लैंडिंग के बाद घर नहीं गए पूर्व ISRO चीफ, अधूरा सपना पूरा होते ही खुशी में झूम उठे थे के सिवन

नई दिल्ली: 23 अगस्त की शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चांद पर विक्रम लैंडर के कदम रखते ही भारत ने इतिहास रच दिया। टीवी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर देख रहे करोड़ों लोगों की आंखें खुशी से भावुक हो गईं। लैंडिंग होते ही बैंगलोर में बैठे इसरो चीफ एम सोमनाथ सहित कई वैज्ञानिकों को पता चल गया था कि उन्होंने कितना बड़ा किला फतह कर लिया है। जिस साउथ पोल पर किसी देश का चंद्रयान नहीं पहुंच पाया वहां भारत ने श्रीगणेश कर दिया है। जश्न और गर्व के पल के बीच एक इंसान और था जो इस लैंडिंग पर बराबर नजर बनाए हुए था। नाम है के सिवन। मिशन के सफल होते ही इसरो के इस पूर्व चीफ का वो सपना पूरा हो गया था जो उन्होंने साल 2019 में देखा था। 4 साल पहले चंद्रयान-2 के क्रैश होने के बाद सिवन के आंसू आज भी भारतवासी के दिमाग में हैं। सिवन इस सफलता से इतने ज्यादा प्रसन्न थे कि वह लैंडिंग के बाद भी काफी देर तक बाकी वैज्ञानिकों के साथ कंट्रोल रूम में ही रहे। उन्होंने कहा कि वह देर रात घर पहुंचे थे।खुशी इतनी कि घर जाना ही भूल गए सिवनइसरो के पूर्व चीफ के सिवन ने कहा न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में बताया कि आखिरकार हमारी प्रार्थनाएं पूरी हुईं। चांद पर लैंडिंग के बाद हम घर नहीं गए। सिवन ने कहा कि मैं लैंडर से रोवर निकलने तक नियंत्रण कक्ष में बैठा रहा। रोवर को चंद्रमा की सतह पर चलते हुए देखने के बाद ही मैं घर गया। मैं घर देर रात पहुंचा था। बीती शाम मून पर सफल लैंडिंग के बाद सिवन ने कहा कि इसके लिए हम पिछले चार साल से इंतजार कर रहे हैं। यह सफलता हमारे लिए और पूरे देश के बहुत अच्ची खबर है। 4 साल पहले सिवन के साथ रोया था पूरा देश साल 2019 यानी आज से 4 साल पहले के सिवन इसरो चीफ थे। चंद्रयान-2 चांद से कुछ ही दूरी पर था। तभी कुछ ऐसा हुआ जो हर भारतवासी का दिल तोड़ गया। लैंडर के क्रैश होते ही सारी उम्मीदें टूट गईं। के सिवन काफी निराश हो गए थे। दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें गले लगाकर ढांढस बधाया था। अंतरिक्ष यान को 22 जुलाई को लॉन्च किया गया था और 6 सितंबर की लैंडिंग निर्धारित की गई थी। लैंडिंग के प्रयास के दौरान, लैंडर अपने लक्ष्य से भटक गया, मिशन का नियंत्रण कक्ष से संपर्क खो गया और चंद्रमा की सतह पर क्रैश हो गया। ISRO ने तब सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी बताया था। यह झटका ISRO टीम को बहुत लगा क्योंकि उनकी इस परियोजना पर मेहनत से सफल परिणाम नहीं मिले।चंद्रयान-3 की तैयारी में, वर्तमान ISRO अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने विस्तार से बताया कि अंतरिक्ष एजेंसी ने 2019 में क्या गलत हुआ था, इस पर ध्यान केंद्रित किया ताकि इस बार सफल लैंडिंग सुनिश्चित हो सके।