंग कर देगी ये खबर

मुंबई: भिवंडी में शांतिनगर पुलिस ने नकली जीरा बनाकर होटलों और कैटरर्स को थोक में बेचने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लेकर उनके पास से 7.19 लाख रुपये कीमत की लकड़ी की भूसी से बना सात टन नकली जीरा जब्त किया है। आरोपी घास की भूसी, झाड़ू घास से और लकड़ी के चूरे से नकली जीरा बनाकर बेचते थे। आरोपियों के पास से चार लाख रुपये कीमत की बोलेरो पिकअप टेंपो, पालघर स्थित फैक्ट्री से 30 लाख रुपये की मशीनरी और कच्चा माल भी जब्त किया गया है। पुलिस ने टेंपो से 80 बोरियों में भरे 2399 किलो वजन का नकली जीरा बरामद किया है।पुलिस के अनुसार, पुलिस उपनिरीक्षक सुरेश घुगे और पुलिस कांस्टेबल क्षीरसागर को सूचना मिली थी कि दो व्यक्ति शांतिनगर पुलिस स्टेशन की सीमा में लाखों रुपये मूल्य का नकली जीरा बेचने के लिए आ रहे हैं। उन्होंने इसकी जानकारी तुरंत शांतिनगर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक शंकर इंदलकर को दे दी।ऐसे टीम ने की छापेमारीपुलिस उपायुक्त नवनाथ ढवले और सहायक पुलिस आयुक्त किशोर खैरनार के मार्गदर्शन में पुलिस उपनिरीक्षक सुरेश घुगे, पुलिस नायक किरण जाधव, श्रीकांत पाटील, नरसिंह क्षीरसागर और रवि पाटील के साथ खाद्य सुरक्षा अधिकारी इंद्रजीत चिलावटे की टीम ने नागांव स्थित फातिमा नगर के पास जाल बिछाया और एक टेंपो को संदेह के आधार पर रोक लिया।इन लोगों को किया गया गिरफ्तारटेंपो की तलाशी के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने नकली जीरा की खेप बरामद की, जिसे लकड़ी की भूसी पर विभिन्न रासायनिक पाउडर का लेप करके बनाया गया था। जब जीरा को पानी में डाला गया, तो वह पूरी तरह घुल गया। पानी भी काला हो गया। पुष्टि होने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी इंद्रजीत चिलावटे की शिकायत पर पुलिस ने टेंपो चालक शादाब इस्लाम खान (33, नवलीफाटा- पालघर (प.) और चेतन रमेशभाई गांधी (34, डहाणूकर वाड़ी, कांदिवली (प.) के विरुद्ध मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।इस तरह बनाते थे नकली जीरापूछताछ में पता चला कि चेतन रमेशभाई गांधी ने पालघर जिले के नंडोरे स्थित नोवेल इंडस्ट्रियल एस्टेट में जागृति एंटरप्राइजेज में नकली जीरा बनाने की फैक्ट्री शुरू की थी। इनके पास सरकार से कोई पंजीकरण लाइसेंस भी नहीं है। इस नकली जीरे को पैरोट ब्रांड के नाम से बेचा जाता था। बड़ी सौंफ के आकार का कच्चा माल लाकर इसे रंगते थे और असली जीरे के साथ मिलाकर पैक करते थे। एपीएमसी मार्केट के साथ ही ठाणे, पालघर, मुंबई और गुजरात क्षेत्र के होटलों और कैटरर्स को थोक मूल्य पर बेचते थे।