कर्नाटक: कैबिनेट गठन से लेकर असंतुष्टों को साथ रखने तक का चैलेंज, शपथ के बाद सिद्धारमैया का असली ‘टेस्ट’

बेंगलुरु: कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनने जा रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया के सामने कई चुनौतियां रहेंगी। इनमें मंत्रिमंडल गठन, विभागों का बंटवारा और पांच ‘गारंटी’ के वादे को पूरा करना प्रमुख हैं। सिद्धारमैया को पार्टी सहयोगी और उपमुख्यमंत्री बनने जा रहे डीके शिवकुमार को भी साथ लेकर चलना होगा। इससे पहले बेंगलुरु में सिद्धारमैया को औपचारिक रूप से विधायक दल का नेता चुना गया। इसके बाद उन्होंने डीके शिवकुमार के साथ राजभवन जाकर गवर्नर थावरचंद गहलोत से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया। कुछ देर बाद राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। सिद्धारमैया और शिवकुमार 20 मई को दोपहर साढ़े 12 बजे मनोनीत मंत्रियों के समूह के साथ शपथ लेंगे। शपथ लेने के बाद सिद्धारमैया के सामने जो पहली चुनौती है, वह एक ऐसा मंत्रिमंडल गठित करना है, जिसमें सभी समुदायों, क्षेत्रों और गुटों के अलावा नए और पुरानी पीढ़ी के विधायकों को साधा जा सके।सभी को साथ लेकर चलने की चुनौती कर्नाटक मंत्रिमंडल में अधिकतम 34 मंत्री हो सकते हैं और ऐसे में कई विधायक मंत्री बनने के इच्छुक हैं, जिसके चलते सिद्धारमैया के हाथ में एक कठिन कार्य होगा। पार्टी सूत्रों के अनुसार, 10 मई को हुए विधानसभा चुनावों में सभी प्रमुख समुदायों ने बड़े पैमाने पर पार्टी का समर्थन किया है, ऐसे में स्वाभाविक रूप से हर एक की आकांक्षाएं होंगी और सिद्धरमैया को सभी को साथ लेकर चलने की चुनौती होगी। उपमुख्यमंत्री पद के लिए कई दावेदार थे। हालांकि, कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि शिवकुमार ही उपमुख्यमंत्री होंगे। इससे पार्टी के कई वरिष्ठ नेता नाराज हैं।कैबिनेट में जगह की मांग वरिष्ठ कांग्रेस नेता जी परमेश्वर ने आज पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को आगाह किया कि अगर उपमुख्यमंत्री पद किसी दलित को नहीं दिया गया तो उसकी प्रतिकूल प्रतिक्रिया होगी और पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी होगी। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘ मैं मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों ही पदों का आकांक्षी था लेकिन अब हमें आलाकमान के फैसले का पालन करना है, इसलिए यह देखना है कि वे आने वाले दिनों में क्या करेंगे। फिलहाल उन्होंने दो के लिए घोषणा की है और हमें यह देखना एवं इंतजार करना होगा कि वे कैसे मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान न्याय करेंगे।’ लिंगायत के 39 विधायक, वोक्कालिगा के 21, अनुसूचित जाति के 22, अनुसूचित जनजाति के 15, मुस्लिम के नौ और कुरुबा के आठ विधायक समेत अन्य भी कर्नाटक मंत्रिमंडल में प्रमुख भूमिका की मांग कर रहे हैं।