‘पाकिस्‍तान से दुश्‍मनी फायदे में नहीं लेकिन…’, जयशंकर ने साफ किया क्‍यों विश्वास के लायक नहीं है पड़ोसी!

नई दिल्‍ली: पाकिस्‍तान के साथ भारत के खराब रिश्‍तों () का () ने कारण बताया है। उन्‍होंने कहा है कि यह सही है कि पाकिस्‍तान के साथ दुश्‍मनी भारत के फायदे में नहीं है। यह कोई चाहता भी नहीं है। लेकिन, पड़ोसी आपके शहर में हमला करेगा तो रिश्‍ते कैसे सामान्‍य रह सकते हैं। ऐसे में कहीं न कहीं लक्ष्‍मण रेखा तो खींचनी ही पड़ेगी। जयशंकर ने बीते रोज भी पाकिस्‍तान की कसकर क्‍लास लगाई थी। उन्‍होंने पाकिस्‍तान को आतंकवाद का प्रमोटर, प्रोटेक्टर और आतंक की इंडस्‍ट्री का स्‍पोक्‍सपर्सन करार दिया था। जयशंकर बोले थे आतंकवाद पर चर्चा करने के लिए आतंकवाद के पीड़ित साजिशकर्ताओं के साथ नहीं बैठ सकते हैं। जयशंकर ने दोबारा साफ किया है बिलावल भुट्टो को सिर्फ SCO (शंघाई सहयोग संगठन) विदेश मंत्री के तौर पर न्‍यौता दिया गया था। इससे ज्‍यादा कुछ भी नहीं है। जयशंकर ने भारत की मेजबानी लिए कहा कि अगर उनका मेहमान अच्‍छा है तो वह उतने ही अच्‍छे मेजबान भी हैं। पड़ोसी हमले करेगा तो लाइन खींचनी ही पड़ेगी… जयशंकर ने पाकिस्‍तान के साथ रिश्‍तों की बहाली के संबंध में कई अहम बातें कहीं। ये संकेत देते हैं कि भविष्‍य में पाकिस्‍तान के साथ भारत के संबंध कैसे रह सकते हैं। विदेश मंत्री बोले हैं कि बेशक पाकिस्‍तान के साथ शत्रुता हमारे हित में नहीं है। लेकिन, लाइन तो खींचनी ही पड़ेगी। पाकिस्‍तान से हम दुश्‍मनी नहीं चाहते हैं। हालांकि, पड़ोसी आपके शहर पर हमले करे तो नहीं लगता कि चीजें सामान्‍य चल सकती हैं। विदेश मंत्री ने कहा है कि पाकिस्‍तान न केवल आतंक की फैक्‍ट्री चलाता है। बल्कि इस पर अपना अधिकार भी समझता है। वह अंतरराष्‍ट्रीय संबंधों के बुनियादी नियमों का भी पालन नहीं करता है। उन्‍होंने सार्क का जिक्र कर यह भी कहा कि ऐसे संगठन में पाकिस्‍तान कैसे हो सकता है जो आतंकवाद का समर्थन कर आपसी कनेक्टिविटी को बाधित करता हो। मेहमान अच्‍छा तो मैं मेजबान भी अच्‍छा… बिलावल भुट्टो की भारत यात्रा के बारे में भी जयशंकर ने दोबारा एक चीज साफ की। उन्‍होंने कहा कि गोवा मीट में भुट्टो का आना सिर्फ एससीओ विदेश मंत्री की हिस्‍सेदारी के तौर पर लिया जाना चाहिए। वह भारत एससीओ सदस्‍य देश के विदेश मंत्री की हैसियत से आए थे। भारत की मेजबानी पर जयशंकर बोले, ‘अगर मेरा मेहमान अच्‍छा है तो मैं मेजबान भी अच्‍छा हूं।’