शर्मनाक! मिड डे मील खाकर खुद ही झूठे बर्तन धो रहे बच्चे, शिकायत करने पर भी सुनवाई नहीं

मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से हैरान करने वाला मामला सामने आया है. एक ऐसा स्कूल है जहां बच्चों को मिड डे मील भोजन करने के बाद अपने बर्तन खुद साफ करने पड रहे है. वहीं, स्कूल के छात्रों का कहना है कि शिकायत करने पर न तो बर्तन साफ करने वाले की व्यवस्था की जा रही है. न ही विद्यालय प्रबंधन द्वारा कोई कार्यवाही की जा रही है. वहीं, जिला मध्याह्न भोजन प्रभारी का कहना है कि अगर विद्यालय में बच्चों को अपने खाने के बर्तन खुद साफ करने पड रहे है तोटीम गठित कर जांच कराई जाएगी. अगर ऐसा निकला तो स्कूल के प्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
दरअसल, ये मामला बल्देवगढ़ ब्लाक के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय खजरार का है. जहां देश का भविष्य कहने वाले छात्र-छात्राओं को स्कूल से मिलने वाला मध्याह्न भोजन करने के बाद अपने खाने के बर्तन खुद साफ करना पढ रहे है. इस दौरान स्कूल के छात्रों का कहना है कि यह कोई पहला मौका नहीं है कि उन्हें बर्तन साफ करना पड रहे ,है बल्कि वह जब से स्कूल में पढ रहे है तभी से उन्हें अपने खाने के बर्तन स्कूल में धोना पढ रहे है.
अतिथि शिक्षक बोले- स्कूल में नहीं है कोई सुविधा
वहीं, स्कूल में पढ़ाने वाले अतिथि शिक्षक नरेंद्र सिंह बुंदेला का कहना है कि मिड-डे-मील में तो तमाम समस्याएं हैं. लेकिन यहां पर कोई सुविधा नहीं है ना तो बच्चों के बर्तन धोने की सुविधा ना स्कूल में ही भोजन तैयार करने की सुविधा. यहां तो बच्चों को मिड डे मील का भोजन स्वयं सहायता समूह के घर तक लेने जाना पड़ता है.
इसके साथ ही जिन बर्तनों में बच्चे भोजन करते हैं हर रोज उन्हें अपने हाथों से उन बर्तनों को धोना पड़ता है, जिसको लेकर कई बार स्व सहायता समूह से भी हमने बोला है लेकर उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया. प्रधानाध्यापक को भी बता चुके हैं उन्होंने भी अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की.चूंकि, स्वंय सहायता समूह से नियुक्त हुए रसोइयों की ही जिम्मेदारी बर्तन धोने की है.
मिड डे मील प्रभारी बोले- जिला स्तर से कराई जाएगी जांच
इस मामले में जिला मध्याह्न भोजन प्रभारी आर.के.पस्तौर का कहना है मध्यान भोजन में जो व्यवस्था शासन स्तर से की गई है, जिसमें स्व सहायता समूह को निर्देश हैं कि वह रसोइयों की व्यवस्था करेंगे. ऐसे में जो रसोईया वहां नियुक्त होगा उसकी जिम्मेदारी होगी कि वह बर्तनों को साफ स्वच्छ रखें, जिससे बच्चों की खाने की प्रति रुचि बढ़े.
अगर इस में लापरवाही बढ़ती जा रही है तो पूरे मामले की जिला स्तर से जांच कराई जाएगी. अगर ऐसा पाया गया तो मध्याह्न भोजन वितरण करने वाले स्वयं सहायता समूह व विद्यालय के प्रधानाध्यापक के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.