बिहार से हुई थी होलिका दहन की शुरुआत, भगवान विष्णु ने यहां लिया था नरसिंह का अवतार

पूर्णिया: होली के मौके पर होलिका दहन का विशेष महत्व होता है। पूर्णिया के जिला मुख्यालय से महज 35 किलोमीटर दूर बनमनखी के सिकलीगढ़ धरहरा में आज मंगलवार को राजकीय समारोह के साथ होलिका दहन समारोह मनाया गया। इस मौके पर करीब आधे घंटे तक भव्य आतिशबाजी के बीच होलिका के विशाल पुतले का दहन किया गया। मान्यता है कि पूरे देश में होलिका दहन की शुरुआत बनमनखी के सिकलीगढ़ धरहरा से ही हुई थी। आज भी यहां वो खम्भा मौजूद है, जिसके बारे में मान्यता है कि भगवान नरसिंह प्रहलाद को बचाने के लिए इसी से बाहर आए थे। भगवान ने आधा नर और आधा सिंह का रूप रख इसी खंभे से अवतार लेकर राक्षस राज हिरण्यकश्यप का वध किया था। कहते हैं कि हिरण्यकश्यप को ब्रह्मा जी का वरदान था कि उनका वध ना तो देवता कर पाएंगे ना दानव, ना जल में होगा ना थल में ना ही नभ में, ना दिन में होगा ना रात में, ना घर में होगा ना बाहर। हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद को मारने का प्रयास किया। तब भगवान नरसिंह ने इसी खम्भे से अवतार लेकर घर की चौखट पर हिरण्यकश्यप को अपने जंघा पर रखकर अपने नाखून से फाड़ दिया था।प्रहलात को मारने के लिए चादर को ओढ़कर आग में घुसी थी होलिकाकहते हैं कि हिरण्यकश्यप की बहन होलिका के पास एक चादर थी। होलिका को वरदान था कि वह इस चादर को ओढ़कर अगर आग में भी जाएगी तो वो नहीं जलेगी। जब भक्त प्रहलाद भगवान विष्णु की भक्ति में लीन हो गए तो क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को प्रहलाद को जलाकर मारने का आदेश दिया। तब होलिका उसी चादर को ओढ़कर प्रहलाद को गोद में लेकर आग में घुस गई। लेकिन तभी भीषण आंधी आई और चादर उड़कर होलिका के शरीर से निकलकर प्रहलाद से लिपट गई। इस वजह से होलिका जलकर राख हो गई और प्रहलाद सुरक्षित बच गए।सिकलीगढ़ धरहरा से हुई देश में होलिका दहन की शुरुआतकहते हैं कि तभी से असत्य पर सत्य की जीत के रूप में होलिका दहन मनाया जाता है। माना जाता है कि इसी जगह पर होलिका का दहन हुआ था। यहीं से पूरे देश में होलिका दहन की शुरुआत हुई है। पिछले कई वर्षों से यहां राजकीय समारोह के रूप में होलिका दहन महोत्सव मनाया जाता है। इस मौके पर आज सांसद संतोष कुशवाहा, पूर्व मंत्री व बनमनखी विधायक कृष्ण कुमार ऋषि ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस मौके पर पार्श्व गायिका पूर्णिमा श्रेष्ठ ने अपने सुमधुर गीतों से लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। होलिका दहन और भव्य आतिशबाजी के नजारे को देखने के लिए यहां करीब 50000 लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। वहीं प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की गई थी। (रिपोर्ट- नमिता कुमारी)