दुनिया की सबसे बड़ी आबादी, महामारी का जन्मदाता… चीन में कोरोना से मौत का आंकड़ा कितना सही?

बीजिंग: चीन में कोरोना के नए वेरिएंट ने तबाही मचाई हुई है। राजधानी बीजिंग सहित कई बड़े शहरों के अस्पतालों में पैर रखने की जगह नहीं है। लोगों को कड़ाके की ठंड में अस्पताल के फर्श पर इलाज करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके बावजूद चीनी सरकार के आंकड़ों में महामारी की रफ्तार काफी धीमी है। इस बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कोरोना के कारण होने वाली मौतों की पहचान के लिए चीन का अलग मानदंड पूरी दुनिया के लिए मुश्किल खड़ा कर सकता है। चीन शुरू से ही वास्तविक आंकड़ों को कम कर जारी कर रहा है, जिससे लोगों को खुद को बचाने के सर्वोत्तम तरीकों को खोजने में मुश्किल हो सकती है। खुद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चीन से वर्तमान हालात के वास्तविक आंकड़े देने की अपील की है।

किन मौतों को कोरोना के केस में गिन रहा चीन
चीन के एक प्रमुख हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि केवल निमोनिया और सांस की बीमारियों से होने वाली मौतों को कोरोना के कारण होने वाली मौतों के तौर पर गिना जा रहा है। यह तरीका विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुझाए फार्मूले से बिलकुल अलग है। जो भी देश ऐसा तरीका अपनाएगा, वहां कोरोना से होने वाली वास्तविक मौत का आंकड़ा खुद-ब-खुद नीचे गिर जाएगा। पेकिंग यूनिवर्सिटी फर्स्ट हॉस्पिटल में संक्रामक रोग विभाग के प्रमुख वांग गुईकियांग ने कहा कि शरीर के अन्य अंगों के फेल होने से हो रही मौतों को कोरोना वायरस वाली गिनती से अगल रखा गया है।

सरकारी दबाव के कारण सामान्य मौत करार दे रहे डॉक्टर
चीन के अस्पताल के प्रोटोकॉल से परिचित विशेषज्ञों ने बताया कि सरकारी दिशानिर्देशों के कारण कोरोना से मरने वाले लोगों की गिनती नहीं की जाती है। उनके मरने के कारणों में कोरोना का जिक्र करने से परहेज किया जाता है। अगर मरने से पहले किसी मरीज का कोरोना टेस्ट निगेटिव आता है तो उसकी भी गिनती महामारी में हुई मौत में नहीं की जाती है। कोरोना से मरने के बाद मरीज के फेफड़ों में वायरस की पुष्टि करना अनिवार्य है। ऐसे में डॉक्टर परेशानी से बचने के लिए शवों को परिजनों को जबरन सौंप देते हैं।

संक्रमित लोगों में नहीं दिख रहे कोरोना के लक्षण
वांग गुईकियांग ने कहा कि चीन को अब अपने मापदंड बदलने की जरूरत है। ओमीक्रोन के नए-नए वेरिएंट के लक्षण बहुत कम दिखाई दे रहे हैं। चीन के अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है, जिनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं है। ऐसे में यह पता करने की आवश्यकता है कि मरीज की मौत कोरोना से हुई है या किसी दूसरे कारण से। अधिकतर मरीजों की मौत को सामान्य करार दिया जा रहा है। इस कारण कोरोना से मौत का आंकड़ा काफी कम हो जा रहा है।