खूनी झड़प से लेकर दांत काटने तक… फीफा विश्व कप ये 5 बड़े विवाद जिसने दिग्गजों की महानता को किया दागदार

नई दिल्ली: कतर में खेला जा रहा का रोमांच अपने चरम पर पहुंचा चुका है। टूर्नामेंट अपने रफ्तार के साथ आगे बढ़ रही है। कई टीमों ने विश्व कप में जीत के साथ अपने अभियान की शुरुआत की तो कुछ को उलटफेर का भी शिकार होना पड़ा लेकिन इसके साथ ही विवादों का दौर भी शुरू हो गया है। ऐसा ही एक मामला पुर्तगाल और घाना के बीच खेले गए मैच से आया है। इस मैच में पुर्तगाल को मिले पेनल्टी पर घाना के कोच समेत इंग्लैंड के पूर्व वायने रूनी ने भी सवाल उठाए। हालांकि अब यह विवाद मैदान से बाहर की बात हो गई है, लेकिन आइए जानते हैं फीफा विश्व कप के उन पांच बड़े विवादों के बारे में जिसने जिनेदिन जिदान और डिएगो मैराडोना जैसे खिलाड़ियों की महानता पर दाग लगा दी थी।

1938: फासीवाद वाला सैल्यूट

फुटबॉल और विवाद का चोली दामन का साथ रहा है। इस लिस्ट में सबसे पहला पुराना विवाद साल 1938 का है। दूसरे विश्व युद्ध से ठीक दो साल पहले फ्रांस की मेजाबनी में 4 जून से 19 जून 1938 तक खेले गए टूर्नामेंट में इटली और फ्रांस के बीच मैच खेला गया था। इस मुकाबले में तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी के कहने पर इटली की टीम ने सफेद के बजाय काली शर्ट पहनी थी। यही नहीं, पूरी टीम ने मैच शुरू होने से पहले फासिस्ट वाला सैल्यूट करके हड़कंप मचा दिया। यह मैच इटली ने 3-1 से जीता था और फिर आगे चकलर चैंपियन बना, लेकिन उसके चैंपियन बनने से ज्यादा चर्चा उसके सैल्यूट की होती है।

1962: दोनों टीमों में चले लात-घूसे

फुटबॉल के मैदान पर दूसरा सबसे चर्चित विवाद 1962 विश्व कप के दौराान के है। इस विश्व कप में 2 जून को मेजबान चिली और इटली के बीच एक मुकाबला गया है। इस मैच को ‘सैंटियागो की लड़ाई’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि मुकाबले के दौरान दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच जमकर मारपीट हुई थी। मैच के दौरान रेफरी केन एस्टन ने दो खिलाड़ियों को मैदान के बाहर भेज दिया था, जिनकी वजह से ही पीले और लाल कार्ड की शुरुआत हुई।

1986 डिएगो मैराडोना का हैंड ऑफ गॉड

साल 1986 फीफा विश्व कप में हैंड ऑफ गॉड विवाद को भला कैसे भूला जा सकता है। अर्जेंटीना के डिएगो मैराडोना से जुड़ा यह विवाद आज भी फुटबॉल प्रेमियों के जहन में है। यह विवाद 22 जून, 1986 को इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच हुए मुकाबले के दौरान हुआ। इस मैच में अर्जेंटीना के डिएगो मैराडोना ने दो गोल दागकर अपनी टीम को जीत दिलाई थी। उनका पहला गोल हाथ से किया गया था, जिसे रेफरी देख नहीं पाए थे। मैच के 51 मिनट में साथी खिलाड़ी से मिले पास को मैराडोना ने गोल में तब्दील किया। इंग्लिश खिलाड़ियों ने फाउल की अपील की, लेकिन रेफरी ने इसे स्वीकार नहीं किया और अर्जेंटीना के खाते में गोल दर्ज हो गया। बाद में मैराडोना ने कहा कि ऐसा जानबूझकर नहीं किया था और उसे हैंड ऑफ गॉड करार दिया, जबकि हार से भड़की इंग्लिश मीडिया ने इसे हैंड ऑफ डेविल कहा था।

2006: जिनेदिन जिदान का हेडबट

महान फुटबॉलर जिनेदिन जिदान के करियर पर लगा इकलौता दाग, जिसे वह चाहकर भी अब नहीं धो सकते। 9 जुलाई, 2006 को इटली और फ्रांस के बीच मैच खेला गया। इटली के खिलाफ फाइनल में जिदान ने टीम को शुरुआती बढ़त दिलाई। इटली के लिए मार्को मातेराजी ने 19वें मिनट में बराबरी का गोल दागा। मैच पेनल्टी शूटआउट की तरफ बढ़ता दिख रहा था। अतिरिक्त समय में कुछ ही पल बाकी थे। इसी दौरान मातेराजी ने कुछ ऐसा कहा, जिससे जिदान भड़क गए और उन्हें सिर से टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी जोरदार थी कि इटली के मार्को मातेराजी मैदान में गिर पड़े। इसके बाद रेफरी ने जिदान को लाल कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर कर दिया। फ्रांस की टीम यह मुकाबला 3-5 से हार गई। यह जिदान के इंटरनेशनल करियर का आखिरी मैच भी था।

2014: लुइस सुआरेज ने दांत से काटा

विवादों की लिस्ट में दांत से काटना भी शामिल है। यह काम किया है उरुग्वे के स्टार स्ट्राइकर लुइस सुआरेज। ब्राजील वर्ल्ड कप में इटली और उरुग्वे के बीच 24 जून, 2014 को ग्रुप मैच खेला जा रहा था। मैच के 79वें मिनट में लुइस सुआरेज का इटली के डिफेंडर जिर्योजियो चिलिनी से विवाद हो गया। देखते ही देखते बात इतनी बढ़ गई कि गुस्से में सुआरेज ने विरोधी खिलाड़ी के कंधे पर काट लिया।

चिलिनी के दिखाने के बावजूद रेफरी मार्को रॉड्रिग्ज ने ध्यान नहीं दिया और इटली को सिर्फ फ्री किक का मौका दिया। इटली यह मैच 1-0 से हारकर टूर्नमेंट से बाहर हो गई थी। बाद में सुआरेज पर कार्रवाई की गई। उन्हें फुटबॉल संबंधित गतिविधियों से चार महीने के लिए निलंबित किया गया। इसके अलावा भारी जुर्माने के साथ उन पर 9 अंतरराष्ट्रीय मैच का प्रतिबंध भी लगाया गया।