Exclusive: सरकार से चूक हुई, राज्‍य में शांति प्रक्रिया जल्द, मह‍िलाओं के बर्बर वीडियो पर बोले मणिपुर के CM

नरेन्द्र नाथ/अल्पयु सिंह, इंफालनई दिल्ली: मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने कहा है कि राज्य में कई इलाकों में थोड़ी-बहुत फायरिंग की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन हालात अब बहुत गंभीर नहीं हैं। उन्होंने संकेत दिया कि राज्य में बहुत जल्द शांति प्रक्रिया शुरू हो सकती है। सरकार अनौपचारिक तरीके से शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिशों में जुटी हुई है। नवभारत टाइम्स से खास बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए हम सभी समूहों को बैकचैनल संदेश भेज रहे हैं। इसके लिए सिविल सोसायटी, प्रफेसर, धार्मिक गुरुओं के साथ-साथ कुकी जनजाति के लोगों की मदद ली जा रही है। हालांकि राज्य में शांति कब तक कायम होगी, इसे लेकर मुख्यमंत्री ने कोई डेडलाइन नहीं बताई। कुकी महिलाओं के साथ दरिंदगी के वीडियो पर यूरोपीय यूनियन की संसद से लेकर विपक्ष तक के हमले का केंद्र रहे मुख्यमंत्री ने कहा, अफसोस है कि घटना के बारे में हमें विडियो से पता चला। राज्य में हिंसा के दौरान हत्या, किडनैपिंग और आगजनी की करीब नौ हजार से ज्यादा एफआईआर दर्ज हुई थीं। इतनी सारी घटनाओं के बीच वायरल विडियो वाली घटना पुलिस से नजरअंदाज हो गई। इस स्तर पर चूक हुई। सीएम ने कहा कि राज्य में मौजूदा हिंसा के पीछे साजिश है। उन्होंने इसके लिए अवैध माइग्रेशन और ड्रग्स कारोबारियों पर शक जताया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पिछले 10-15 साल में म्यांमार के रास्ते घुसपैठ बढ़ी है। हमारी सरकार ने अवैध घुसपैठ और अफीम की अवैध खेती के खिलाफ ऐक्शन लिया है। क्या मणिपुर में समय रहते एक्शन लेने में देरी हुई? क्या है वहां शांति स्थापित करने का एक्शन प्लान? क्या मणिपुर में जारी हिंसा कोई साजिश है? वहां के हालात पर मणिपुर के सीएम एन. बीरेन सिंह ने बात की नरेंद्र नाथ और अल्पयू सिंह ने। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश:सवाल: मणिपुर के हालात आज के दिन कैसे हैं ?जवाब: मणिपुर में करीब-करीब हालात सामान्य हो गए हैं। शांति कायम भी हो गई थी, लेकिन अचानक 4 मई का एक विडियो 70 दिनों के बाद सामने आया। आसपास के इलाकों में थोड़ी बहुत गोलीबारी हो रही है, लेकिन गंभीर हालात अब नहीं हैं। हिंसा में कुकी और मैतेई लोग शामिल रहे हैं।सवाल: 3 महीने होने को आए हैं, शांति प्रक्रिया कब शुरू होगी? कुकी लोग कह चुके हैं कि आपके साथ बातचीत की टेबल पर नहीं बैठेंगे?जवाब: मणिपुर सरकार ऑफिशियली और अनऑफिशियली दोनों तरह से शांति के लिए काम कर रही है। राज्यपाल की ओर से भी कोशिश हो रही है। सवाल: दो कुकी महिलाओं के साथ दरिंदगी का वायरल वीडियो सामने आने के बाद राज्य सरकार हरकत में आई और एक्शन होने में 80 दिन लग गए? आपको नहीं लगता बहुत देर से एक्शन हुआ?जवाब: मणिपुर में हालात ऐसे थे कि मैतेई वाले इलाकों में कुकी पुलिसकर्मी नहीं जा पा रहे थे। कुकी वाले इलाकों में मैतेई पुलिसवाले नहीं जा सकते थे। यही वजह है कि घटना नजरअंदाज हुई। घटना का विडियो आने के 24 घंटे में कार्रवाई हुई, क्योंकि विडियो में आरोपी दिख गए थे।सवाल: जिस वायरल विडियो को लेकर बात की जा रही है, उसको लेकर आपका मीडिया में एक बयान आया था कि ऐसी और भी घटनाएं हुई हैं और आपको जानकारी थी, इस बारे में आप क्या कहेंगे?जवाब: ये घटना नहीं होनी चाहिए थी। 3 मई की हिंसा पूरे एक हफ्ते तक चलती रही। इतनी अफवाहें फैल गई थीं। हमें अफवाहों से बचना चाहिए और मानवता को आगे रखकर काम करना है। जो भी करना है वह कानून और संविधान के दायरे में रहकर करना है। सवाल: कुकी बहुत असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। आरोप है कि राज्य सरकार और पुलिस ने हिंसा के दौरान निष्पक्ष भूमिका नहीं निभाई।जवाब: ऐसा नहीं, पुलिस सबकी है। ये आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति है। पुलिस को लेकर आरोप बेबुनियाद हैं। पुलिस नगा, मैतई और कुकी सभी समुदाय की है। देश और राज्य की पुलिस पर सवाल नहीं उठा सकते।सवाल: पूरी तरह से हालात सामान्य होने में कितना वक्त लगेगा? अवैध घुसपैठ के बारे में क्या कहेंगे?जवाब: राज्य में पिछले 10-15 साल में अवैध घुसपैठ की घटनाएं बढ़ी हैं। इसमें हम पुराने कुकी निवासियों की बात नहीं कर रहे। मणिपुर में कुल 34 ट्राइब्स हैं। हाल के समय में करीब 996 गांवों में अवैध घुसपैठिए आए हैं। खासकर 3 जिलों में ऐसा ज्यादा देखने को मिला। इसी को लेकर सरकार ने कैबिनेट मंत्री की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाई। कमिटी में नगा, मैतई और कुकी तीनों को प्रतिनिधित्व दिया गया। जब हमने स्क्रीनिंग करना शुरू किया तो एक हफ्ते में 20 गांवों में स्कैनिंग के बाद 2400 से ज्यादा अवैध घुसपैठिए मिले। इससे पहले 300 के करीब डिटेंशन सेंटर में भी मौजूद थे। रविवार को ऐसे और 840 अवैध प्रवासियों की पहचान हुई है। म्यांमार के साथ हमारा 398 किमी का साझा बॉर्डर है, जिससे दिक्कत हो रही है। बाहर वालों की वजह से अपने कुकी लोगों को भी झेलना पड़ रहा है। सवाल: मणिपुर के जो लोग बाहर रह रहे हैं, उन्हें क्या मेसेज देना चाहेंगे?जवाब: मणिपुर भारत जैसा ही है। जैसे भारत में कई धार्मिक या जातीय समुदाय हैं उसी तरह मणिपुर में भी हैं। सब अपने-अपने धर्म को मानते हैं। हम सबको भारत के लोकतंत्र के तले ही रहना है। हमें मिलकर रहना है। कुकी और मैतई को लेकर लड़ाई नहीं है। ये मणिपुर सरकार के साथ घुसपैठियों की लड़ाई का मामला है।