Kashmir में पहली बार बिना बर्फबारी के गुजर रही हैं सर्दियां, Snow Fall और वर्षा के लिए की जा रही सामूहिक प्रार्थना

कश्मीर में इस बार बर्फबारी और बारिश नहीं होने की वजह से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है साथ ही कश्मीर में बर्फबारी का मजा लेने के उद्देश्य से आ रहे पर्यटकों को भी निराशा हाथ लग रही है। पर्यटकों की मायूसी देखकर पर्यटन उद्योग से जुड़े लोग भी निराश हैं। बर्फबारी नहीं होने से बर्फ आधारित खेल गतिविधियों और विंटर गेम्स के आयोजन पर भी असर पड़ा है। साथ ही शुष्क मौसम का दौर जारी रहने की वजह से झेलम नदी का जलस्तर सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। अधिकारियों के मुताबिक, ‘झेलम नदी रविवार सुबह संगम (अनंतनाग जिला) में -0.75 फुट और अशाम (बांदीपोरा जिला) में -0.86 फुट पर बह रही थी। यह नदी का सबसे निचला जल स्तर है।’ अधिकारियों ने बताया कि नदी का जलस्तर संगम में नवंबर 2017 में इस स्तर पर पहुंचा था।इसे भी पढ़ें: इंतजार खत्म…तीर्थयात्रियों के लिए फिर से खोली गई वैष्णो देवी मंदिर की पुरानी गुफाकश्मीर में इस बार सर्दी के मौसम में बहुत कम बर्फबारी हुई और लंबे समय से शुष्क मौसम का दौर जारी है। वहीं दिसंबर में 79 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई, जबकि जनवरी के पहले पखवाड़े में घाटी के अधिकांश हिस्सों में बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई। ‘गुलमर्ग स्की रिसॉर्ट’, जो सर्दी के दिनों में इस समय बर्फ से ढका हुआ रहता था, फिलहाल सूखा पड़ा है। कश्मीर के अधिकांश मैदानी इलाकों में बर्फबारी नहीं हुई जबकि घाटी के ऊपरी इलाकों में सामान्य से कम मात्रा में बर्फबारी दर्ज की गई। शुष्क मौसम के कारण घाटी के पहाड़ी इलाकों से बड़ी संख्या में झाड़ियों में आग लगने की खबरें सामने आई हैं। वहीं वन विभाग ने वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए परामर्श जारी किया है। इस बीच, कश्मीर के निवासी विशेष प्रार्थनाएँ कर रहे हैं ताकि वर्षा और बर्फबारी हो सके। प्रभासाक्षी से खास बातचीत करते हुए लोगों ने कहा कि लंबे समय तक शुष्क मौसम की स्थिति पर्यटन और स्वास्थ्य को प्रभावित करेगी और पानी की कमी का कारण बनेगी। लोगों ने कहा कि हम विशेष सामूहिक प्रार्थना करने आए हैं क्योंकि भगवान हमसे खुश नहीं हैं, हमने कभी बर्फ के बिना सर्दी नहीं देखी इसलिए हमने बर्फ और बारिश के लिए प्रार्थना की।” प्रभासाक्षी से बात करने वाले एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि, यदि शुष्क मौसम जारी रहा, तो गर्मियों में हमारे लिए सबसे खराब दिन होंगे, हमें पानी की कमी का सामना करना पड़ेगा और पर्यटकों का आना-जाना भी बंद हो जाएगा।