गांधीनगर मनपा नतीजों से मिली थी शर्मनाक हार की आहट, फिर भी कांग्रेस क्यों नहीं सुन पाई, कौन जिम्मेदार?

अहमदाबाद: गुजरात चुनावों में करारी हार के बाद कांग्रेस अब उस पर हमले तेज हो गए हैं। गुजरात बीजेपी ने वरिष्ठ नेता वजुभाई वाला ने बड़ा हमला बोला है। वाला ने कहा है कि महात्मा गांधी की बात को मान अब कांग्रेस का विसर्जन कर देना चाहिए। आने वाले दिनों कांग्रेस की गुजरात में स्थिति और कमजोर होगी। उसे आगे बढ़ने के लिए बीजेपी से लड़ना होगा और आम आदमी पार्टी (आप) से बचना होगा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2017 के चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने वाली पार्टी के एकदम सरेंडर कैसे कर दिया? कांग्रेस गांधीनगर महानगर पालिका के नतीजों से निकले संदेश को क्यों नहीं पढ़ पाई?

62 साल में सबसे बुरा दौर
गुजरात में कांग्रेस 62 साल के अपने सबसे बुरे दौर में पहुंच गई है। विधानसभा चुनावों में महज 17 सीटें जीतने के चलते उसे अब नेता प्रतिपक्ष का पद भी नहीं मिलेगा। नेता प्रतिपक्ष के लिए 18 सीटें चाहिए थी। इतना ही नहीं गुजरात से कांग्रेस के नेता अब राज्यसभा भी नहीं जा पाएंगे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी का शिकार बन चुकी पार्टी हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठी रही? यह इसीलिए कहा जा सकता है क्योंकि पिछले साल अक्तूबर महीने में हुए गांधीनगर मनपा चुनावों से कांग्रेस के लिए बड़ी चेतावनी निकली थी।

बीजेपी को मिली थी बंपर जीत
44 सदस्यों वाले नगर निगम में बीजेपी ने पहली बार 41 सीटों पर कब्जा जमाया था और कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें मिल पाई थी, जब आप का सिर्फ खाला खुला था और एक पार्षद जीत पाया था, लेकिन इन चुनावों में आप ने कांग्रेस का आधा वोट झटक लिया था। इसका नतीजा यह हुआ था कि पहली बार अपने बूते पर बीजेपी गांधीनगर मनपा की सत्ता पर काबिज हुई थी। जब इससे पहले के चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी ने 16-16 सीटें जीती थीं, लेकिन कांग्रेस एक पार्षद के आयोग्य होने से बीजेपी सत्ता में आ गई थी। 2016 के चुनावों में कांग्रेस को 46.93% वोट मिले थे तो वहीं बीजेपी को 44.76% वोट मिले थे। 2021 के चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 28.02% मिले थे। 18.91% फीसदी घट गए। इसमें बड़ा शेयर आप को की शिफ़्ट हुआ था। 2022 के चुनाव भी कांग्रेस की स्थिति हूबहू ऐसी ही रही। वोटों के विभाजन का लाभ बीजेपी को हुआ और वोट शेयर सिर्फ 27.3 फीसदी रह गया।

गांधीनगर महानगर पालिका
कुल सीटें: 44
बीजेपी : 41
कांग्रेस : 2
आप : 1

वोट शेयर:
बीजेपी: 46.49%
कांग्रेस: 28.02%
आप: 21.77

जिग्नेश-अनंत बचा पाए सीट
गुजरात चुनावों से पहले कांग्रेस ने संगठन का विस्तार करके पांच कई कार्यकारी अध्यक्ष बनाए थे। इन अध्यक्षों की नियुक्ति हार्दिक पटेल के पार्टी छोड़ने के बाद की गई थी। चुनावों में सिर्फ जिग्नेश मेवाणी जीत पाए। इसके अलावा आदिवासी नेता अनंत पटेल वसंदा की अपनी सीट बचा पाए। पुराने नेताओं में अर्जुन मोढवाड़िया पोरबंदर से जीते। तो वहीं हिम्मत सिंह पटेल, ऋत्विक मकवाणा, ललित कगथरा, अंबरीश डेर सभी कार्यकारी अध्यक्ष हार गए। आंकलाव से अमित चावड़ा को छोड़कर नेता प्रतिपक्ष सुखराम राठवा और पूर्व नेता विपक्ष परेश धनाणी भी चुनाव हर गए। चुनावों में सिर्फ कांग्रेस की एकमात्र महिला प्रत्याशी के तौर पर गेनीबेन ठाकोर की जीत हुई।