Explained: राजस्थान का शहर चूरू, गर्मियों में उबलता और सर्दियों में कंपकंपाता क्यों है?

चूरू: देश में सबसे ज्यादा गर्म और सर्द शहर का रिकॉर्ड बनाने वाले राजस्थान के जिले चूरू ने तापमान में बड़ी छलांग लगाई है। चूरू में पारा 50.5 डिग्री पहुंच गया। इसके अभी और बढ़ने के आसार हैं। पश्चिमी राजस्थान के फलौदी, बाड़मेर, जैसलमेर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जैसे शहरों में अभी तक गर्मी के बढ़ने की खबरें आ रही थीं। मगर, 28 मई को चूरू का पारा ऐसा बढ़ा कि यह मीडिया की सुर्खियों में आ गया। चूरू गर्मियों में देश का सबसे गर्म शहर बन जाता है तो सर्दियों में यह देश का सबसे सर्द शहर बनने से पीछे नहीं रहता है। तापमान का यह रिकॉर्ड दुनिया में अनोखा है। आइए- इसके पीछे का साइंस समझते हैं।जून, 2019 में चूरू का पारा रिकॉर्ड 50.8 डिग्रीमौसम विभाग के अनुसार, 8 साल पहले यानी 19 मई, 2016 को भी चूरू में तापमान 50.2 डिग्री रिकॉर्ड किया गया था। वहीं, मई, 2019 में पारा 48.5 डिग्री पर पहुंचा था। हालांकि, उसके बाद 1 जून 2019 को चुरू में रिकॉर्ड गर्मी पड़ी थी। उस वक्त चूरू में पारा सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए 50.8 डिग्री पर पहुंच गया था। सर्दी में पारा गोता लगाए तो जम जाते हैं पेड़-पौधेचूरू में सर्दी में तापमान शून्य से नीचे और गर्मी में 50 डिग्री से ऊपर तक पारा पहुंच जाता है। सर्दियों में चूरू में फसलों पर ओस की बूंदी बर्फ बन जाती है। घड़ों और पाइपों में रखा पानी तक जम जाता है। वहीं गर्मी में यहां सड़कों की डामर तक पिघल जाती है। सर्दी में कई बार पारा शून्य के नीचे जाता है तो पेड़-पौधे जमकर आइस ट्री जैसे दिखने लग जाते हैं। चूरू में तापमान बढ़ने या घटने की वजह क्या हैजयपुर में मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा बताते हैं कि चूरू के तापमान इतने ज्यादा उतार-चढ़ाव के पीछे उसकी सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। राजस्थान के पश्चिमी इलाके जैसे जैसलमेर, बाड़मेर, फलौदी और पाकिस्तान बॉर्डर से सटे इलाकों में हवा के साथ गर्मी का तालमेल बढ़ जाता है। यहां की मिट्टी और रेत दोपहर में तेजी से गर्म हो जाती है। इसके अलावा, दक्षिण-पश्चिमी हवाओं के प्रभाव से तापमान बढ़ा रहता है। गर्मियों में आसपास जंगलों की कमी और सूखा होने की वजह से यहां और शहरों के मुकाबले तापमान बढ़ जाता है। सर्दियों में चूरू की रेतीली मिट्टी और हवाओं से रेडिएशन कूलिंगडॉ. राधेश्याम शर्मा बताते हैं कि सर्दियों में हवाएं नॉर्थवेस्टरली होती हैं। ये हवाएं जब इस क्षेत्र में पहुंचती हैं तो वो अपने साथ ठंडक लाती हैं, जिससे वो मौसम को और सर्द बना देती हैं। यहां की मिट्टी रेतीली होती है और इलाका बेहद ड्राई है। इसकी खासियत यह है कि यह मिट्टी जल्दी गर्म होती है और इसकी रेडिएशन कूलिंग तेजी से होती है। इसीलिए यहां पर एक्स्ट्रीम वेदर देखने को मिलता है। रेत के टीलों की वजह से तेजी से बढ़ता-घटता है तापमानदिल्ली यूनिवर्सिटी के जानकी देवी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सना रहमान कहती हैं कि चूरू में ज्यादा गर्मी की वजह यह है कि उसकी भौगोलिक स्थिति कर्क रेखा के नजदीक है। दूसरा, वहां पर रेत के टीले ज्यादा पाए जाते हैं, जो तेजी से गर्म या ठंडे होते हैं। तीसरा यह है कि जैसलमेर या सीमापार से आने वाली गर्म हवाओं से भी चूरू का तापमान बढ़ जाता है। पानी के सोर्स न होना भी बड़ी वजह, रातें सर्दडॉ. सना रहमान कहती हैं कि चुरू के सबसे ज्यादा सर्द होने के पीछे भी हिमालय से आने वाली ठंडी और सूखी हवाएं हैं। चूंकि, यहां की भौगोलिक परिस्थिति ऐसी है कि यह सर्द हवाओं को अपनी ओर तेजी से आकर्षित करती है, जिससे इस शहर का तापमान सर्दियों में काफी गिर जाता है। चूरू में चूंकि नदियां या झीलें जैसे पानी के सोर्स नहीं हैं, ऐसे में वहां पर बढ़े हुए तापमान को काउंटर करने के लिए पानी नहीं मिल पाता है। हवाओं में नमी नहीं है। चूरू की रेतीली मिट्टी के कण बेहद बारीक, यह बड़ी वजहचूरू के लोहिया कॉलेज भूगोल के हेड ऑफ डिपार्टमेंट एमएम शेख के अनुसार, रेतीले इलाकों का एक बेसिक नेचर होता है कि वह जल्द गर्म हो जाता है और जल्द सर्द हो जाता है। ग्लोबल वॉर्मिंग और क्लाइमेट चेंज की वजह से तापमान में इतना उतार-चढ़ाव ज्यादा देखने को मिलता है। इससे इकोलॉजिकल बैलेंस बिगड़ रहा है। गर्मी तो सभी जगह पड़ रही है, मगर चूरू की रेतीली मिट्टी के कण जैसलमेर-बाड़मेर जैसे इलाकों से भी ज्यादा इतने बारीक होते हैं कि वो बहुत जल्दी गर्म या सर्द हो जाते हैं। चूरू में 1 फीसदी से भी कम वनस्पति का आवरणएमएम शेख कहते हैं कि चूरू ऐसे वायुदाब वाले क्षेत्र में आता है कि यहां गर्मियों में गर्मी ज्यादा होती है, जबकि सर्दियों में सर्दी ज्यादा होती है। यहां सबसे कम वनस्पति का आवरण है। चुरू में वनस्पति का आवरण 1 फीसदी से भी कम है, जो इसके खास मौसम के पीछे जिम्मेदार है। यानी यहां पर जंगल या वनस्पतियां काफी कम हैं।