मनजिंदर सिंह सिरसा के खिलाफ मानहानि की कार्यवाही पर रोक लगाने से अदालत का इनकार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने ‘दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति’ (डीएसजीएमसी) के पूर्व अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके को कथित रूप से बदनाम करने की आपराधिक शिकायत पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता मनजिंदर सिंह सिरसा के खिलाफ निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि वह पहले ही सिरसा को जारी समन को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी कर चुकी है और कार्यवाही रोकने का कोई कारण नहीं है।
अदालत ने इस माह के प्रारंभ में जारी आदेश में कहा, ‘‘इस स्तर पर, इस अदालत को मौजूदा मामले में कार्यवाही पर रोक लगाने का कोई कारण नहीं दिखता है। जिस मुख्य याचिका में याचिकाकर्ता ने विवादित समन आदेश को रद्द करने की मांग की है, उसमें नोटिस पहले ही जारी किया जा चुका है।’’
अदालत ने कहा, ‘‘हालांकि, पिछले पैराग्राफ में दर्ज कारणों से, उच्च न्यायालय निचली अदालत के समक्ष कार्यवाही पर रोक लगाने का इच्छुक नहीं है। तदनुसार, वर्तमान आवेदन खारिज किया जाता है।’’
पिछले साल 30 जून को, अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट हरजीत सिंह जसपाल ने सिरसा और अन्य आरोपियों, हरमीत सिंह कालका और जगदीप सिंह काहलों को एक जुलाई को उनकी अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था।
मानहानि मामले में यह आरोप लगाया गया था कि आरोपी व्यक्ति सोशल मीडिया, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से शिकायतकर्ता के खिलाफ मानहानिकारक, झूठी और तुच्छ जानकारी फैला रहे थे।
शिकायत के अनुसार, सिरसा यह भ्रामक जानकारी फैला रहे थे कि डीएसजीएमसी अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए मंजीत सिंह जीके ने गुरु हरकिशन पब्लिक स्कूल का प्रबंधन सुखो खालसा प्राइमरी एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष अवतार सिंह हित को सौंप दिया था।
सिरसा ने समन को कई आधारों पर चुनौती दी, जिसमें यह भी शामिल था कि मानहानि की शिकायत निर्धारित समय सीमा के भीतर दर्ज नहीं की गयी थी। सिरसा ने कहा था कि उनके खिलाफ मानहानि का मामला कथित रूप से अपमानजनक बयान दिये जाने के तीन साल बाद दायर किया गया था।