संभल जाओ चीन! तवांग में झड़प के 7 दिन के भीतर ही भारत ने अपने ‘ब्रह्मास्त्र’ से दिया बड़ा संदेश

नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में चीनी सैनिकों के दुस्साहस की घटना को अभी 7 दिन भी नहीं हुए हैं और भारत ने आज बड़ा संदेश देते हुए अपने ‘ब्रह्मास्त्र’ अग्नि-5 का परीक्षण किया। परमाणु हथियारों से लैस यह बैलिस्टिक मिसाइल 5000 किमी से भी आगे तक के टारगेट को निशाना बना सकती है। पांच हजार किमी का मतलब यह है कि पूरा चीन अब इस घातक भारतीय मिसाइल की जद में है। रक्षा सूत्रों ने बताया है कि भारत ने सफलतापूर्वक अग्रि-5 का नाइट ट्रायल किया है। इस टेस्ट की टाइमिंग ही नहीं, खूबी भी बेहद खास है। दरअसल, नई टेक्नॉलजी और उपकरणों के साथ यह टेस्ट किया गया है। नए रूप में मिसाइल पहले की तुलना में काफी हल्की होगी। डिफेंस सोर्सेज के हवाले से बताया गया है कि इस ट्रायल ने साबित कर दिया है कि अगर जरूरत हुई तो अग्नि-5 की मारक क्षमता बढ़ाई जा सकती है।

बीजिंग भी अग्नि-5 के निशाने पर

9 दिसंबर 2022 की रात को तवांग में 300 की संख्या में चीनी सैनिक बॉर्डर पर भारतीय जवानों से भिड़े थे। इस झड़प में 5-6 भारतीय जवानों को मामूली चोट आई जबकि इससे दोगुनी संख्या में चीनी सैनिक जख्मी हुए। रात के समय चीन के हर कोने को दहलाने की क्षमता रखने वाली अग्नि-5 का टेस्ट पड़ोसी के नापाक मंसूबों को कुचलने के लिहाज से बड़ा घटनाक्रम है। भारत की यह मिसाइल चीन की राजधानी बीजिंग को भी हिट कर सकती है। दो साल पहले गलवान झड़प के बाद भारत ने न सिर्फ बॉर्डर पर अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है बल्कि परमाणु क्षमता में भी तेजी लाई है। भारत की परमाणु नीति ‘पहले इस्तेमाल न करने की’ रही है लेकिन चीन के हाइपरसोनिक मिसाइल प्रोग्राम को देखते हुए अग्नि-5 पर फोकस करना जरूरी हो जाता है। अग्नि-5 चीन के लिए क्यों खतरे की घंटी है, इसे समझने से पहले जान लीजिए कि अग्नि-5 मिसाइल कितनी पावरफुल है?

देश की सबसे पावरफुल मिसाइल

अग्रि-5 भारत की लंबी दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है, जो 5000 किमी दूर दुश्मन के ठिकाने को तबाह करने की ताकत रखती है। इस रेंज में पूरा चीन आ जाता है। यह इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल की शर्तों पर खरी उतरती है क्योंकि इसकी जद में अफ्रीका और यूरोप के देश भी आ जा रहे हैं। भारत में भले ही 5,000 किमी की बात हो रही हो, पर कुछ रिपोर्टों में दावा किया जाता है कि यह 8000 किमी तक मार कर सकती है। परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम यह मिसाइल 1500 किग्रा का न्यूक्लियर वॉरहेड लेकर उड़ सकती है, जो इसे देश की पावरफुल मिसाइल बनाती है। 1989 से ही भारत अग्नि सीरीज की मिसाइलों पर काम कर रहा है। अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, इजरायल, यूके के पास ही ICBM टेक्नॉलजी है।

अग्नि-5 को सड़क और रेल प्लेटफॉर्म से भी छोड़ा जा सकता है। ऐसे में इसे बड़ी आसानी से देश के किसी भी कोने में तैनात किया जा सकता है। मौसम की परिस्थितियों का भी इस पर कोई असर नहीं होता है।

अब चीन की पावर समझिए
पिछले साल खबर आई थी कि चीन ने परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम नई हाइपरसोनिक मिसाइल का टेस्ट किया। इससे अमेरिका ही नहीं, पड़ोसी भारत की भी चिंताएं बढ़ना लाजिमी है। हाइपरसोनिक ग्लाइड वीकल को रॉकेट से लॉन्च किया जा सकता है जो पृथ्वी की लोअर ऑर्बिट में मौजूद हो। अगर चीन का प्लान सफल रहता है तो वह दुनिया के किसी भी हिस्से को टारगेट कर सकता है। हाइपरसोनिक मिसाइल टेक्नॉलजी के लिए भारत भी प्रयास कर रहा है लेकिन वह अभी चीन, अमेरिका और रूस से पीछे है।

फिर भी भारत की तैयारी कम नहीं है। बताया जा रहा है कि भारत अग्नि-6 पर काम करना शुरू कर चुका है और इसकी मारक क्षमता 8000 किमी तक होगी। देश के पहले सीडीएस जनरल रावत ने एक बार कहा था कि भारत मिसाइलों के लिए रॉकेट फोर्स बनाने पर काम कर रहा है।

… तो छोड़ेंगे भी नहीं
भारत जंग के खिलाफ रहा है लेकिन उसका साफ कहना है कि शुरुआत हम नहीं करेंगे लेकिन दुश्मन ने हरकत की तो छोड़ेंगे भी नहीं। एक भारतीय एक्सपर्ट का कहना है कि भारत ‘नो फर्स्ट यूज पॉलिसी’ के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन किसी को यह नहीं भूलना चाहिए कि अग्रि-5 पूरे चीन को दहला सकती है। इसकी पिनपॉइंट एक्यूरेसी कमाल की है।

यह भी जान लीजिए कि अग्नि-5 का किसी दुश्मन देश के खिलाफ इस्तेमाल करने का फैसला टॉप पॉलिटिकल लीडरशिप के जिम्मे है। साफ है कि LAC पर किसी एक जगह झड़प या तनाव बढ़ने से इसके इस्तेमाल की संभावना नहीं है। लेकिन चीन को अग्नि-5 हमेशा याद दिलाती रहेगी कि जंग छेड़ने की हिमाकत की तो भारत के पास उसका ‘ब्रह्मास्त्र’ रात में भी तैयार बैठा है।