18वीं लोकसभा के लिए भर्तृहरि महताब बने प्रोटेम स्पीकर, कांग्रेस ने जताया विरोध

नई दिल्ली: सात बार के सांसद भर्तृहरि महताब को गुरुवार को लोकसभा का अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने यह जानकारी दी। रिजीजू ने कहा कि कटक से भाजपा सांसद महताब को लोकसभा के अध्यक्ष का चुनाव होने तक पीठासीन अधिकारी के रूप में कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 95 (1) के तहत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा अस्थायी अध्यक्ष (प्रोटेम) नियुक्त किया गया है। अठारहवीं लोकसभा के नवनिर्वाचित सदस्य अस्थायी अध्यक्ष के समक्ष शपथ लेंगे। की मदद के लिए बनाया इन नेताओं का पैनलरिजीजू ने बताया कि अस्थायी लोकसभा अध्यक्ष की सहायता पीठासीन अधिकारियों का एक पैनल करेगा जिसमें कांग्रेस नेता के. सुरेश, द्रमुक नेता टीआर बालू, भाजपा के राधा मोहन सिंह और फग्गन सिंह कुलस्ते तथा तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय शामिल हैं। महताब लोकसभा चुनाव से पहले बीजू जनता दल (बीजद) छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे।कांग्रेस ने महताब के प्रोटेम स्पीकर बनाए जाने का किया विरोधभर्तृहरि महताब के प्रोटेम स्पीकर बनाने का कांग्रेस ने विरोध किया है। कांग्रेस ने कहा कि उसके आठ बार के सांसद कोडिकुनिल सुरेश के बजाय बीजेपी के सांसद भर्तृहरि महताब को लोकसभा का अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया जाना संसदीय मानदंडों को नष्ट करने का एक और प्रयास है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सुरेश को अस्थाई अध्यक्ष नियुक्त किया जाना चाहिए था क्योंकि वह आठ बार के सांसद हैं, जबकि महताब सात बार के सांसद है।’संसदीय मानदंडों को नष्ट करने कोशिश’कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘संसदीय मानदंडों को नष्ट करने के एक और प्रयास के तहत भर्तृहरि महताब (सात बार के सांसद) को कोडिकुनिल सुरेश जगह लेते हुए लोकसभा का अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। सुरेश बतौर सांसद अपने अपने 8वें कार्यकाल में प्रवेश करेंगे।’ उन्होंने कहा, यह एक निर्विवाद मानदंड है कि अध्यक्ष के विधिवत चुनाव से पहले सबसे वरिष्ठ सांसद सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता करता है। यह हमारी पार्टी के लिए बेहद गर्व की बात है कि समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्ग के नेता के सुरेश ने आठ बार सांसद रहने की यह उपलब्धि हासिल की है। ‘सरकार ने के सुरेश को नजरअंदाज क्यों किया?’रमेश ने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि उसने के सुरेश को नजरअंदाज क्यों किया, वह कौन सा कारण था जिसने उन्हें इस पद से अयोग्य ठहराया? क्या इस निर्णय को प्रभावित करने वाले कुछ गहरे मुद्दे हैं, शायद सिर्फ योग्यता और वरिष्ठता से परे? परंपरा के अनुसार, जिस सांसद ने अधिकतम कार्यकाल पूरा किया है, उसे पहले दो दिनों के लिए प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया जाता है, जब सभी नवनिर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाई जाती है।उन्होंने यह भी कहा, ’18वीं लोकसभा में सबसे वरिष्ठ सांसद कोडिकुनिल सुरेश (कांग्रेस) और वीरेंद्र कुमार (भाजपा) हैं, दोनों अब अपना 8वां कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। कुमार अब केंद्रीय मंत्री हैं और इसलिए यह उम्मीद थी कि कोडिकुनिल सुरेश अस्थायी अध्यक्ष होंगे। रमेश ने कहा, उनकी जगह सात बार के सांसद भर्तृहरि महताब को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया गया है। वह छह बार बीजू जनता दल से सांसद रहे और अब भाजपा सांसद हैं। अठारहवीं लोकसभा का पहला सत्र 24 जून से शुरू होगा। नवनिर्वाचित सदस्य 24-25 जून को शपथ लेंगे। लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव 26 जून को होना है।(एजेंसी के इनपुट के साथ)