अवध बिहारी चौधरी के पेच को कैसे सुलझाएंगे नीतीश कुमार? अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान संचालन पर अड़े स्पीकर

पटनाः बिहार में के नेतृत्व में निर्वाचित सरकार के सामने संवैधानिक संकट के हालात बनने लगे हैं। विधानसभा स्पीकर के खिलाफ सत्ताधारी एनडीए ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। स्पीकर इस्तीफा नहीं देने पर अड़ गए हैं। अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने के लिए उन्होंने कमर कस ली है। वे बेफिक्र होकर विधानसभा के 12 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र की तैयारी में लगे हैं। पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के साथ बुधवार को उन्होंने मीटिंग की। विधानसभा के सत्र शुरू होने से पहले सुरक्षा और एहतियात के मद्देनजर हर बार स्पीकर ऐसी बैठकें करते हैं। मसलन स्पीकर सब कुछ सामान्य ढंग से कर रहे हैं।स्पीकर को 28 जनवरी को ही दिया गया था नोटिस महागठबंधन सरकार से अलग होकर नीतीश कुमार ने 28 जनवरी 2024 को एनडीए की सरकार बना ली थी। उसी दन भाजपा नेता नंद किशोर यादव ने स्पीकर अवध बिहारी चौधरी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया। स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिए जाने के 14 दिनों के अंदर विधानसभा में मत विभाजन जरूरी होता है। इसे ही ध्यान में रख कर 12 फरवरी से विधानसभा का बजट सत्र आहूत किया गया है। आमतौर पर सरकार बदलने पर स्पीकर इस्तीफा देते रहे हैं। वर्तमान डेप्युटी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने भी महागठबंधन की सरकार बनने पर स्पीकर पद से इस्तीफा दे दिया था। पर, अवध बिहारी चौधरी अड़े हुए हैं। वे कहते हैं कि इस्तीफा नहीं देंगे और अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग का इंतजार करेंगे। वे तो यह भी कहते हैं कि उन्हें नोटिस तो दो दिन पहले मिला है, इसलिए अभी अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग कराई ही नहीं जा सकती। अब नोटिस के तकनीकी पहलुओं पर छिड़ा है विवाद अवध बिहारी चौधरी कहते हैं कि वे सदन का संचालन पहले की तरह करेंगे। उनके ही संचालन में नीतीश कुमार को विश्वास मत हासिल करना होगा। इसलिए कि उन्हें नोटिस दो दिन पहले मिला है। सत्ता पक्ष की दलील है कि नोटिस स्पीकर के कार्यालय को ससमय रिसीव कराया जा चुका है। भले ही उनका कार्यालय इसे दो दिन पहले दिया हो। किसी भी तरह का पत्र सीधे स्पीकर तो रिसीव करते नहीं हैं। पत्र उनका सचिवालय प्राप्त करता है। दूसरा कि जब उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया जा चुका है तो वे अपने ही खिलाफ कराए जाने वाले वोटिंग का संचालन कैसे कर सकते हैं। विधानसभा के डेप्युटी स्पीकर साफ कहते हैं कि बहैसियत डेप्युटी स्पीकर आसन पर वे ही बठेंगे। चौधरी को इसका न संवैधानिक अधिकार है और न नैतिकता इसकी इजाजत देती है।विधानसभा में जबरदस्त हंगामे के दिख रहे हैं आसारआश्चर्य की बात है कि विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी और विधानसभा के उपाध्यक्ष देवेश चंद्र ठाकुर दोनों विधानसभा संचालन नियमावली का हवाला दे रहे हैं। दोनों कह रहे कि नियमों के तहत हमारा अधिकार है। इसका मतलब यही हुआ कि सत्र शुरू होने पर हंगामा होना पक्का है। आरजेडी नेता और पूर्व डेप्युटी सीएम तेजस्वी यादव शायद इसी खेल की बात कहते रहे हैं। मामला कोर्ट तक पहुंच जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व सीएम जीतन राम मांझी, पूर्व डेप्युटी सीएम तारकिशोर प्रसाद जैसे कई नेताओं ने दस्तखत किए थे।अवध बिहारी चौधरी को महागठबंधन का है समर्थनप्रत्यक्ष तौर पर स्पीकर अवध बिहारी चौधरी को महागठबंधन में शामिल आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों के विधायकों का समर्थन प्राप्त है। आरजेडी कैंप में जैसी चर्चा होती रही है, उसमें कहा जा रहा है कि जेडीयू के 17 विधायक अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान अवध बिहारी चौधरी के पक्ष में मतदान करेंगे। भाजपा के कुछ विधायकों के समर्थन का भी दावा किया जा रहा है। हालांकि ऐसा करने में दल-बदल का मामला बन सकता है। आरजेडी ने आश्वस्त किया है कि क्रास वोटिंग के बाद उसके स्पीकर रह जाएंगे तो इस मामले को सुनवाई के नाम पर लटकाया जा सकता है। ऐसा नजारा झारखंड में दिख चुका है। दल बदल कानून के मामले को चार साल तक स्पीकर ने लटकाए रखा। महाराष्ट्र में साल भर से नई सरकार चल रही है और दल बदल का मामला अभी तक लटका हुआ है।