भगोरिया मेला: 50 हजार लोगों ने लिया मेले का आनंद, ढोलक की थाप पर थिरके आदिवासी युवा

मध्यप्रदेश के बुरहानपुर के नेपानगर के नेहरू स्टेडियम में लगे भगोरिया उत्सव मेला में 50 हजार से अधिक आदिवासी खंडवा, खरगोन, बड़वानी से अपनी पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे. इस दौरान मेले में पारंपरिक लोकगीत और ढोलक की थाप पर आदिवासी समाज के लोग थिरकते हुए नजर आए. दरअसल पूर्णिमा और पश्चिम निमाड़ का सबसे बड़ा आदिवासियों का भगोरिया उत्सव जोकि होली के पूर्व मनाया जाता है. आदिवासी समुदाय के लोग अलग-अलग स्थानों पर खेतों में और जंगलों में जाकर रहते हैं और यह लोग खेती कर या जंगल के फल फूलों और पत्ते जमा कर स्थानीय मार्केट में बेचकर अपना पालन पोषण करते हैं.
इनका मुख्य रूप से मनाए जाने वाला रंगों का त्योहार होली होता है. आदिवासी लोग होली के पूर्व होली का डंडा लगाते हैं. जिसे क्षेत्रीय भाषा में डंडा पूर्णिमा के नाम से भी जानते हैं. उस दिन से भगोरिया मेले की शुरुआत करते हैं. इस दौरान आदिवासी समुदाय के लोग अपने यहां क्षेत्र में लगने वाले भगोरिया मेले में अपनी पारंपरिक वेशभूषा पहनकर पहुंचते हैं क्योंकि अनुमान ऐसा माना जाता है कि आदिवासी लोग दूर जंगल और खेतों में ही निवास करते हैं. यह लोग अपने रिश्तेदारों और परिचितों से मिल नहीं पाते और वह अपने रिश्तेदारों और परिचितों से इसी मेले में मिलते जुलते भी हैं.
भगोरिया का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है
होली के पूर्व इनका भगोरिया पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. इसी तारतम्य में मध्य प्रदेश के बुरहानपुर के नेपानगर के नेहरू स्टेडियम में भगोरिया पर्व का मेला आयोजित किया गया इसमें दूरदराज क्षेत्रों से जिसमें कि मध्य प्रदेश के खंडवा खरगोन बड़वानी और झाबुआ जिले से आदिवासी समाज लोग 50 हजार से अधिक की संख्या में भगोरिया मेले में पहुंचे. इस दरमियान उन्होंने पारंपरिक वेशभूषा पहनी हुई थी, वही लड़कियां और लड़के भी तरह-तरह के रंग-बिरंगे अपने पारंपरिक कपड़े पहन कर वहां पहुंचे हैं.
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इस दौरान भगोरिया पर्व के इस पारंपरिक मेले में आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक लोकगीत और ढोलक की थाप पर पारंपरिक नृत्य करते हुए भी नजर आए. होली के पूर्व लगने वाले आदिवासियों के सबसे बड़े भगोरिया मेले का मुख्य आकर्षण यहां का मीना बाजार होता है. यहां पर आदिवासी समुदाय के लोग जमकर खरीदारी करते हैं और तरह-तरह के उनके पारंपरिक पकवान का लुफ्त उठाते हैं. आपको बता दें कि आदिवासी समुदाय में होली त्यौहार को लेकर बड़ा ही विशेष महत्व होता है और इनका यह सबसे बड़ा त्यौहार होता है. इसकी तैयारियां लगभग क्षेत्रीय भाषा में अगर हम कहे तो दांडा पूर्णिमा से शुरू हो जाती है और इसी दिन से भगोरिया पर्व के मेले की भी शुरुआत होती है.
इसी मेले के दौरान तय की जाती है शादी
इस दरमियान आदिवासी समुदाय के लोग मेले में पहुंचते हैं और होली पर्व को लेकर खूब खरीदारी भी करते हैं और मेले में एक दूसरे पर खूब रंग गुलाल उड़ाकर अपनी खुशी का इजहार भी करते हैं. होली पर्व की बधाई देते हैं. इस दौरान आदिवासी समुदाय के लोग अपने रिश्तेदारों और परिचितों से भी मेल मिलाप कर लड़का लड़की की शादी भी इसी मेले के दौरान तय कर दी जाती है. इस वर्ष मध्यप्रदेश के बुरहानपुर के नेपानगर में भगोरिया मेले का आयोजन नेहरू स्टेडियम पर जागृति कला केंद्र नेपानगर द्वारा किया गया है.
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इस मेले में मुख्य आकर्षण तरह-तरह की दुकाने एवं झूले और पारंपरिक पकवान होते हैं. इस वर्ष अभी तक मेले में 50 हजार से अधिक आदिवासी समुदाय के लोग पहुंचे हैं तो वहीं मेले को देखने के लिए आसपास के प्रदेशों से भी लोग पहुंचते हैं और आदिवासी समुदाय के पारंपरिक लोकगीत और नृत्य का आनंद उठाते हैं.