अटके पड़े है भगवान के 26.86 करोड़ रुपये, बैंक लेने को तैयार नहीं, जानिए क्या है माजरा

नई दिल्ली: देश के सबसे अमीर धार्मिक ट्रस्ट तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को इन दिनों अजीब स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। उसके पास कैश के रूप में करोड़ों रुपये विदेशी मुद्रा भंडार पड़ा है लेकिन वह इसे जमा नहीं कर पा रहा है। इसकी वजह यह है कि फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) के तहत उसका रजिस्ट्रेशन पिछले तीन साल से सस्पेंड चल रहा है। यह पैसा हुंडी कलेक्शन यानी चढ़ावे के रूप में आया है। लेकिन इसे बैंक अकाउंट में जमा नहीं किया जा सकता है। टीटीडी का मुख्यालय आंध्र प्रदेश के तिरुपति में है। यह ट्रस्ट तिरुमला वेंकेटश्वर मंदिर और 70 दूसरे धार्मिक स्थलों को मैनेज करता है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रस्ट ने इस बारे में सरकार से भी मदद मांगी लेकिन इसके जवाब में उसे पेनल्टी नोटिस थमा दिया गया।ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन पिछले तीन साल से सस्पेंड चल रहा है, इसलिए एसबीआई (SBI) ने हुंडी में आए चढ़ावे को अकाउंट में जमा कराने पर रोक लगा रखी है। इस कारण ट्रस्ट के पास एक साल से भी अधिक समय से फॉरेन करेंसी के रूप में 26.86 करोड़ रुपये जमा हैं। ट्रस्ट ने हाल में गृह मंत्रालय को इस बारे में पूरी डिटेल भेजी कि उसे चढ़ावे के रूप में किस देश से कितनी राशि मिली है। ट्रस्ट के पास अमेरिकी डॉलर के रूप में 11.50 करोड़ रुपये, मलेशियाई रिंगिट के रूप में 5.93 करोड़ रुपये और सिंगापुर डॉलर के रूप में 4.06 करोड़ रुपये जमा हैं। इसके अलावा ट्रस्ट के पास दिरहम, पौंड, यूरो, ऑस्ट्रेलियन डॉलर और कनाडाई डॉलर भी जमा हैं। होम मिनिस्ट्री ने लगाई पेनल्टीपिछले साल ट्रस्ट को हुंडी कलेक्शन के रूप में 1450 करोड़ रुपये मिले थे। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो पांच मार्च को होम मिनिस्ट्री के एफसीआरए डिवीजन ने टीटीडी के चीफ फंक्शनरी को एक पत्र लिखा। इसमें ट्रस्ट को बताया गया कि उसका सालाना रिटर्न गलत फॉर्मेट में है। डिवीजन ने ट्रस्ट पर 3.19 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगा दी। इससे पहले भी ट्रस्ट पर 1.14 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाई गई थी जिसे उसने चुका दिया था। साल 2019 के अंत में एफसीआर रजिस्ट्रेशन को रिन्यू नहीं कराने के कारण यह पेनल्टी लगाई गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक टेक्निकल गड़बड़ी के कारण ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन संस्पेंड किया गया है। ट्रस्ट ने पिछले साल सरकार को भेजे नोट्स में दलील दी थी कि आंध्र प्रदेश के नियमों और एफसीआरए के रूल्स में अंतर है। टीटीडी ने कहा कि महामारी के कारण उसे अकाउंट्स फाइल करने में देर हुई। साथ ही उसने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी हवाला दिया जिनमें अपील दायर करने के लिए लिटिगेंट्स को पीरियड ऑफ लिमिटेशन की अनुमति दी गई थी। समस्या यह है कि एफसीआरए एक्ट में 2020 में हुए बदलावों के मुताबिक किसी भी एनजीओ को एसबीआई में अकाउंट खोलना होगा। लेकिन एसबीआई फॉरेन करेंसी को डिपॉजिट करने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि चढ़ावा देने वालों की पहचान ज्ञात नहीं है। टीटीडी की दलीलसरकार को लिखी एक चिट्ठी में टीटीडी ने कहा है कि एफसीआरए एक्ट में अज्ञात व्यक्ति से हुंडी में मिली राशि के बारे में प्रोसेस का जिक्र नहीं है। मंत्रालय ने विदेश से आए चंदे पर मिले ब्याज के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई है। मंत्रालय का कहना है कि एफसीआरए में इसकी अनुमति नहीं है। लेकिन टीटीडी का तर्क है कि आंध्र प्रदेश के कानून के मुताबिक हुंडी में जमा राशि टीटीडी के कॉर्पस का हिस्सा है। इसलिए उसने एफसी रिटर्न में इसे फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में दिखाया था। ट्रस्ट का कहना है कि सरकार के कहने पर उसने रिवाइज्ड स्टेटमेंट्स जमा कराए थे। लेकिन मिनिस्ट्री ने इसे गलत बताते हुए ट्रस्ट पर 3.19 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगा दी।