मैं राम की इज्जत करता हूं, लेकिन नाथूराम से नफरत, बाबर पर संसद में खुलकर बोले ओवैसी

असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को पूछा कि क्या मोदी सरकार केवल एक समुदाय और एक धर्म की सेवा करती है और क्या 22 जनवरी को अयोध्या के राम मंदिर का अभिषेक कार्यक्रम एक धर्म की दूसरे पर विजय थी। राम मंदिर उद्घाटन पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए ओवैसी ने कहा कि देश के मुसलमानों से बार-बार अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए कहा जाता है। क्या मैं बाबर, जिन्ना या औरंगजेब का प्रवक्ता हूं? मैं भगवान राम का सम्मान करता हूं, लेकिन मैं नाथूराम गोडसे से नफरत करता हूं, जिसने उस व्यक्ति की हत्या की, जिसके अंतिम शब्द हे राम थे।इसे भी पढ़ें: Article 370, सेंगोल, राम मंदिर, 17वीं लोकसभा के आखिरी संबोधन में PM मोदी ने जानें क्या-क्या कहाओवैसी ने कहा कि सरकारें आती हैं और जाती हैं। मोदी सरकार ने 6 दिसंबर को जो हुआ उसका जश्न मनाया। जिस पर अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि 6 दिसंबर को जो हुआ उस पर कोई उत्सव नहीं था, बल्कि राम मंदिर के उद्घाटन पर उत्सव था। उन्होंने कहा कि आप विद्वान हैं। आपको क़ानूनी ज्ञान भी है। एएसआई और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने कहा कि वहां एक मंदिर था जिसमें मस्जिद बनाई गई थी। इसे भी पढ़ें: Parliament Proceeding: कांग्रेस ने राम को किया खारिज, इसलिए हुआ ये हाल, संसद में राम मंदिर पर चर्चा के दौरान बोले बीजेपी सांसदओवेसी ने बाबर का जिक्र किया, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे खड़े हो गए और कहा कि आसन को केवल ओवेसी से पूछना चाहिए कि क्या वह बाबर को आक्रमणकारी मानते हैं। इस पर ओवैसी ने कहा कि आप पहले बताएं कि आप पुष्यमित्र शुंग को क्या मानते हैं। उनके पास मंदिरों को तोड़ने के लिए एक सेना थी। मैं यही बात दोहरा रहा हूं कि आजादी के इतने सालों के बाद निशिकांत दुबे जी असदुद्दीन ओवैसी से बाबर के बारे में पूछ रहे हैं। ओवैसी ने कहा आप ऐसा कर सकते हैं। मुझसे गांधी, नेताजी, जलियांवाला बाग के बारे में पूछा है। लेकिन नहीं, आप मुझसे बाबर के बारे में पूछेंगे। । ओवैसी ने कहा पीएम मोदी मुसलमानों को संदेश दे रहे हैं कि वे या तो अपनी जिंदगी चुन सकते हैं या न्याय।