चप्पल से मारने पर गोलियों से भूना! गाजियाबाद कोर्ट ने 20 साल बाद सुनाई उम्रकैद की सजा

गाजियाबाद में एक महिला के मर्डर का उलझा हुआ केस जिसमें 20 साल बाद मिली सजा। इस केस में पीड़ित भी परिवार दोषी है और वो भी दोषी है जिसने मर्डर किया, लेकिन जिनपर आरोप लगे वो अब जेल के बाहर है। अब सवाल ये है कि फिर कौन है कातिल।21 अक्टूबर 2002: निजामपुर रेलवे स्टेशनकांतिदेवी नाम की 50 साल की एक महिला रेलवे स्टेशन पर अपने पीसीओ बूथ पर बैठी होती है। कांति देवी के साथ उसकी छोटी बेटी रश्मि भी मौजूद होती है। तभी सामने से कांतिदेवी पर गोलियां चलती हैं और फिर हत्यारे वहां से फरार हो जाते हैं। कांतिदेवी को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवाया जाता है, जहां उनका इलाज चलता है, लेकिन 2 दिन बाद उनकी मौत हो जाती है। बीस साल पुराने केस में उम्र कैदकांतिदेवी की बेटी नीति अपनी मां की हत्या का केस दर्ज करवाती है। नीति अपने गांव के ही चार लोगों अनिल, सुनिल, संजीव और सुशील पर केस दर्ज करवाती है। नीति आरोप लगाती है कि प्रापर्टी विवाद में उसकी मां की हत्या हुई है। नीति की छोटी बहन रश्मि जो कि अपनी मां के हत्या के समय आई विटनेस थी वो भी इन चारों को ही अपनी मां का हत्यारा बताती है। चारों के खिलाफ मामला दर्ज होता है और पुलिस जांच शुरू करती है। तमाम तरह से केस को खंगालने के बाद भी इन चारों लड़कों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिलते। रेलवे स्टेशन पर महिला को गोलियों से भूनाये चारों पुलिस को बताते हैं कि कांति देवी की बेटियां उन्हें जानबूझकर फंसा रही हैं। कांति देवी के परिवार के खिलाफ एक मर्डर का केस दर्ज है और इस केस के बहाने वो मर्डर केस को वापस लेने के लिए हमारे ऊपर दवाब बना रही हैं। अब ये केस पूरी तरह से उलझ चुका था। गाजियाबाद पुलिस को इन चारों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिल पा रहे थे। इसके बाद पुलिस ने कुछ और चश्मीदीदों से बात की और फिर नवबंर 2002 में दो लड़कों संजय और रवि को गिरफ्तार किया। पुलिस को संजय के पास से एक देसी कट्टा भी बरामद हुआ जिससे कांतिदेवी को गोली मारी गई थी। बीस साल तक चलता रहा है केससाल 2009 में इस केस में चार्जशीट फायल की। संजय और रवि ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया। कोर्ट में 12 गवाहों की पेशी हुई। पुलिस ने वीर पाल नाम के शख्स को गवाह के रूप में पेश किया। वीर पाल ने बताया कि वो शाम को करीब साढ़े 8 बजे जब व ट्रेन से उतर रहे थे तो उन्होंने उसने संजय को कांतिपर गोली चलाते हुए देखा। संजय के साथ रवि भी था। जब इन दोनों को पकड़ने की कोशिश की गई तो दोनों आरोपियों ने हवा में फायरिंग की और फिर फरार हो गए। महिला से बदला लेने के लिए कत्लकोर्ट में सुनावाई के दौरान ही चश्मदीद ने बताया कि दरअसल संजय ने कांति देवी की बेटी रश्मी से बात करने की कोशिश की और उसे केला देने लगा। इस बात से नाराज होकर कांति देवी ने चप्पल से आरोपी को मारा। जिसके बाद उसका पारा चढ़ गया और उसने कांतिदेवी को धमकी दे डाली। खुद महिला की बेटी ने दी झूठी गवाहीइसी तरह कोर्ट में एक और चश्मीद को भी पेश किया गया जिसने संजय और रवि को कांति देवी को गोली मारते हुए देखा था। कोर्ट में रश्मि की भी गवाही हुई, लेकिन रश्मी आरोपियों को पहचाने में नाकामयाब हुई। कई सालों तक ये केस चलता रहा और अब बीस साल बाद जाकर गाजियाबाद की अदालत ने इसपर फैसला सुनाया। कोर्ट ने सुनाई उम्र कैद की सजाएडिशनल सेशन जज पवन कुमार ने चश्मदीदों के बात को सही मानते हुए आरोपी संजय और रवि को बीस साल पहले हुए इस मामले में उम्रकैद की सजा दी। साथ ही दोनों पर 10 हजार का जुर्माना लगाया। इनकी सजा का पहला एक साल कठोर श्रम की सजा का होगा। कोर्ट ने दोनों की बेल तुरंत खत्म कर दी है और तुरंत जेल में डालने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने परिवारवालों के आरोपों को गलत पाया और रश्मि के खिलाफ गलत गवाही देने के आरोप में केस दर्ज करने का आदेश भी दिए। जिनपर रश्मि और उसकी बहन ने आरोप लगाए थे उन चारों को कोर्ट ने बरी कर दिया।