ताइवान के राष्ट्रपति चुनाव ने चीन को क्या संदेश दिया, पूर्व भारतीय विदेश सचिव ने विस्तार से बताया

बीजिंग: ताइवान के राष्ट्रपति चुनाव ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को स्पष्ट संदेश दे दिया है। इस चुनाव में ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन करने वाली सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (DPP) ने अभूतपूर्व जीत हासिल की है। यह डीपीपी की लगातार तीसरी जीत है। डीपीपी के उम्मीदवार लाई चिंग-ते (विलियम लाई) को अपने प्रतिद्वंद्वियों, चीन की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी, कुओमिन्तांग (केएमटी) के उम्मीदवार होउ यू-यी और नवगठित ताइवान पीपुल्स पार्टी (टीपीपी) के उम्मीदवार वेन-जे को हराने के बाद ताइवान का राष्ट्रपति चुना गया। लाई को लगभग 40% वोट मिले, जबकि उनके केएमटी और टीपीपी प्रतिद्वंद्वियों को क्रमशः 33% और 26% वोट मिले। चीन लगातार उन पर ‘अलगाववादी’ और ताइवान की आजादी का समर्थक करार देता रहा है।जिनपिंग के धमकी का ताइवान पर उल्टा असरभारत के पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले ने हमारे सहयोगी प्रकाशन टाइम्स ऑफ इंडिया में एक लेख में लिखा है कि ताइवान में विलियम लाई की जीत के बाद से चीन ने ताइवान स्ट्रेट में और अधिक युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों को भेजकर नाकाबंदी का अभ्यास किया है। यह चीन के ग्रे जोन वॉरफेयर टेक्टिस का हिस्सा है। चुनाव के कुछ दिन पहले नए साल के संबोधन पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने यह कहकर दबाव बढ़ा दिया था कि ताइवान का एकीकरण ऐतिहासिक रूप से अपरिहार्य है और ताइवान चीन के साथ निश्चित रूप से एकीकृत होगा। हालांकि, ताइवान के राष्ट्रपति चुनाव में शी जिनपिंग की चेतावनियों का उल्टा असर होता दिखाई दिया। विलियम लाई के जीत का अंतर कम क्यों हुआविजय गोखले ने कहा कि लोगों का ध्यान विलियम लाई के जीत के कम अंतर पर केंद्रित हो रहा है। 2016 और 2020 के चुनावों में निवर्तमान डीपीपी की अध्यक्ष त्साई इंग वेन ने आसानी से बहुतम हासिल कर लिया था। लेकिन, इस बात तस्वीर काफी बारीक है। वोट शेयर के मामले में डीडीपी का हिस्सा 2020 में 57% से घटकर 2024 में 40% तक पहुंच गया है। यह इसलिए हुआ है, क्योंकि 2024 का राष्ट्रपति चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला हुआ। यह तथ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि तीसरे उम्मीदवार, टीटीपी के वेन-जे कई वर्षों तक डीपीपी के समर्थक थे। ऐसे में उन्होंने डीपीपी के विलियम लाई के वोट को ज्यादा काटा है। संक्षेप में चीन समर्थक केटीएम के खिलाफ मतदान का प्रतिशत लगातार 50% से अधिक बना हुआ है। चीन में शामिल नहीं होना चाहता ताइवानचूंकि, केएमटी चीन में ताइवान के एकीकरण का समर्थन करने वाली पार्टी है। इसलिए, 2024 के राष्ट्रपति चुनाव ने दो महत्वपूर्ण रुझानों की पुष्टि कर दी है। पहला, केएमटी का पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के साथ समायोजन का संदेश ताइवान के लोगों की पसंद नहीं है। ताइवान में ऐसा मानने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ताइवान के लोगों में स्थानीय पहचान की भावना ज्यादा है। पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना से अलग ताइवानी पहचान के लोगों के अधिकार की पुष्टि के लिए 2014 में शुरू हुआ सनफ्लावर आंदोलन पूरी तरह से परिपक्व हो गया है।ताइवान में युवा बनाम वृद्धइसका यह मतलब नहीं है कि ताइवान के युवाओं में स्वतंत्रता की घोषणा करने की इच्छा ज्यादा है। केएमटी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ने फिर भी 33% वोट शेयर हासिल किया है। राष्ट्रपति चुनाव के साथ-साथ हुए संसदीय चुनावों के नतीजे भी इस धारणा को मान्य करते हैं, क्योंकि केएमटी ने 113 सीटों में से 52 सीटें हासिल कीं, जो डीपीपी से एक अधिक है। लेकिन इसका मतलब यह है कि अधिक से अधिक युवा ताइवानी अपना खुद का स्थान चाहते हैं, और पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के साथ विलय होने पर इसे प्राप्त करने के बारे में संशय में हैं।एक देश दो प्रणालियां ताइवान को मंजूर नहींचीन के पूर्व राष्ट्रपति देंग जियाओपिंग का एक देश दो प्रणालियों के साथ शानदार प्रयोग, जिसका उद्देश्य हांगकांग, मकाओ और ताइवान के लोगों को इन क्षेत्रों पर चीनी संप्रभुता को स्वीकार करते हुए अपने जीवन के तरीके को बनाए रखने की अनुमति देना था। इसने चीन को हांगकांग और मकाओ की शांतिपूर्ण वापसी सुनिश्चित करने की अनुमति दी। वर्तमान चीनी नेता शी जिनपिंग ने हांगकांग पर 1997 के चीन-ब्रिटिश समझौते को पूरी तरह से पलट दिया और कठोर राष्ट्रीय सुरक्षा नीति जारी कर दी। हांगकांग के अम्ब्रेला आंदोलन पर कार्रवाई और नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू करने से ताइवान के अपने भविष्य के लिए बीजिंग पर भरोसा न करने की भावना जाग्रत हो गई है।लाई को समझौते की आवश्यकताचूंकि ताइवान में कोई भी पार्टी संसदीय बहुमत हासिल करने में सक्षम नहीं होगी, इसलिए अगले चार वर्षों तक चेक-एंड-बैलेंस की प्रणाली लागू रहने की संभावना है। ऐसा प्रतीत होता है कि मनोनीत राष्ट्रपति पहले से ही इस वास्तविकता से तालमेल बिठा रहे हैं, और चीनी बदमाशी का विरोध करते हुए ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता बनाए रखने का वचन दे रहे हैं। लाई ने घोषणा की कि वह क्रॉस-स्ट्रेट यथास्थिति बनाए रखेंगे, टकराव की जगह बातचीत को अपनाएंगे और चीन के साथ आदान-प्रदान को बढ़ावा देंगे।चीन को करना होगा इंतजारताइवान के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे ने यह बताया है कि चीन को अपने सबसे खराब विकल्प से कम से कम चार सार और निपटना होगा। चीन चाहकर पर ताइवान पर हमला इसलिए नहीं कर सकता, क्योंकि दूसरे पक्ष के उकसावे की कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ताइवान के लोगों के पास सदियों से एकीकृत चीन की बमुश्किल ही कोई स्मृति है। उनके लिए मुख्य भूमि के साथ पहचान बनाना कठिन होता जा रहा है, क्योंकि कम्युनिस्ट शासन के तहत चीनी समाज मौलिक रूप से बदल गया है। ताइवान के कुलीन वर्ग, जिनमें से कई अभी भी केएमटी का समर्थन करते हैं, के पास ‘दोहरी नागरिकता’ है, लेकिन आम ताइवानी के पास जाने के लिए और कोई जगह नहीं है।