किसान, टैक्सपेयर्स, होम लोन.. निर्मला के पिटारे से किसके लिए क्या निकलेगा?

नई दिल्ली: मनरेगा के लिए आवंटन बढ़ाया जाएगा, PM Kisan सम्मान निधि में 6 के बजाय 8 या 10 हजार रुपये का प्रावधान किया जा सकता है, महिला मुखिया वाले परिवारों के लिए डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर के तहत नई स्कीम का ऐलान हो सकता है, आयकरदाताओं के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन 50 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये किया जा सकता है, इंश्योरेंस पर टैक्स रिबेट बढ़ाई जा सकती है, होम लोन के इंटरेस्ट पेमेट पर टैक्स छूट में इजाफा किया जा सकता है, स्टार्टअप्स की सहूलियत बढ़ाने के इंतजाम हो सकते हैं…, ऐसे तमाम कयास लगाए जा रहे हैं अंतरिम बजट के बारे में। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहली फरवरी को अंतरिम बजट पेश करेंगी। फाइनैंस मिनिस्टर कह चुकी हैं कि यह वोट ऑन एकाउंट (Vote on Account) ही होगा और इसमें किसी बड़े कदम की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए, लेकिन उम्मीदें थमने का नाम नहीं ले रहीं।कुछ खास वजहें हैंइसकी कुछ खास वजहें हैं। यह आम चुनाव से पहले का बजट होगा, लिहाजा सरकार चुनावी अखाड़े में उतरने से पहले अपना पिछला रेकॉर्ड तो सामने रखेगी ही। कुछ ऐसा भी कर सकती है, जिससे उसे वोटरों को लुभाने में मदद मिले। वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ यशवीर त्यागी कहते हैं, ‘हर सरकार यह बताना चाहती है कि उसने क्या किया है और आने वाले दिनों में क्या करना चाहती है। यह उसका दायित्व भी होता है और अधिकार भी। ऐसी मेसेजिंग के लिए बजट बहुत खास मौका होता है।’चुनावी मौका हैकुछ बड़ी घोषणाएं हो सकने की दूसरी वजहें भी हैं। नैशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) ने मौजूदा वित्त वर्ष में GDP ग्रोथ 7.3% होने का अनुमान लगाया है, लेकिन उसी का यह भी कहना है कि कृषि क्षेत्र की ग्रोथ 1.8% ही रह सकती है। रोजगार का मामला भी अच्छा नहीं दिख रहा। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी के अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक, 20 से 24 साल के एज ग्रुप में बेरोजगारी दर 44% से अधिक रही। जुलाई से सितंबर तक के तीन महीनों यह 43% से अधिक थी। 25 से 29 साल के एज ग्रुप में 14.33% के साथ बेरोजगारी दर 14 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जो जुलाई-सितंबर तिमाही में साढ़े 13% थी। लिहाजा अंतरिम बजट में नौजवानों और किसानों को ध्यान में रखते हुए कुछ ऐलान किए जा सकते हैं। चुनावी मौका है तो महिलाएं और कम आमदनी वाले टैक्सपेयर भी सरकार की नजर में होंगे।क्या बड़ी घोषणाएं करने पर रोक है?मौजूदा वित्त वर्ष का बजट संसद पास कर चुकी है, लेकिन नया वित्त वर्ष शुरू होने पर सरकार भारत के कंसॉलिडेटेड फंड से एक पैसा भी नहीं निकाल सकती, संसद की इजाजत के बिना। नई सरकार बनने से पहले नया वित्त वर्ष शुरू हो चुका होगा, लिहाजा 31 मार्च के बाद और नई सरकार के जुलाई में फुल बजट पेश करने तक के लिए अंतरिम बजट या वोट ऑन एकाउंट पेश करना होगा। अंतरिम बजट में पहले से चल रहे कार्यक्रमों पर खर्च और वेतन भुगतान जैसी चीजों के लिए संसद से मंजूरी ली जाती है। मोटे तौर पर यही माना जाता है कि अंतरिम बजट में सरकार को ऐसे ऐलान नहीं करने चाहिए, जिनसे वोटरों को लुभाने की कोशिश दिखे। टैक्स नियमों में बड़े बदलावों की परंपरा भी नहीं रही है। हालांकि अर्थशास्त्री डॉ त्यागी कहते हैं, ‘अंतरिम बजट में नई सरकार का बजट आने तक के सरकारी खर्च के लिए संसद से इजाजत ली जाती है। मोटे तौर पर रिवाज यही है कि कोई बड़ा नीतिगत कदम न उठाया जाए और टैक्स रूल्स में कोई बड़ा बदलाव न किया जाए। यह सब नई सरकार के लिए छोड़ दिया जाता है। लेकिन बड़े ऐलान न किए जाएं, ऐसी कोई संवैधानिक रोक भी नहीं है। लिहाजा, सरकार कुछ ऐसी घोषणाएं कर सकती है, जिनसे वोटरों को संदेश दिया जा सके।’अंतरिम बजट की कैसी है नजीर?2019 में आम चुनाव से पहले वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट पेश किया था। उन्होंने स्टैंडर्ड डिडक्शन को 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये करने का ऐलान कर दिया। इस तरह अंतरिम बजट में इनकम टैक्स से जुड़े बदलाव की नजीर बनी। गोयल ने कई और बड़े कदम उठाए। किसानों के लिए 6000 रुपये सालाना की पीएम किसान सम्मान निधि की घोषणा की और असंगठित क्षेत्र के वर्कर्स के लिए पेंशन कवरेज का भी ऐलान किया।चिदंबरम ने भी किया था2019 में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने गोयल के कदमों की आलोचना की थी। लेकिन UPA 2 सरकार में वित्त मंत्री रहते हुए चिदंबरम ने जब 2014 में अंतरिम बजट पेश किया था, तब उन्होंने भी कुछ ऐसा ही किया था। उन्होंने कार, बाइक, फ्रिज, कंप्यूटर और मोबाइल फोन जैसी चीजों पर टैक्स घटा दिया। एजुकेशन लोन पर टैक्स छूट का ऐलान किया। पूर्व सैनिकों की वन रैंक-वन पेंशन की मांग स्वीकार की और इसके लिए एक बजट भी एलोकेट कर दिया।वाजपेयी सरकार में भी हुआ था ऐसाहालांकि चिदंबरम से पहले भी अंतरिम बजट में बड़ी घोषणाएं की जा चुकी थीं। 2004-05 के अंतरिम बजट में वाजपेयी सरकार के वित्त मंत्री रहे जसवंत सिंह ने स्टांप ड्यूटी से जुड़े बदलावों का ऐलान किया था। साथ ही, चाय और चीनी उद्योगों के लिए पैकेज की घोषणा की। उन्होंने महंगाई भत्ते को बेसिक सैलरी के साथ मर्ज करने का ऐलान भी किया था।