आज से इंफाल में शुरू होगी कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’, राहुल गांधी करेंगे अगुवाई

इंफाल: कांग्रेस की ” की शुरुआत रविवार से मणिपुर की राजधानी इंफाल से हो रही है। की अगुवाई में यह यात्रा पूर्व से पश्चिम की ओर निकलेगी, जो 20 मार्च को मुंबई में खत्म होगी। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी जयराम रमेश ने बताया कि राहुल गांधी रविवार सुबह 11 बजे इंफाल आ रहे हैं। वहां से खोंगजोम युद्ध स्मारक जाएंगे। 2016 में इस युद्ध स्मारक की शुरुआत पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने की थी। इस युद्ध स्मारक का महत्व केवल मणिपुर के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए है। जयराम ने कहा, यहां से राहुल गांधी थौबल जाएंगे, जहां से यात्रा की शु़रुआत होगी। यात्रा को हरी झंडी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे दिखाएंगे। इस मौके पर कांग्रेस के कई मुख्यमंत्रियों समेत तमाम बड़े नेता जुटेंगे। शनिवार को इंफाल में कांग्रेस की यात्रा की शुरुआत की झलक मिलने लगी थी। शहर में कांग्रेस के झंडे लगने शुरू हो चुके थे। कांग्रेस ने यात्रा को लेकर लोगों के बीच पहुंचना शुरू किया है। कांग्रेस को उम्मीद है कि मणिपुर के लोग बड़ी तादाद में जुड़ेंगे। यात्रा के दौरान राहुल गांधी अलग-अलग नागरिक संस्थाओं से मिलेंगे और उनकी जनसभाएं होंगी। पहले दिन राहुल गांधी आठ से दस किमी पैदल चलेंगे। कांग्रेस का कहना है कि इस यात्रा के जरिए कांग्रेस नॉर्थ ईस्ट के पांच राज्यों में 11 दिन गुजारेगी। यह मणिपुर के अलावा, नागालैंड, मेघालय, असम और अरुणाचल प्रदेश को भी कवर करेगी। पार्टी इस यात्रा के जरिए बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे उठाएगी।पार्टी ने कहा, ये चुनावी नहीं, वैचारिक यात्राकांग्रेस ने यात्रा को चुनावी न कहकर वैचारिक करार दिया। जयराम ने कहा, यह एक राजनीतिक दल की राजनीतिक यात्रा है, जो चुनावी न होकर वैचारिक है। इसे पिछले दस सालों के अन्याय काल के खिलाफ निकाली जा रही यात्रा बताया। दस सालों के अन्याय काल से कांग्रेस का इशारा बीजेपी सरकार से था। रमेश ने कहा, आजकल प्रधानमंत्री अमृतकाल के सपने दिखा रहे हैं, जबकि हकीकत है कि 10 साल अन्याय काल निकले। अन्याय काल की बात नहीं होती, अमृतकाल की बड़ी-बड़ी बातें होती हैं। उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा, हम कहते हैं कि सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, हकीकत है कि आज देश में लोकतंत्र कम, एकतंत्र ज्यादा है।यात्रा के लिए इसलिए चुना गया मणिपुर कोमणिपुर से यात्रा की शुरुआत करने के पीछे रमेश का कहना था कि पिछले आठ महीने ये मणिपुर अशांत है। वह तकलीफ से गुजर रहा है। इन आठ महीनों में मणिपुर में जो अन्याय हुआ है, उसे लेकर इन आठ महीनों में पीएम मोदी को मणिपुर आने का वक्त नहीं मिला। यहां के सीएम और न ही राजनीतिक दल के नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्रियों से मिलने का वक्त मिला। यहां तक कि पीएम अपने विभाग के एक राज्य मंत्री जो इस राज्य से आते हैं, उनसे भी नहीं मिले। न ही पीएम ने अपनी चुप्पी तोड़ी। आज देश के सामने एक ऐसी विचारधारा की चुनौती है जो ध्रुवीकरण, अमीरों को और अमीर बनाने, राजनीतिक तानाशाही में विश्वास करती है।