Ram Mandir Pran Pratishtha समारोह में आने वाले अतिथियों को मिलेगा खास प्रसाद, जानें इसके बारे में अधिक

अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होने में कुछ ही घंटे बचे हैं। प्राण प्रतिष्ठा का काउंट डाउन शुरू हो चुका है। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में आमंत्रित अतिथियों को खास प्रसाद भी वितरित किया जाएगा। ये प्रसाद डिब्बों में रखा गया है जो सभी अतिथियों को वितरित किया जाएगा। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 15000 डिब्बे प्रसाद के तैयार करवाए हैं जो प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आने वाले अतिथियों को दिया जाएगा। बता दें कि इस प्रसाद के पैकेट में गुड़, रेवाड़ी, रामदाने के चक्की के साथ अक्षत और रोली भी रखी गई है। प्रसाद में रोली और अक्षत की भी खास तौर से पैकिंग की गई है। अतिथियों को मिलने वाले प्रसाद के पैकेट में भगवान विष्णु को प्रिय तुलसी दल भी रखा गया है। प्रसाद के इस पैकेट में इलायची दाना भी भक्तों को दिया जाएगा।  वर्तमान में रामलला के अस्थाई मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को इलायची दाना ही प्रसाद के तौर पर दिया जाता है। यही कारण है कि प्रसाद के पैकेट में भी इसे शामिल किया गया है। प्रसाद के पैकेट में रक्षा सूत्र यानी कलावा भी दिया गया है। इस पैकेट में राम दिया भी है जिसको भक्त जलाने में उपयोग कर सकते हैं। इसमें मेरे के लड्डू भी उपलब्ध कराए गए हैं। लाखों लोग देखेंगे लाइव कार्यक्रमराम भक्तों को वर्षों से जिस पल का इंतजार है, उसके लिए अयोध्या पूरी तरह से तैयार है। बहु-प्रतीक्षित राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन भव्य स्तर पर सोमवार को होगा जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सभी धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होंगे। इस समारोह के अगले दिन ही यह मंदिर जनता के लिए खोल दिया जाएगा। ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह अपराह्न 12.20 बजे शुरू होगा और अपराह्न एक बजे तक उसके पूरा होने की संभावना है। इसके बाद प्रधानमंत्री आयोजन स्थल पर संतों और प्रतिष्ठित शख्सियतों समेत 7,000 से अधिक लोगों की सभा को संबोधित करेंगे। लाखों लोगों के इस कार्यक्रम को टेलीविजन और ऑनलाइन मंचों पर सीधा प्रसारण देखने की उम्मीद है। ऐसी है मंदिर की संरचनामंदिर में प्रवेश पूर्वी दिशा से होगा और निकासी दक्षिण दिशा से होगी। मंदिर की पूरी संरचना तीन मंजिला होगी। श्रद्धालुओं को मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए पूर्वी दिशा से 32 सीढ़ियां चढ़नी होगी। पारंपरिक नागर शैली में बना मंदिर परिसर 380 फुट लंबा (पूर्व-पश्चिम दिशा), 250 फुट चौड़ा और 161 फुट ऊंचा होगा। मंदिर की प्रत्येक मंजिल 20 फुट ऊंची होगी और उसमें कुल 392 स्तंभ और 44 द्वार होंगे।