मालदीव कैसे बना धरती पर स्‍वर्ग? एक इतालवी पर्यटक ने बदल दी इस मुस्लिम देश की तस्‍वीर

माले: मालदीव को आधिकारिक तौर पर रिपब्लिक ऑफ मालदीव के नाम से जाना जाता है। यह हिंद महासागर के मध्य में रणनीतिक रूप से काफी अहम जगह पर स्थित है। मालदीव दुनिया में सबसे अधिक टूरिस्टों को आकर्षित करने वाले देशों में शुमार है। लेकिन, यह देश पिछले कुछ दिनों से अपनी गलत हरकतों की वजह से सुर्खियों में है। मालदीव की नवगठित भारत विरोधी सरकार में शामिल तीन मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीयों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थी। इसके बाद भारत में मालदीव के इन नेताओं के खिलाफ काफी गुस्सा देखने को मिला। आनन-फानन में मालदीव की सरकार ने तीनों मंत्रियों को निलंबित कर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की। हालांकि, मालदीव के साथ भारत के रिश्ते हमेशा इतने खराब नहीं रहे हैं।हर साल मालदीव पहुंचते हैं लाखों पर्यटकभूमध्य रेखा पर स्थित मालदीव में हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक आते हैं। मालदीव में दिसंबर 2023 की शुरुआत तक 1,757,939 पर्यटकों का आगमन हुआ था। यह 2022 की तुलना में 12.6 फीसदी अधिक है। 185 द्वीपों में फैले 550,000 लोगों की आबादी वाले मालदीव ने पिछले पांच दशकों में खुद को एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल में बदलने के लिए अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाया है। एशियाई विकास बैंक के अनुसार, 1980 में मालदीव में पर्यटन का योगदान 13 प्रतिशत था। हालांकि, इस क्षेत्र के विकास के लिए सरकार की कोशिशों के परिणामस्वरूप आज इसका योगदान बढ़कर लगभग 25 प्रतिशत हो गया है, जिसमें अनुमानित अप्रत्यक्ष योगदान 79 प्रतिशत है।दुनिया की नजर में कैसे आया मालदीवमालदीव सैकड़ों छोटे-बड़े द्वीपों को मिलकर बना है। यह द्वीपीय देश 90,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है। हालांकि, उसमें से केवल 298 वर्ग किमी जगह ही सूखी है। मालदीव के पर्यटन उद्योग से जुड़े अहमद ए ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर एक लेख में बताया कि इस देश को दुनिया की नजरों में लाने का काम 1970 के दशक में इतालवी टूरिस्ट जॉर्ज कॉर्बिन ने किया। उन्होंने कहा कि जॉर्ज कॉर्बिन के आने के बाद मालदीव के पर्यटन उद्योग ने आकार लेना शुरू किया। उन्होंने कहा, ” “जैसे ही वे मालदीव (1971 में) से लौटे, कॉर्बिन ने अपने नए साहसिक गंतव्य पर लेख प्रकाशित किए।कार्बिन ने मालदीव को बनाया टूरिस्ट डेस्टिनेशनअहमद ए ने बताया कि कॉर्बिन ने ड्यूमिला आइसोले फेलिसी नामक एक पुस्तक भी लिखी, जो 1973 में प्रकाशित हुई थी। कॉर्बिन और उनके साथियों को मालदीव में विहमानाफुशी द्वीप की क्षमता का एहसास हुआ और 1972 में एक बसे हुए द्वीप पर एक रिसॉर्ट का निर्माण शुरू हुआ। 1977 में मालदीव ने अपनी पहली ट्रेवल एजेंसी शुरू की, जिसका नाम रखा गया मुमन एजेंसी। उन्होंने बताया कि उस समय मालदीव में बुनियादी ढांचे के विकास में कई चुनौतियां थीं, जिनमें द्वितीय विश्व युद्ध के प्रभाव से उबरना भी शामिल था। हालांकि, कॉर्बिन की विशेषज्ञता और स्थानीय प्रयासों से मालदीव को एक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने की यात्रा शुरू हुई।