विवाह और तलाक दोनों का कराना होगा रजिस्ट्रेशन, यूनिफॉर्म सिविल कोड का यह नियम जानिए

देहरादून: उत्तराखंड की विधानसभा में 6 फरवरी का दिन इतिहास में दर्ज हो गया। स्वतंत्र भारत की पहली विधानसभा के रूप में उत्तराखंड एसेंबली ने अपना नाम दर्ज करा लिया है, जहां समान नागरिक संहिता पर बहस शुरू हुई। समान नागरिक संहिता में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। मूल रूप से विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के मसलों पर आधारित है। सभी वर्ग के लोगों के लिए अब एक समान प्रावधान किए जा रहे हैं। सीएम पुष्कर धामी ने विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी बिल पेश कर दिया है। इस बिल के कानून बनते ही उत्तराखंड में लिव इन रिलेशन में रह रहे लोगों को रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी हो जाएगा। ऐसा नहीं करने पर 6 महीने तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी भी गैर-कानूनी मानी जाएगी। वहीं, शादी और तलाक दोनों का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य कर दिया गया है।उत्तराखंड यूसीसी बिल क्या संवैधानिक है?भारत के संविधान में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता का जिक्र किया गया है। संविधान के आर्टिकल 44 के भाग- 4 में इसकी चर्चा की गई है। राज्य के नीति- निदेशक तत्व से संबंधित इस अनुच्छेद में कहा गया है कि राज्य, देश भर में नागरिकों के एक यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का प्रयास करेगा। यहां राज्य का मतलब सरकार से होता है। संविधान के नीति निदेशक तत्व शासन करने वाली सरकारों के लिए एक गाइड के समान हैं। इनमें वे सिद्धांत या उद्देश्यों का जिक्र किया गया है, जिन्हें प्राप्त करने के लिए सरकारों को काम करना होता है। भारतीय जनता पार्टी ने अपने गठन के साथ ही यूसीसी अपनी राय साफ कर दी थी। पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी के मूल मुद्दों में से एक यूसीसी भी है। भाजपा ने धर्म के आधार पर कानूनों का निर्धारण की खिलाफत की है। धामी सरकार की ओर से भी इसी आधार पर यूसीसी बिल को तैयार कर विधानसभा में पेश किया गया है। इस बिल के लागू होने के बाद हिंदू मैरिज एक्ट, मुस्लिम पर्सनल लॉ और अन्य धर्मों के निजी कानून खत्म हो जाएंगे। सभी वर्गों को एक ही कानून के तहत जीवन जीने का अधिकार होगा। इसे सामाजिक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इसमें विवाह और तलाक को लेकर भी कई नियम बनाए हैं।शादी का पंजीकरण अनिवार्यउत्तराखंड यूसीसी बिल 2024 में सभी विवाह के पंजीकरण को अनिवार्य किया गया है। यूसीसी बिल लागू होने के बाद पहले से हो चुकी शादियों को भी रजिस्टर कराना होगा। गांवों में पंचायत स्तर और कस्बों में निकाय स्तर पर विवाह रजिस्ट्रेशन को सरल किया जाएगा। इसमें किसी प्रकार की दिक्कत लोगों को नहीं होगी। विवाह के रजिस्ट्रेशन को लेकर भी नियम सामने आ गए हैं।यूसीसी बिल में साफ किया गया है कि लड़का या लड़की दोनों या फिर कोई एक अगर उत्तराखंड का निवासी है तो उसे विवाह का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। उत्तराखंड में निवास करने वाले स्थान पर यह रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा। हालांकि, इसके लिए दो बड़े नियम लागू किए गए हैं। लड़का या लड़की के पहले से शादी-शुदा नहीं होना होगा। साथ ही, लड़के की आयु 21 साल और लड़की की आयु 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। यह दोनों स्थिति पाए जाने पर ही शादी का रजिस्ट्रेशन संभव होगा। इसके लिए पति और पत्नी दोनों को उचित प्रमाण देने होंगे। शादी के रजिस्ट्रेशन की धारा 10 की उपधारा 1 के तहत विवाह का रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा।उत्तराखंड में विवाहों के अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 2010 के तहत रजिस्टर्ड विवाहों को दोबारा पंजीकृत कराने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, ऐसे जोड़ों को यूसीसी बिल लागू होने के छह माह के भीतर सब रजिस्ट्रार के समक्ष इसकी घोषणा प्रस्तुत की जाएगी। यह वर्तमान निवास वाले इलाके के सब रजिस्ट्रार के कार्यालय में पेश किया जाएगा। इसके लिए यूसीसी बिल की धारा 10 की उपधारा 2 में प्रावधान किया गया है।पहले से शादी कर चुके जोड़ों को भी शादी का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसमें देखा जाएगा कि शादी किसी रूढ़ी या परंपरा के खिलाफ तो नहीं हुई है। हालांकि, इसमें जनजातीय समुदाय को अलग रखा गया है। यूसीसी बिल की धारा 10 की उपधरा 3 में यह प्रावधान किया गया है। बिल में साफ किया गया है कि एक पत्नी के रहते पुरुष या महिला को दूसरी शादी करने का अधिकार नहीं होगा।तलाक का भी होगा रजिस्ट्रेशनराज्य के किसी भी कोर्ट से यूसीसी बिल लागू होने के बाद पारित तलाक आदेशों का रजिस्ट्रेश कराना होगा। यूसीबी बिल की धारा 11 की उपधारा 1 में इस संबंध में प्रावधान किया गया है। वहीं, राज्य के बाहर के कोर्ट में पारित प्रदेश के निवासी की तलाक अर्जी पर आए फैसले के बाद धारा 11 की उपधारा 2 के तहत रजिस्ट्रेशन होगा। यूसीसी बिल लागू होने से पहले राज्य के किसी भी कोर्ट से पारित तलाक आदेश को धारा 11 की उपधारा 3 के तहत रजिस्टर करना होगा। इसी प्रकार प्रदेश के बाहर के कोर्ट में पारित आदेश धारा 11 की उपधारा 4 के तहत रजिस्टर कराए जाएंगे।यूसीसी बिल में तलाक को लेकर स्थिति साफ की गई है। इसमें साफ किया गया है कि शादी की एक साल की अवधि तक पति या पत्नी तलाक का आवेदन नहीं दे सकते हैं। तलाक के लिए पति और पत्नी दोनों को समान अधिकार दिया गया है। मुस्लिमों में तीन तलाक, हलाला और इद्दत जैसी प्रथाओं पर इस कानून के लागू होने के बाद पूरी तरह से रोक लग जाएगी।सरकार की ओर से होगी सब रजिस्ट्रार की नियुक्तिविवाह और तलाक से संबंधित मामलों को रजिस्टर करने के लिए सब- रजिस्ट्रासर की नियुक्ति की जाएगी। सरकार इसके लिए मुख्यालय स्तर पर महानिबंधक की नियुक्ति करेगी। यह सचिव से निचले स्तर के अधिकारी होंगे। हालांकि, इस पद पर उप जिलाधिकारी से निचले स्तर के अधिकारी की नियुक्ति नहीं की जा सकेगी। महानिदेशक के स्तर पर किसी भी क्षेत्र के लिए पर्याप्त संख्या में निबंधक और उप निबंधक की नियुक्ति की जाएगी। महानिबंधक और निबंधक दोनों अपील की फाइल देखेंगे। उप निबंधक विवाह और तलाक और अन्य फाइल देखेंगे।विवाह और तलाक रजिस्ट्रेशन पर अपील की सुविधाकिसी भी व्यक्ति के विवाह और तलाक के रजिस्ट्रेशन की फाइल को स्वीकृत और अस्वीकृत करने का अधिकार सब रजिस्ट्रार को होगा। वे उचित कागजात की अनुपलब्धता की स्थिति में यह निर्णय ले सकते हैं। वहीं, आवेदकों के सब रजिस्ट्रार के फैसले को चुनौती देने का अधिकार होगा। वे निबंधक और महानिबंधक के स्तर पर अपील कर सकेंगे। वहां वे उचित कागजात पेश कर विवाह या तलाक को रजिस्टर करा सकते हैं।