मंदिरों के ध्वज से प्रेरित हुए CJI डी वाई चंद्रचूड़, जिला अदालत के वकीलों को दिखाई ‘इंसाफ की ध्वजा’

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने मंदिरों पर लगे ध्वजों से प्रेरणा लेते हुए जिला अदालतों के वकीलों से इस तरह काम करने के लिए कहा कि आने वाली पीढ़ियों तक ‘न्याय की ध्वजा’ फहराती रहे। उन्होंने कहा कि ऐसे समाज की कल्पना करें जहां हर एक नागरिक को इंसाफ का अधिकार मिले। लोग सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट नहीं आते। शुरुआत में लोग जिला अदालतों में जाते हैं। जिला अदालतें ही इंसाफ की पहली सीढ़ी के रूप में उभरती हैं। उन्होंने जिला अदालतों के वकीलों से कहा कि बार के सदस्यों के रूप में आपको नागरिकों में आत्मविश्वास पैदा करना होगा। सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, जिला अदालत के वकील के रूप में यह हमारी दक्षता है कि हम वास्तव में यह सुनिश्चित करेंगे कि न्याय की यह ध्वजा आने वाली पीढ़ियों तक फहरती रहे।’मंदिरों के ध्वजा में छिपा है संदेश’ इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, सीजेआई चंद्रचूड़ ने राजकोट में जिला अदालतों के वकीलों को संबोधित कर रहे थे। द्वारका और सोमनाथ मंदिरों के ऊपर ध्वजा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं आज सुबह द्वारकाधीश जी में ध्वजा से प्रेरित हुआ। ऐसी ही ध्वजा मैंने जगन्नाथ पुरी में देखी थी। लेकिन हमारे देश की परंपरा की इस सार्वभौमिकता को देखिए, जो हम सभी को एक साथ बांधती है। इस ध्वजा का हमारे लिए विशेष अर्थ है। और वह अर्थ है – वकीलों के रूप में, जजों के रूप में या नागरिकों के रूप में हम सभी को एकजुट करने वाली शक्ति है। और वह एकीकृत शक्ति हमारी मानवता है, जो कानून के शासन और भारत के संविधान द्वारा शासित होती है।’ ‘गांधी के जीवन से प्रेरित होकर राज्यों का कर रहा हूं दौरा’सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि उन्होंने न्यायपालिका के सामने आने वाली चुनौतियों को समझने और समाधानों को खोजने के लिए महात्मा गांधी के जीवन और आदर्शों से प्रेरित होकर कई राज्यों का दौरा करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी दो दिवसीय गुजरात यात्रा उसी प्रयास का हिस्सा थी। सीजेआई ने कहा, ‘मैंने पिछले एक साल में कई राज्यों का दौरा करने की कोशिश की ताकि मैं हाई कोर्ट और जिला अदालतों के अधिकारियों से मिल सकूं, उनकी समस्याओं को सुन सकूं और इस तरह, हम न्यायपालिका के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान ढूंढ सकें… उनके साथ बातचीत करके, मैं उनकी समस्याओं को समझने और प्रभावी समाधानों को खोजने की कोशिश कर रहा हूं।’ चीफ जस्टिस ने बताया कि उनके दौरे का हाई कोर्ट के जजों और जिला अदालतों के अधिकारियों के साथ भारतीय न्यायपालिका की उपलब्धियों को साझा करना भी है।