Amritpal के सहयोगी वरिंदर के खिलाफ किश्तवाड़ में शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज

जम्मू कश्मीर पुलिस ने फरार अलगाववादी अमृतपाल सिंह के संदिग्ध अंगरक्षक वरिंदर सिंह के खिलाफ शस्त्र अधिनियम के तहत बृहस्पतिवार को एक मामला दर्ज किया। यह मामला किश्तवाड़ जिले में वरिंदर सिंह को हथियार लाइसेंस जारी किए जाने से संबंधित है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
जिला प्रशासन ने वरिंदर सिंह का लाइसेंस भी रद्द कर दिया और कहा कि वह इस बात की जांच करेगा कि 2015 में सेवा से हटाए गए भूतपूर्व सैनिक को कैसे 2014 में लाइसेंस मिल गया और फिर जम्मू कश्मीर के विभिन्न जिलों में वह लाइसेंसकी समयसीमा में विस्तार कराता रहा।
पुलिस ने कहा कि वरिंदर सिंह जिसे फौजी के नाम से भी जाना जाता था, अलगाववादी अमृतपाल सिंह की सुरक्षा में शामिल निजी सुरक्षाकर्मियों में शामिल था। अमृतपाल अभी फरार है।
हाल में जारी एक वीडियो में ‘वारिस पंजाब दे’ के प्रमुख अमृतपाल सिंह का अंगरक्षक वरिंदर सिंह हवा में गोली चलाता नजर आ रहा है।
वीडियो सामने आने के बाद पंजाब पुलिस ने पिछले सप्ताह उसे गिरफ्तार किया और उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाया तथा वह सुदूर असम की एक जेल में बंद है।
किश्तवाड़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) खलील पोसवाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बृहस्पतिवार को बताया कि इस बात की भी जांच किए जाने की आवश्यकता है कि वरिंदर को लाइसेंस कैसे मिल गया।
उन्होंने कहा, ‘‘इसके बाद हमने शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं और भारतीय दंड संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत किश्तवाड़ पुलिस थाना में प्राथमिकी दर्ज की।’’
उन्होंने कहा कि पुलिस ने पंजाब पुलिस को इस मामले की जानकारी दे दी है और उनसे दस्तावेज मांगे हैं। उन्होंने कहा कि बंदूक का लाइसेंस उसे 2014 में किश्तवाड़ के डिप्टी मजिस्ट्रेट (डीएम) कार्यालय से जारी किया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘हम उस व्यक्ति से पूछताछ की मांग करेंगे। उसे (वरिंदर सिंह को) जांच करने के लिए और यह पता लगाने के लिए यहां लाया जाएगा कि उसे यहां से लाइसेंस कैसे मिला।’’
उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस की अपराध जांच विभाग (सीआईडी) शाखा ने हाल में किश्तवाड़ के डीएम को पत्र लिखा था कि उसके बंदूक लाइसेंस का दुरुपयोग किया गया है। एसएसपी ने कहा, ‘‘मामले में कार्रवाई की गई और उपायुक्त किश्तवाड़ ने हथियार का लाइसेंस रद्द कर दिया।