क्‍या सऊदी अरब के पवित्र शहर मदीना में नहीं जा सकते हैं गैर मुस्लिम? स्‍मृति इरानी के दौरे पर मचा है बवाल

रियाद: भारत सरकार में अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री स्मृति इरानी और विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन इन दिनों सऊदी अरब की यात्रा पर हैं। दोनों ने सऊदी अरब सरकार के साथ एक अहम हज समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ मुस्लिमों के लिए सबसे पवित्र शहरों में शुमार मदीना का दौरा किया है। यहां उन्होंने भारतीय मूल के लोगों से मुलाकात भी की है। स्मृति इरानी के इस दौरे की दुनियाभर में चर्चा हो रही है। इसकी वजह ये है कि मक्का और मदीना में लंबे समय तक गैर मुस्लिम नहीं जाते रहे हैं। एक गैर मुस्लिम और वो भी महिला की मदीना यात्रा पर कई लोग भड़के हुए हैं तो काफी लोग इसके लिए सऊदी सरकार और इरानी की तारीफ भी कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनकी इस यात्रा को लेकर खूब हंगामा है।स्मृति इरानी की ये यात्रा इसलिए ध्यान खींच रही है क्योंकि सऊदी अरब में महिलाएं बिना हिजाब के घरों से नहीं निकलती हैं। दूसरी और मदीना और मक्का जाने के लिए भी गैर मुस्लिमों पर कई रुकावटें हैं। तीन साल पहले तक तो सभी गैर मुस्लिमों की मक्का और मदीना में एंट्री बैन थी। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने मदीना शहर में साल 2021 में ही गैर मुस्लिमों को जाने की अनुमति है। 2021 में क्राउन प्रिंस ने सऊदी में कुछ लिबरल नियम लागू करते हुए मदीना में मुस्लिमों की नो एंट्री वाले बोर्ड हटवा दिए थे। जिसका कुछ लोगों ने स्वागत किया था तो काफी लोगों ने तीखा विरोध भी दर्ज कराया था। गैर मुस्लिम क्यों नहीं जा सकते मक्का मदीना?सऊदी अरब के मक्का और मदीना दोनों, शहर मुस्लिमों के लिए बेहद पवित्र हैं। इसकी वजह है कि ये दोनों शहर पैगंबर मोहम्मद से जुड़े हुए हैं। लाखों की तादाद में हर साल दुनियाभर के मुसलमान हज करने के लिए मक्का और मदीना आते हैं। मक्का और मदीना में गैर मुस्लिमों के एंट्री ना देने के पीछे अलग-अलग कारण बताए जाते हैं। कुछ लोग इसे दोनों शहरों की पवित्रता से जोड़ते हैं। वहीं कुछ लोग पैंगबर मोहम्मद के जमाने में हुई लड़ाईयों को मक्का और मदीने में गैर मुस्लिमों की एंट्री बैन करने की वजह मानते हैं। हालांकि इन नियमों में सऊदी सरकार ने कुछ छूट दी है लेकिन अभी भी सऊदी के बहुत से लोग मानते हैं कि मक्का और मदीना में गैर-मुस्लिमों की एंट्री ठीक नहीं है। स्मृति ईरानी की हालिया यात्रा के पीछे हंगामे की वजह भी यही है। सऊदी अरब के भारत से संबंध काफी अच्छे रहे हैं लेकिन ये भी एक हकीकत है कि सऊदी में शरिया कानून लागू है और वहां के नियम-कानून काफी सख्त हैं। ऐसे में पहली बार मदीना शहर में किसी गैर मुस्लिम भारतीय प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने से कट्टर विचारों वाले खुश नहीं हैं और सऊदी प्रिंस को कोस रहे हैं। स्मृति इरानी के सोशल मीडिया पोस्ट पर भी काफी लोगों ने कमेंट किया है, जिसमें उन्होंने अपनी मदीना यात्रा के बारे में लिखा, आज मदीना की ऐतिहासिक यात्रा की। इस्लाम के लिए सबसे पवित्र शहरों में से एक में पैगंबर की मस्जिद मस्जिद अल नबवी, उहुद के पहाड़ और क्यूबा मस्जिद को भी देखा।