अरे! लाओ रे दही इधर, नहीं दिखी ‘वो’ वाली बात, लालू की चुप्पी में समा गई दही-चूड़ा भोज की रौनक

पटना: अरे! लाओ रे दही इधर। उधर, चूड़ा कौन परस रहा है। मिसिर जी, छपरा के दही बा.. लपेटिए। अरे सब्जी चलाओ रे। अरे लाओ रे दही-चूड़ा। मीडिया वालो के एने बिठाओ… अब के स्वागत भरे बोल और वो नेह-प्रेम वाला दही-चूड़ा वाला भोज तो यादों में ही सिमट कर रह गया। चार साल बाद ही सही दही-चूड़ा के भोज के मौके पर लालू यादव का आवास आबाद हुआ। मगर, लालू प्रसाद के ‘आक्रामकता’ भरे स्वागत के बोल गायब थे। उम्र के इस पड़ाव पर दही-चूड़ा का भोज राजनीतिक औपचारिकता बन कर रह गई।नीतीश ने आकर बढ़ाई रौनकचार साल के बाद लालू-राबड़ी आवास पर आयोजित दही-चूड़ा भोज का यही आकर्षण कुछ दिनों से बना था कि आएंगे या नहीं? नववर्ष पर किसी कारण शुभकनाओं के आदान-प्रदान नहीं होने को लेकर महागठबंधन के भीतर की राजनीति गरमाहट से भरी थी। इंडिया गठबंधन की चार बैठक में नीतीश कुमार की उपेक्षा और वर्चुअल बैठक में कन्वीनर पद को नीतीश की ना ने उस गरमाहट की ताप को और भी बढ़ा दिया। लेकिन तमाम अटकलों पर विराम लगाते नीतीश कुमार दल-बल समेत पहुंचे। नीतीश कुमार के साथ राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह, वित्त मंत्री विजय चौधरी, ऊर्जा मंत्री विजेंद्र यादव और सूचना मंत्री संजय झा समेत कई और नेता मौजूद रहे।लालू प्रसाद की रहस्यमयी चुप्पी!ये सच है कि लालू-राबड़ी आवास पर नीतीश कुमार के पहुंचते ही उल्लास का वातावरण तैयार हो गया। राजद और जदयू के नेता जोश में नारेबाजी भी करने लगे। मगर, नीतीश कुमार और लालू यादव के मिलन का जेस्चर जो था, वो काफी निराशा भरा था। शायद यही वजह भी रही की जितनी तेजी से नीतीश जी आए, उतनी ही शीघ्रता से दल-बल के साथ चले भी गए। परंतु, जाने के बाद ये चर्चा तेज हो गई कि इस बार लालू जी ने नीतीश को तिलक नहीं लगाया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि राहुल गांधी की ओर से लाए गए कन्वीनर के प्रस्ताव को नीतीश कुमार ने ठुकरा कर लालू प्रसाद को नाराज कर दिया।कांग्रेस और वाम दल का नेतृत्व रहा गायबलालू यादव के दही-चूड़ा भोज से विपक्ष तो गायब ही रहा, साथ ही कांग्रेस और वाम दल के नेता भी नहीं दिखाई दिए। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने भी इस दही-चूड़ा के भोज से दूरी बनाए रखने के लिए राहुल गांधी की भारत न्याय यात्रा में साथ देने मणिपुर चले गए। मगर, चर्चा ये भी है कि पूर्वी चंपारण सीट से अखिलेश सिंह अपने बेटे आकाश को इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में उतारना चाह रहे थे लेकिन लालू यादव ने ना कह दी।