नशे के लिए बदनाम भांग में छिपा हर मर्ज का इलाज? खड़ी होने वाली है अरबों डॉलर की इंडस्ट्री

नई दिल्ली: भांग में नशा ही होता है और इससे शरीर को नुकसान पहुंचता है। अगर आप भी यही सोचते हैं तो आपको यह जानकर हैरानी होगी कि भांग से बना औषधीय तेल गंभीर बीमारियों के इलाज में कारगर सिद्ध हो रहा है। यह दावा खुद इसका इस्तेमाल कर रही 3 साल की नन्ही मरीज के पैरंट्स ने किया है। 3 वर्षीय सिया (बदला हुआ नाम) 9 महीने की थी जब उसे वैन डेर कन्नप सिंड्रोम (Van der Knapp syndrome) का पता चला था। यह एक दुर्लभ बीमारी है जिसमें दिमाग का सफेद पदार्थ धीरे-धीरे गायब होने लगता है। इस गंभीर बीमारी से पीड़ित सिया अन्य बच्चों की तरह अपनी गर्दन को मोड़ या घुमा नहीं सकती थी। बेटी की हालत देखकर सिया के माता पिता भी घबरा गए थे। उनकी परेशानी उस समय और बढ़ गई जब सिया का ट्रीटमेंट कर रहे न्यूरोलॉजिस्ट ने भी जवाब दे दिया। डॉक्टर ने कहा कि अब कोई इलाज नहीं बचा जो सिया को ठीक कर सके। बेटी की बीमारी से परेशान मां-बाप को उनके फैमिली डॉक्टर ने सलाह दी कि वह सिया के इलाज में भांग के औषधीय तेल का इस्तेमाल करें।

3 साल की सिया गंभीर बीमारी से जीत रही जंग

इसके बाद सिया के पैरंट्स ने भांग से बने औषधीय तेल से सिया का इलाज शुरू करवाया। सिया की 32 वर्षीय मां माया ने बताया कि पिछले दो सालों से सिया का इलाज चल रहा है। सिया की गर्दन की मूवमेंट में काफी सुधार आया है। तेजी से सेहत में सुधार को देखकर सिया के न्यूरोलॉजिस्ट हैरान रह गए हैं। माया को सलाह देने वाली डॉक्टर श्रुति श्रीधर के लिए सिया पहली मरीज थीं, जिनके लिए उन्होंने मेडिकल भांग की सलाह दी थी।

‘जानकारी के अभाव में सिया जैसे बच्चें इलाज से महरूम’

उन्होंने बताया कि ‘जब अक्टूबर 2020 में सिया की स्थिति का पता चला, तो मैंने फिजियोलॉजी को समझने के लिए वैन डेर कन्नप सिंड्रोम पर शोध करना शुरू किया। मुझे एक शोध लेख मिला जिसमें उल्लेख किया गया है कि सीबीडी तेल नए न्यूरॉन्स के निर्माण में न्यूरोप्रोटेक्शन और न्यूरोजेनेसिस का कारण बन सकता है।’ उन्होंने कहा कि शोध पत्र नया नहीं था। ऐसे में भांग के चिकित्सीय उपयोग के बारे में डॉक्टरों को कम जानकारी थी, जिसके चलते सिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा था। उन्होंने कहा, ‘जिस देश में भांग के पत्तों से बने प्रोडेक्ट सदियों से इस्तेमाल किए जा रहा हैं, वहां भांग के चिकित्सीय उपयोग के बारे में ज्ञान बेहद कम है।’

लोगों के कंफ्यूजन को दूर करने की पहल शुरू

पुणे स्थित श्रीधर और कैनबिनोइड्स इंडिया अकादमी के अन्य सदस्यों ने पिछले सप्ताह मध्य मुंबई में डॉक्टरों और इच्छुक लोगों के लिए चिकित्सीय भांग से जुड़े सभी कंफ्यूजन को लेकर चर्चा की थी। डॉक्टरों ने कहा, ‘लोगों को लगता है कि इलाज के दौरान भांग के पूरे पौधे का इस्तेमाल होता है जिसके विभिन्न भागों में लगभग 540 रसायन होते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। कैनाबीडियोल तेल या सीबीडी तेल, कैनाबिस में एक सक्रिय घटक है और आमतौर पर मेडिकल कैनाबिस के रूप में उपयोग किया जाता है।’ उन्होंने कहा, ‘दो सालों से श्रीधर के पास 200 से अधिक रोगी हैं, जिनमें से अधिकांश कैंसर या न्यूरोलॉजिकल रोगों जैसे मल्टीपल स्केलेरोसिस से संबंधित पुराने दर्द के साथ हैं।’

खड़ी होने वाली है अरबों डॉलर की इंडस्ट्री

दो साल पहले, संयुक्त राष्ट्र ने भांग को अनुसूची IV से पुनर्वर्गीकृत (Reclassified) किया, जहां पौधे के औषधीय गुणों में वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए इसे हेरोइन के साथ सूचीबद्ध किया गया था। यह अनुमान लगाया गया है कि चिकित्सा भांग उद्योग 2018 में 2 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 तक 146 बिलियन डॉलर हो जाएगा। भांग के औषधीय तेल के कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि भारत के पास भांग उगाने की क्षमता है, उसे इस क्षेत्र में अब काम करना चाहिए।’

‘भांग से बने तेल का कोई साइड इफेक्ट नहीं है’

श्रीधर और कैनबिनोइड्स इंडिया अकादमी से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि कैनबिडिओल तेल का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। फिलहाल मध्य प्रदेश, राजस्थान और ओडिशा सहित पांच राज्य सीबीडी के उत्पादन की मंजूरी देते हैं। Cannazo India के मालिक सुकृत गोयल इंदौर में एक यूनिट में औषधीय भांग का उत्पादन करते हैं। गोयल ने कहा, ‘मैं अन्य कंपनियों के लिए अनुबंध-निर्माण करता था, लेकिन महसूस किया कि इसमें काफी संभावनाएं हैं और अपनी खुद की कंपनी शुरू करने का फैसला किया।’ उधर पेन मैनेजमेंट एक्सपर्ट प्रीति दोषी ने कहती हैं, ‘हम भांग से बने औषधीय तेल का इस्तेमाल करने की सलाह मरीजों को नहीं देते हैं, लेकिन मरीज हमारे पास यह कहते हुए आते हैं कि कैनाबीडियोल तेल का उपयोग करने से उनके दर्द को कम करने में मदद मिली है।’