न्यूड कॉल्स से लेकर यूपीआई फ्रॉड तक, इस राज्य के रहने वाले हैं तो हो जाएं सावधान!

भुवनेश्वर: ट्रिन, ट्रिन…. के साथ फोन पर आते अनजान कॉल से सावधान हो जाएं। पहले फोन कॉल और फ‍िर न्‍यूड कॉल्‍स से लेकर यूपीआई तक के फ्रॉड लगातार हो रहे हैं। ओड‍िशा में साइक्रम क्राइम को लेकर हैरान करने वाली बात सामने आई है। दरअसल ओडिशा के करीब 6,000 गांवों में भले ही मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं है, लेकिन राज्य में हर साल साइबर क्राइम बढ़ता जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2019 में 1,475 साइबर क्राइम के मामले दर्ज किए गए, जो 2020 में बढ़कर 1,931 और पिछले साल 2,037 हो गए। इसी तरह, पिछले तीन सालों के दौरान धोखाधड़ी की राशि में भी इजाफा हुआ है। साइबर अपराधियों ने 2019 में ओडिशा में लोगों से 16.18 करोड़ रुपये की ठगी की। यह 2020 में बढ़कर 35.07 करोड़ रुपये और 2021 में 40.39 करोड़ रुपये हो गई। इसका मतलब है कि साइबर बदमाशों की ओर से चोरी क‍िए गए पैसों में केवल तीन सालों के दौरान लगभग 150 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

पिछले तीन सालों में ओडिशा में साइबर पीड़ितों से कुल 5,443 साइबर अपराध के मामले दर्ज किए गए और 91.65 करोड़ रुपये की ठगी की गई। वहीं, ओडिशा पुलिस 91.65 करोड़ रुपये की ठगी गई राशि के मुकाबले केवल 1.37 करोड़ रुपये वसूल करने में कामयाब हो पाई है। हाल के सालों में राज्य में अक्सर साइबर क्राइम होते रहे हैं। पिछले दो सालों में राज्य की राजधानी भुवनेश्वर में इस तरह की धोखाधड़ी में भी बढ़ोत्‍तरी हुई है।

अलग- अलग तरीकों से करते हैं फ्रॉड
2020 में 108 की तुलना में 2021 में भुवनेश्वर स‍िटी पुलिस जिले से लगभग 146 साइबर क्राइम दर्ज किए गए। अधिकतम मामलों में, अज्ञात साइबर बदमाशों ने पीड़ितों को अलग-अलग ऑफर्स में हाई रिटर्न का झांसा देकर, न्यूड वीडियो कॉल, ऑनलाइन ट्रेडिंग, मोबाइल टावरों की स्थापना और यूपीआई लेनदेन के माध्यम से करोड़ों रुपए लूटे हैं। कुछ मामलों में साइबर अपराधियों की ओर से उनके फोन पर भेजे गए लिंक पर क्लिक करने के बाद पीड़ितों के बैंक अकाउंट से हजारों-लाखों रुपए कट गए।

जीवन बीमा पॉलिसी के र‍िर्टन का झांसा देकर 2.35 करोड़ रुपये ठगे
इस साल मार्च में साइबर पुलिस में एक मामला दर्ज किया गया था कि स्कैमर्स ने कथित रूप से क्योंझर के एक व्यवसायी को उसकी ओर से खरीदी गई जीवन बीमा पॉलिसी के लिए उच्च रिटर्न का झांसा देकर 2.35 करोड़ रुपये ठग लिए। एक अन्य मामले में, राजस्थान के एक साइबर गिरोह की ओर से ब्लैकमेल किए जाने के बाद सुबरनपुर जिले के एक बैंक मैनेजर ने कथित रूप से आत्महत्या कर ली। गिरोह के सदस्यों में से एक ने बैंक अधिकारी को एक न्यूड वीडियो कॉल किया और बाद में उसे एक अश्‍लील मामले में फंसाने की धमकी दी।

उगाही के चलते बैंक अध‍िकारी ने की आत्‍महत्‍या
गिरोह ने बैंक अधिकारी से 26 लाख रुपये की उगाही की। मांगों को पूरा करने में असमर्थ अधिकारी ने नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली। एक साइबर स्‍पेशल‍िस्‍ट ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी में पैसे कटने से लेकर एक घंटे तक को गोल्डन ऑवर माना जाता है। इस दौरान पीड़ित को खोए हुए पैसे वापस पाने के लिए अधिकारियों को सूचित करना होता है। बढ़ते साइबर क्राइमों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस अधीक्षक कार्यालय में साइबर क्राइम सेल खोला गया है जबकि 14 स्थानों पर साइबर थाने खोले गए हैं।

ओड‍िशा सरकार ने क्‍या उठाया कदम
गृह राज्य मंत्री तुषारकांति बेहरा ने ओडिशा विधानसभा में एक हालिया जवाब में कहा कि साइबर क्राइम की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों को ट्रेन‍िंग दी जा रही है। 22 नवंबर, 2017 से भुवनेश्वर में एक साइबर फोरेंसिक लैब काम कर रही है। लोग राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोटिंर्ग पोर्टल साइबरक्राइम डॉट जीओवी डॉट इन के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया में आपत्तिजनक वायरल तस्वीर वीडियो की जांच और डिजिटल उपकरणों की जब्ती पर एसपी को मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर दी गई है।