लोकसभा चुनाव से पहले लालू परिवार पर बड़ी आफत के संकेत, स्पेशल कोर्ट में तेज हुई सुनवाई

नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव से पहले लालू यादव, समेत कई विपक्षी नेताओं की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। सांसदों, विधायकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों का त्वरित निपटान सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह उन्हें एक सप्ताह से अधिक स्थगित नहीं करेगी। इसके बाद स्पेशल कोर्ट ने साप्ताहिक तारीखें देना शुरू कर दिया है ताकि मामलों के अंतिम फैसले में कोई देरी न हो। अदालत के निर्देश के बाद, लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और उनके बेटे और बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के खिलाफ आईआरसीटीसी और नौकरी के बदले जमीन मामले की सुनवाई में तेजी लाई जाएगी। उन पर, अन्य लोगों के साथ, भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में सीबीआई और ईडी द्वारा मामला दर्ज किया गया है।इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश के दिवंगत सीएम वीरभद्र सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में भी तेजी आ सकती है। आरोप तय हो चुके हैं और दोनों पक्षों की ओर से विशेष अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत किये जा रहे हैं। एक अन्य मामला राजद सांसद एडी सिंह के खिलाफ है, जिन पर ईडी ने कथित उर्वरक सब्सिडी घोटाले में मामला दर्ज किया है। अन्य मामले दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम और आप नेता संजय सिंह के खिलाफ हैं, जिन्हें कथित दिल्ली शराब नीति घोटाले में जांच एजेंसियों ने गिरफ्तार किया है।एडिशनल सेशन जज विशाल गोगने ने विधायकों के खिलाफ मामलों पर फैसला देने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत नामित स्पेशल जज, ने पिछले सप्ताह एक आदेश पारित किया था। इस आदेश में कहा गया था कि इस अदालत के समक्ष सभी ट्रायल/कार्यवाहियों में तेजी लाने की आवश्यकता है और स्थगन से बचा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को एक रिट याचिका में नामित अदालतों को निर्देश जारी किए थे। नामित अदालतें “पहले सांसदों और विधायकों के खिलाफ मौत या आजीवन कारावास की सजा वाले आपराधिक मामलों को प्राथमिकता देंगी। इसके बाद पांच साल या उससे अधिक कारावास की सजा वाले मामलों को प्राथमिकता देंगी। इसके बाद अन्य मामलों की सुनवाई करें। शीर्ष अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया था कि ट्रायल कोर्ट दुर्लभ और बाध्यकारी कारणों को छोड़कर मामलों को स्थगित नहीं करेंगी।उक्त फैसले के बाद, दिल्ली हाई कोर्ट ने 21 दिसंबर को विशेष (नामित) अदालतों को निर्देश पारित किए। आदेश में कहा गया है कि नामित अदालतें, जहां तक संभव हो, ऐसे मामलों को सप्ताह में कम से कम एक बार सूचीबद्ध करेंगी। इसके अलावा जब तक बहुत जरूरी न हो, इसमें कोई स्थगन नहीं देगी। साथ ही ऐसे मामलों के शीघ्र निपटान के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी। जहां भी जांच हो किसी गवाह की जिरह दिए गए दिन से आगे तक चलती है, मामले को, जहां तक संभव हो, ऐसे गवाह की गवाही समाप्त होने तक दिन-प्रतिदिन के आधार पर सूचीबद्ध किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में, विशेष जज ने सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों में साप्ताहिक तारीखें देना शुरू कर दिया है। जांच एजेंसियों के वकीलों को मौखिक रूप से निर्देश दिया है कि यदि सहायता के लिए आवश्यकता हो तो जांच अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करें।