1800 एम्स, गरीबों को दस साल तक मुफ्त राशन…फुटबॉल वर्ल्ड कप में खर्च रकम से इतना कुछ

नई दिल्ली: फुटबॉल वर्ल्ड कप (FIFA World Cup) इस बार खाड़ी देश कतर में खेला जा रहा है। यह खेलों के इतिहास में अब तक का सबसे महंगा आयोजन है। कतर ने इसके लिए पैसा पानी की तरह बहाया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस पर कुल 220 अरब डॉलर यानी करीब 18 लाख करोड़ रुपये का खर्च आया है। इतनी रकम से भारत के 80 करोड़ गरीबों को 10 साल तक मुफ्त राशन दी जा सकती है। कतर की इकॉनमी को इस खेल आयोजन से महज 17 अरब डॉलर का फायदा होने की उम्मीद है। यही वजह है कि फुटबॉल वर्ल्ड कप पर हुए फिजूलखर्च पर सवाल उठ रहे हैं। खासकर कतर ने इस टूर्नामेंट के लिए सात स्टेडियमों पर 6.5 अरब डॉलर खर्च किए हैं। लुसैल स्टेडियम (Lusail Stadium) की क्षमता 80,000 दर्शकों की है जबकि कतर की सबसे सफल फुटबॉल टीम अल साद (Al-Sadd) के मैचों में औसतन 1500 दर्शक जुटते हैं। कतर की आबादी करीब 30 लाख है।

कतर ने इस खेल आयोजन पर जितना खर्च किया है, उसमें कई दूसरे काम हो सकते थे। मसलन इस रकम से भारत के 80 करोड़ गरीबों को 10 साल तक पेट भरा जा सकता था। कोरोना महामारी (Covid-19 pandemic) के दौरान गरीबों को राहत देने के लिए (PMGKAY) को अप्रैल 2020 में लॉन्च किया गया था। इस योजना पर हर तिमाही करीब 45,000 करोड़ रुपये का खर्च आता है। यानी इसका सालाना खर्च करीब एक लाख 80 हजार करोड़ रुपये बैठता है। कतर में हो रहे फुटबॉल वर्ल्ड कप में करीब 18 लाख करोड़ रुपये का खर्च आया है। यानी इसकी रकम में भारत के 80 करोड़ गरीबों को दस साल तक मुफ्त राशन मिल सकती है। PMGKAY के तहत परिवार के हरेक सदस्य को हर महीने पांच किलो राशन दिया जाता है।

1800 एम्स अस्पताल
इसी तरह इस रकम से 1800 एम्स (AIIMS) जैसे अस्पताल बन सकते थे। एम्स जैसे अस्पताल बनाने का खर्च करीब 1,000 करोड़ रुपये है। यानी इतनी रकम से देश के हर जिले में करीब तीन एम्स बनाए जा सकते हैं। कतर को 2010 में फुटबॉल वर्ल्ड कप की मेजबानी मिली थी और तबसे इस देश ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए पैसा पानी की तरह बहाया है। इसके लिए छह नए स्टेडियम बनाए गए हैं जबकि दो पुराने स्टेडियमों का कायाकल्प किया गया है। इतना ही नहीं खिलाड़ियों की ट्रेनिंग के लिए भी कई स्टेडियम बनाए गए हैं।

अमेरिका की स्पोर्ट्स फाइनेंस कंसल्टैंसी फर्म Front Office Sports के मुताबिक कतर ने वर्ल्ड कप के लिए अपने देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने में करीब 210 अरब डॉलर खर्च किए हैं। इसमें एयरपोर्ट्स, रोड, इनोवेटिव हब, होटल और बाकी चीजों का डेवलपमेंट शामिल है। राजधानी दोहा में खिलाड़ियों के ठहरने के लिए बनाए गए कॉम्प्लेक्स द पर्ल (The Pearl) बनाने पर करीब 15 अरब डॉलर खर्च हुए। इसी तरह दोहा मेट्रो पर 36 अरब डॉलर का खर्च आया। कतर ने इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास पर एक दशक से भी अधिक समय तक हर हफ्ते 50 करोड़ डॉलर का भारी भरकम खर्च किया।

सबसे महंगा आयोजन
पिछला फुटबॉल वर्ल्ड कप 2018 में रूस में आयोजित किया गया था। उस पर कुल 11.6 अरब डॉलर का खर्च आया था। उससे पहले साल 2014 में ब्राजील में 15 अरब डॉलर और साल 2010 में साउथ अफ्रीका में 3.6 अरब डॉलर का खर्च आया था। जर्मनी में 2006 में हुए फुटबॉल वर्ल्ड कप में 4.3 अरब डॉलर, 2002 में जापान में हुए आयोजन में सात अरब डॉलर, फ्रांस में 1998 में 2.3 अरब डॉलर और 1994 में अमेरिका में 50 करोड़ डॉलर का खर्च आया था।