ड्रैगन फ्रूट की खेती से बुंदेलखंड के किसान कमा रहे तीन गुना मुनाफा, सरकार से भी मिल रही मदद

हमीरपुर: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर () जिले में किसानों ने मोटा मुनाफा कमाने के लिए मैक्सिको के ड्रैगन फ्रूट () के पौधों की खेती की है। कम लागत में तीन गुना मुनाफा देने वाली को लेकर अब जिला उद्यान विभाग ने भी बड़ा प्लान तैयार किया है। इस बार 20 हेक्टेयर में इसकी खेती कराए जाने की तैयारी भी की जा रही है। हमीरपुर जिले के कई गांवों किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं और इसके लाभ भी देख रहे हैं।

पाटनपुर गांव में ऋषि शुक्ला ने एक एकड़ में ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए हैं। राठ क्षेत्र के गोहानी गांव में भी राजेन्द्र सिंह ने भी इसकी खेती की तरफ कदम बढ़ाए है। किसान ऋषि शुक्ला ने बताया कि ये फल बहुत महंगा बिकता है। इसकी बाजार में बहुत अधिक डिमांड है। तीन गुना तक मुनाफा मिलने से यहां अब तमाम किसान इसकी खेती में रुचि ले रहे हैं।

जिला उद्यान अधिकारी डॉ. रमेश पाठक ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट ज्यादातर मैक्सिको और मध्य एशिया में पाया जाता है। यह फल खाने में तरबूज की तरह मीठा होता है। फल में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व होते हैं। उन्‍होंने बताया कि इसकी खेती महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में कुछ सालों से किसान कर रहे हैं। इसकी खेती से बड़ा मुनाफा मिलने के कारण यहां हमीरपुर में भी किसानों ने ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए हैं। एक एकड़ में करीब तीन सौ पौधे लगाने पर छह लाख रुपये का फायदा सीधे तौर पर किसानों को मिलता है।

जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि एक एकड़ में फल तैयार करने में करीब दो लाख रुपये की लागत आती है। बाजार में इसकी भारी डिमांड को देखते हुए अब यहां 20 हेक्टेयर भूमि पर ड्रैगन फ्रूट की खेती कराए जाने की तैयारी की जा रही है। वहीं, जिला उद्यान निरीक्षक घनश्याम सोनकर ने बताया कि एक हेक्टेयर में ड्रैगन फ्रूट की खेती पर किसान को 30 हजार रुपये का अनुदान भी मिलता है। पिछली बार यह अनुदान ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाने पर दिया गया था। इस फल के पौधे में मई-जून में फूल आते हैं फिर जुलाई से दिसम्बर तक फल लगते हैं।

ड्रैगन फ्रूट की खेती से किसानों की बदलेगी तकदीर

ड्रैगन फ्रूट की खेती करने के लिए अब किसानों ने भी तैयारी की है। पाटनपुर गांव के ऋषि शुक्ला ने बताया कि हाल में ड्रैगन फ्रूट तैयार कर इसे बाजार में बेचने पर तीन गुना फायदा मिला है। एक एकड़ में इसकी खेती कराई जा रही है। अब एक एकड़ और खेत में तीन सौ पौधे लगाकर ड्रैगन फ्रूट की बंपर पैदावार कराई जाएगी। जिला उद्यान अधिकारी डॉ. रमेश पाठक ने बताया कि सूखे से प्रभावित क्षेत्र में ड्रैगन फ्रूट की खेती से किसानों की तकदीर बदलेगी क्योंकि इसकी खेती में लागत कम आती है और पानी की भी ज्यादा जरूरत भी नहीं पड़ती है। इसके पौधे में किसी भी तरह का कोई कीट रोग भी नहीं लगता है।

‘अस्थमा और मधुमेह के लिए रामबाण है ड्रैगन फ्रूट’

हमीरपुर के सरीला क्षेत्र के एसडीएम खालिद अंजुम ने ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन करने के लिए किसानों में जोश भरा है। उन्होंने बताया कि यह औषधीय गुणों वाला फल है जो बुन्देलखंड की जलवायु के लिए उपयुक्त है। विटामिन्स, आयरन, कैल्शियम, पौटेशियम, सोडियम और जिंक समेत अन्य तमाम पोषक तत्व होने के कारण ड्रैगन फ्रूट मधुमेह और अस्थमा में रामबाण है। आयुर्वेदिक डॉक्टर दिलीप त्रिपाठी व फिजीशियन वीके श्रीवास्तव ने बताया कि इस फल को खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। फल में विटामिन सी व फाइबर होने से जख्म जल्दी भरते हैं। पेट संबंधी बीमारी भी इससे छूमंतर होती है।
(रिपोर्ट-पंकज मिश्रा)